भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 310, कुल 618 में से

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चन्द्रावलि की चौथ । ३०७ २५ बिदा कराये बिन जैबैना बहुतनधजीधजीउड़िजाय १०८ सूरज बोले मलखाने ते यह नहिं होनहार यहिबार ॥ इतना कहिकै सूरज ठाकुर अपनी खैंचिलीनतलवार १०६ ऐंचिकै मारा मलखाने के मलखे लीन ढालपर वार ॥ आल्हा बोले मलखाने ते ठाकुर सिरसा के सरदार ११० पकरिकै बाँधो तुम सूरज को इनपर करो नहीं अब वार ॥ गरुहर नाते के लड़िकाहैं मानों सिरसाके सरदार १११ सुनिकै बातें ये आल्हा की तुरतै उतरिपरा मलखान ॥ पकरिकै बाँध्यो रणमण्डल में देखें खड़े अनेकन ज्वान ११२ सूरज बन्धन दीख जुरावर पहुँचा तुरत तहाँ पर आय ॥ औ ललकारा मलखाने को ठाढ़े होउ बनाफरराय ११३ इतना सुनिकै बघऊदन ने तुरतै पकरि जुरावर लीन ॥ उतरि कबुतरी ते मलखाने बन्धनतुरत तहाँपर कीन ११४ दूनों लरिका बीरशाह के आल्हाठाकुर लीन बँधाय ॥ भागीं फौजैं बौरीगढ़ की काहू धरा धीर ना जाय ११५ खबरि सुनाई बीरशाह को क्षत्रिन नीचे शीश नवाय ॥ बन्धन सुनिकै दउ पुत्रन को दुखिया भयो यादवाराय ११६ इन्द्रसेन औ मोहन बेटा इनको तुरत लीन बुलवाय ॥ हाल बतायो समरभूमि को आशिर्वाद दीन हर्षाय ११७ करो तयारी सब भाइन सह आल्है पकरि दिखावो आय ॥ इतना सुनिकै सबियाँ बेटा चलिभे राजै शीश नवाय ११८ आयकै पहुँचे निज सेनन में डंका तुरत दीन बजवाय ॥ बाजे डंका अहर्तंका के हाहाकार शब्द गा छाय ११९ पहिल नगारा में जिन बन्दी डंके शूर भये हुशियार ॥

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