आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें२* आल्हखण्ड । ३१२ बन्धनसुनिकै सब लड़िकनको राजा गये सनाकाखाय १६६ खबरि पहुँचिगै रनिवासे में राजा रानी लीन बुलाय ॥ बौहर आई चन्द्रावलि तहँ सोऊगई कथा सब गाय १६७ 'हमरे घरके माहिल बैरी उनके चुगुलिनका वयपार ॥ कहा मानिकै तुम माहिल का दादा किह्योयहांलग रार १६८ ना सुनिपावा मैं पहिले ते माहिलदीन्ह्यो रारि लगाय ॥ तौ अस हालत कसहोतै अब तबहीं देति सबै समुझाय १६६ योगी बनिकै ब्रह्मा आये सूरति दीख दूरि ते माय ॥ होति खटपटी जो ऊदन ते ब्रह्माभाय न अउतोधाय १७० टेक कठिन है बघऊदन कै हम खूब जानैं ठीक स्वभाव ॥ मिलिये दादा अब आल्हा ते याही जानो नीक उपाव १७१ सुनि सुनि बातें सब बौहर की रानी नृपति दीन समुझाय ॥ सुनिकै बातें महरानी की राजा ठीक लीन ठहराय १७२ आगि लगाई माहिल ठाकुर नातेदारी दीन तुराय ॥ राजा सोचत यह अपने मन पहुँचातुरतसिंहासनआय १७३ कलम दवाइति कागज लैकै । चिट्ठी लिखनलाग ततकाल ॥ जितनी बातें माहिल कहिगा लिखिगेयथातथ्यनरपाल १७४ फिरि कछु बातें चन्द्रावलिकी लम्बो पत्तो लिखा बनाय ॥ बन्धन छोरो सब पुत्रन को तुरतै विदा लेउ करवाय १७५ कीनि घटिहई माहिल ठाकुर नाहक रैसा दीन लगाय ॥ कहा मानिकै हम माहिल का साँचोसाँच गयन बौराय १७६ लिखी विधाता कै मेटै को साँचो कहैं गीत सब गाय ॥ लिखिकै चिट्ठी दै धावन को राजा बैठिगये शिरनाय १७७ लैकै चिट्ठी धावन चलिभा पहुँचा जहाँ बनाफरराय ॥