भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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९ आल्हखण्ड । १८८ यह सुनि आयन परिमालिकते मानो साँच पिथौराराय ४७ इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल काह गयो बौराय ॥ कौन दुश्मनी परिमालिक ते . दिल्ली शहर देयँ फुकवाय ४८ ऊदन जैहैं बौरीगढ़को हमको खबरि मिली है साँच ॥ असरिस लागी माहिल ठाकुर मारों निकरि परै तबकाँच ४६ इतना सुनिकै माहिल चलिभे बौरीगढ़ै पहुँचे जाय ॥ बोले ताहर सों पिरथीपति तुम ऊदनको लवो बुलाय ५० इतना सुनिकै ताहर चलिभे बगिया फेरि पहुंचे जाय ॥ तुम्हें बुलायो महराजा है यह ऊदन ते कह्यो सुनाय ५१ इतना सुनते ऊदन ठाकुर बेंदुल उपर भयो असवार ॥ सुमिरि शारदा महिरवाली अपनी लीन ढालतलवार ५२ ताहर ऊदन दूनों चलि भे औ दरबार पहुंचे आय ॥ हाथ जोरिकै महराजा के सम्मुख ठाढ़भयो शिरनाय ५३ पाग उतारी बघऊदन ने औ धरिदीन चरणपर जाय ॥ देखि नम्रता उदयसिंह कै राजा पास लीन बैठाय ५४ पिरथी बोले उदयसिंह ते कहँ को चले बनाफरराय ॥ इतना सुनते ऊदन बोले मानो साँच पिथौराराय ५५ बहिनी हमरी जो चन्द्रावलि ताकी चौथि लेन को जायँ ॥ दर्शन करिकै पृथ्वीराज के जायो कह्यो चँदेलोराय ५६ सोई दर्शन को आयेहन मानो सत्य वचन महिपाल ॥ इतना सुनिकै पिरथी बोले बेटा देशराज के लाल ५७ लौटि मोहोवे ऊदन जावो मानो सत्य वचन यहिकाल ॥ मारे जैहौ बौरीगढ़ में ऊदन साँचे कहैं हवाल ५८ हवैं लुटेरा यदुवंशी सब कैसे पठे दीन परिमाल ॥