भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 257, कुल 618 में से

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पृष्ठ 257

[Header] १६ आल्हखण्ड । २५४

बेटी फुलवा के महलन में जागा देशराजका लाल १ देवा बोला ह्याँ हिरियाते मालिनि मानो कही हमार ॥ देर लगावो अब घरमाँ ना लावो उदयसिंह सरदार २ लै कै पलकी मालिनि चलि भै फुलवा पास पहुँची जाय ॥ फुलवा बोली तब हिरियाते अब यहि जावो तुरत लिवाय ३ इतना सुनिकै ऊदन चलिभे पहुँचे तुरत द्वार में आय ॥ बैठ पालकी में बघऊदन मनमें सुमिरि शारदांमाय ४ आयकै पहुँचे जब मालिनिघर देवा बोला वचन सुनाय ॥ साथ जनाना का करिबे नाँ जैबे जहाँ चँदेलाराय ५ बन्यो जनाना तुम नरवर में कैहौं हाल जाय दरबार ॥ बाना छोड़े रजपूती का ऊदन जीवैका धिक्कार ६ इतना सुनतै कायल व्हैगा नाहर उदयसिंह सरदार ॥ पेट मारने के कारण सों ऊदन लीन्ही हाथ कटार ७ हाथ पकरिकै देवाठाकुर बोला सुनो बनाफरराय ॥ चरचा करिबे ना मोहबेमाँ ऊदन साँच देवँ बतलाय ८ भई लालसा हमरे मनमाँ फुलवा देखनको अधिकाय ॥ करु अभिलाषा पूरण हमरी आल्हाकेर ल्हुरवा भाय ६ ऊदन बोले तब देवाने तुमको कैसे लवँ दिखाय ॥ जैसे बताओ देवा ठाकुर तैसे साँचो करैं उपाय १० इतना सुनिकै देवा बोले योगी बनो बनाफरराय ॥ अलख जगैवें पुर घर घर में याही सीधोसाद उपाय ११ गइ मनभाई बघऊदन के दूनों लीन्ह्यो भस्म रमाय ॥ काँधे माला औ मृगछाला आला योगिरूप बनाय १२ गुदड़ी लीन्ही दोऊ ठाकुर तामें छिपी ढाल तलवार ॥

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