आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
पृष्ठ 290, कुल 618 में से
संदर्भ में पढ़ेंचन्द्रावलि की चौथ। २८७ ५ बिदा होन जब ऊदन लागे मल्हना छाती लीन लगाय ३५ कहि समुझावा भल ऊदन को कीन्ह्यो रारि नहीं तुम जाय ॥ देश पराये में गमखाना यहही नीति बनाफरराय ३६ इतना कहिकै रानी मल्हना आशिर्वाद दीन हरषाय ॥ सुमिरि भवानी मइहरवाली मनियादेव हृदयसों ध्याय ३७ तुरत बेंदुला पर चढ़ बैठ्यो औ चलि दियो बनाफरराय ॥ माहिल शाले चंदेले के सोतो गये महोबे आय ३८ गये कचहरी परिमलिक की माहिल बोल शीश नवाय ॥ सबियां क्षत्री ह्याँ बैठे हैं पै नहिं ऊदन परें दिखाय ३६ इतना सुनिकै राजा बोले नींके हवैं लहुरवा भाय ॥ पता लगावैं माहिल ठाकुर कहँ पर गये बनाफरराय ४० नीके जानैं सब माहिल को इनके चुगुलिन का वयपार ॥ कउन बतावा तहँ माहिल को कहँ पर उदयसिंह सरदार ४१ तहँ ते उठिकै माहिल चलिभे मारग पता लगावत जायँ ॥ चुगुल शिरोमणि माहिलठाकुर याते कौन देय बतलाय ४२ मालिनि बिटिया उरईवाली बेही नगरमहोबे भाय ॥ पता नं पायो जब काहू ते माहिल गये तासुघर धाय ४३ हाल बतायो सब माहिल को सुनतै कूच दीन करवाय ॥ जायकै पहुँचे फिरि दिल्ली में जहँ पर रहै पिथौराराय ४४ ऊदन पहुँचे ह्याँ दिल्ली में डेरा परा बाग में जाय ॥ बड़ी खातिरी भै माहिल कै राजा पास लीन बैठाय ४५ माहिल बोले तहँ राजाते मानो कही पिथौराराय ॥ ऊदन आये हैं मोहबे ते साँचे हाल देयँ बतलाय ४६ कालिह सबेरे मलखे अइहैं दिल्ली देहैं आगिलगाय ॥