भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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उदयसिंहका विवाह । २७१ ३३ गोला लागै ज्यहि साँड़िया के तुरतै गिरै भूमि अललाय १५ जौने बैलके गोला लागै मानो मगर फुल्यावै खायँ ॥ जौने रथमाँ गोला लागै ताके टूक टूक द्वैजायँ १६ बड़ी दुर्दशा भै तोपन में धुवना रहा सरग में छाय ॥ दूनों दल आगे को बढ़िगे तोपन मारु बन्द द्वैजाय १७ उठीं बँदूकै बादलपूर की जो नब्बे कै याक बिकाय ॥ मघा के बूंदन गोली बरसें झरसैं सबै शूर त्यहि घाय १८ दूनों दल आगे को बढ़िगे रहिगा एक खेत मैदान ॥ भाला बरछी तलवारिन का लाग्यो होन घोर घमसान १६ अपन परावा कछु चीन्हैंना मारैं एक एक को जवान ॥ सूंढ़ि लपेटा हाथी भिड़िगे घोड़न भिरी रान में रान २० कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि कहुँ कहुँ देखि परै तलवार ॥ दूनों दिशिके रजपूतन ने कीन्ह्यो तहां भड़ामड़मार २१ चलै कटारी बूँदी वाली ऊना चलै विलाइति क्यार ॥ तेगा धमकैं बर्दवान के कटि कटि गिरैं शूरसरदार २२ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥ रुधिर किसरिता तहँ बहिनिकरी जूझे क्षत्री अमित अपार २३ हाथी सोहैं त्यहि सरिता माँ छोटे दीपन्न के अनुमान ॥ परे बछेड़ा त्यहि नदिया माँ तिनको नदी कगाराजान २४ छुरी कटारी मछली ऐसीं ढालैं कछुवा परैं दिखाय ॥ वहैं सेवारा जस नदिया माँ तैसे बहे०गार तहँ जायँ २५ नचैं योगिनी खप्पर लीन्हे मज्जैं भूत प्रेत बैताल ॥ परीं लहासैं जो मनइन की तिनकाखावैं श्वानशृगाल २६ बड़ी सनेही नरदेही में कहुँ कहुँ चढ़े काक खगजायँ ॥