भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 382, कुल 618 में से

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पृष्ठ 382

लाखनिका विवाह । ३८१ १५ ताते जावो तुम बूँदी को होवै पूर हमारो भोग १५२ बातैं सुनिकै गजमोतिनि की मलखे धरा पीठिपर हाथ ॥ होय पियारी अस नारी जो तवहीं रहे धर्म की पाथ १५३ बड़ी पियारी निज नारी को मलखे बार बार समुझाय ॥ गये दुवारा फिरि माता घर चलिभेचरणकमलशिरनाय १५४ घोड़ी कबूतरीपर चढ़ि बैठे डंका तुरत दीन बजवाय ॥ लैके लश्कर मोहबे आये जहँ पर रहें चँदेलेराय १५५ आय सिंहासन के लगभग में ठाढ़े भये शीश को नाय ॥ आल्हा ऊदन की गाथा को मलखे गये तहाँ परगाय १५६ भयो बुलौवा हम ब्रह्माका आयसु कहामिलै महराज ॥ परम दयालू चित तुम्हरो है स्वामीपूँछि करौं मैं काज १५७ गुरु पितु भ्राता अरु त्राता तुम हमरे सदा चँदेलेराय ॥ आज्ञापावों महराजा कै तौ ऊदनका लवों छुड़ाय १५८ सुनिकै बातैं मलखाने की आयसु दीन रजापरिमाल ॥ लैके ब्रह्माको जावो तुम दूनों बहू हमारेबाल १५६ माथनाइ कै महराजा को मल्हना महल पहुँचे जाय ॥ चिट्ठी पढ़ि तँह आल्हा की मलखेदीनसकलसमुझाय १६० विपदा सुनिकै बघऊदन कै मल्हना रोयदीन त्यहिबार ॥ हाथ पकरिकै फिरि ब्रह्माको बोली लेउ पूत तलवार १६१ क्षत्री द्वैकै समर सकावै जावै तुरत नरक के द्वार ॥ परम पियारे सुतजावो तुम हमरो पूरहोय उपकार १६२ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर अपनी लीन ढाल तलवार ॥ बिदा मांगिकै पितु मातासों दोऊ चलत भये सरदार १६३ सजिगा घोड़ा हरनागर जो तापर ब्रह्मा भये सवार ॥

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