आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंलाखनिका विवाह । ३८३ :१७ सुमिरन ॥ बेदन ध्यावों सामबेद को बिप्रन परशुराम महराज ॥ क्षत्रिन ध्यावों रामकृष्ण को बैश्यन नन्दभये शिरताज १ शूद्रन ध्यावों मैं निषाद को कीशन पवनतनय बलवान ॥ ईशन ध्यावों शिवशङ्कर को शीशनबढ़ा दशानन ज्वान २ ध्याय नदीशनमें बड़वानल पक्षिन बैनतेय महराज ॥ ध्याय गिरीशन में हिमपर्वत नारिन जनकसुता शिरताज ३ कुँवारिन ध्यावैं हम राधाको राखैं सदा हमारी लाज ॥ परम पियारी यदुनन्दन की हमरी माननीय शिरताज ४ सबै पुस्तकन में दुर्गा जी अबहूं बिप्रन की रखवार ॥ खूटि सुमिरनी गै ह्याँते अब बूँदी हाल सुनो यहिबार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ देखिकै फौजै मलखाने की बोला तुरत कनौजीराय ॥ फौजै आई हैं बूँदी ते आल्हा देखु भीर अधिकाय १ चिट्ठी पठई तुम सिरसा को आये नहीं वीर मलखान ॥ कैसी करिहौ यहि समया में आल्हा समरभूमि मैदान २ सुनिकै बातैं महराजा की आल्हा बोले शीश नवाय ॥ मुर्चा बन्दी अब करवावो चर्खन तोप देउ चढ़वाय ३ तर्बलंग धावन सिरसावाला आल्हा फौज पहुंचा आय ॥ शीश नाय कै सो आल्हा को मलखे आवन दीन बताय ४ दीन इनामै त्यहि धावन को ब्रह्मा मलखे लीन बुलाय ॥ खबरि पाय कै सो आल्हा की दूनों गये तहाँ पर आय ५ बड़ी खातिरी जैचँद कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥ खबरि बताई सब बूँदी की जयचँद बार बार पछिताय ६