आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
लाखनिका विवाह । ३८३ :१७ सुमिरन ॥ बेदन ध्यावों सामबेद को बिप्रन परशुराम महराज ॥ क्षत्रिन ध्यावों रामकृष्ण को बैश्यन नन्दभये शिरताज १ शूद्रन ध्यावों मैं निषाद को कीशन पवनतनय बलवान ॥ ईशन ध्यावों शिवशङ्कर को शीशनबढ़ा दशानन ज्वान २ ध्याय नदीशनमें बड़वानल पक्षिन बैनतेय महराज ॥ ध्याय गिरीशन में हिमपर्वत नारिन जनकसुता शिरताज ३ कुँवारिन ध्यावैं हम राधाको राखैं सदा हमारी लाज ॥ परम पियारी यदुनन्दन की हमरी माननीय शिरताज ४ सबै पुस्तकन में दुर्गा जी अबहूं बिप्रन की रखवार ॥ खूटि सुमिरनी गै ह्याँते अब बूँदी हाल सुनो यहिबार ५ अथ कथाप्रसंग ॥ देखिकै फौजै मलखाने की बोला तुरत कनौजीराय ॥ फौजै आई हैं बूँदी ते आल्हा देखु भीर अधिकाय १ चिट्ठी पठई तुम सिरसा को आये नहीं वीर मलखान ॥ कैसी करिहौ यहि समया में आल्हा समरभूमि मैदान २ सुनिकै बातैं महराजा की आल्हा बोले शीश नवाय ॥ मुर्चा बन्दी अब करवावो चर्खन तोप देउ चढ़वाय ३ तर्बलंग धावन सिरसावाला आल्हा फौज पहुंचा आय ॥ शीश नाय कै सो आल्हा को मलखे आवन दीन बताय ४ दीन इनामै त्यहि धावन को ब्रह्मा मलखे लीन बुलाय ॥ खबरि पाय कै सो आल्हा की दूनों गये तहाँ पर आय ५ बड़ी खातिरी जैचँद कीन्ह्यो अपने पास लीन बैठाय ॥ खबरि बताई सब बूँदी की जयचँद बार बार पछिताय ६
१८ आल्हाखण्ड । ३८४ मलखे बोले तब राजा ते साँची सुनो कनौजीराय ॥ उत्तर दक्षिण पूरब पश्चिम चारो दिशा लेउ घ्यग्वाय ७ तुमतो लड़ियो उत्तर दिशिको दक्षिण समर करब हम आय ॥ कछुदल पठवो पूरब पश्चिम बूँदी शहर लेउ घिराय ८ इतना कहिकै मलखे ब्रह्मा फोजन फेरि पहूँचे आय ॥ बाजे डंका कनौजिया के हाहाकार शब्दगा छाय ६ बिनही डंका के मलखाने दक्षिण दिशा पहूँचे जाय ॥ म्वती जबाहिर उत्तर दिशिमाँ लै कै फौजगयो फिरिआय १० तोपैं धरिगइँ फिरि चर्खेन में तिनमें बत्तीदई लगाय ॥ छूटे गोला हाहाकारी धुवनारहा सरगमें छाय ११ लागे गोला ज्यहि क्षत्री के मानो गिरह कबूतरखाय ॥ गोला लागै ज्यहि घोड़ाके आधे सरगलिहे मड़राय १२ लागै गोला ज्यहि हाथी के झुप्पे देवै भूमि बिछाय ॥ जौने ऊंटके गोला लागै सो मुहभरा तुरतगिरिजाय १३ अरर अरर गोला छूटैं जैसे प्रलय मेघ घहराय ॥ जौने रथमाँ गोला लागै पहियाधुरीसहितउड़िजाय १४ बड़ी दुईशा भै तोपन में तब फिरि मारुबन्द द्वैजाय ॥ दुनो गोल आगे का बढ़िगे मुर्चा परा बरोबरि आय १५ कल्ला भिड़िगे असवारन के घोड़न भिड़ी रानमें रान ॥ सूंडि लपेटा हाथी भिड़िगे लाग्यो होन घोर घमसान १६ कउँधालपकनिविजुलीचमकनि रणमाँ चमाचम्म तलवार ॥ झल् झल् झल् झल् छुरी झलकैं भारी ढालनकी ठनकार १७ धम् धम् धम् धम् बजैं नगारा मारा मारा परै सुनाय ॥ न् सन् सन् सन् गोली सनकैं तेगा मन्न मन्न मन्नाय १८
लाखनिका विवाह। ३८५ मारु मारु करि मौहरि बाजै बाजै हाव हाव करनाल ॥ बड़ी लड़ाई भै बूँदीमाँ जूझे बड़े बड़े नरपाल १६ पैदल पैदल कै बरणी मै औ असवार साथ असवार ॥ कोताखानी चलैं कटारी ऊनाचलै बिलाइति क्यार २० कटिकटि कल्ला गिरैं खेतमाँ उठि उठि फेरि करैं तलवार ॥ ना मुहँ फेरैं कनउज वाले ना ई बूँदी के सरदार २१ ब्रह्मा मलखे दक्षिण दिशिसों पहुँचे बीच शहरमें आय ॥ बड़ा कुलाहल भा बूँदी माँ काहू धीर धरा ना जाय २२ लीन्हे फौजै मलखाने फिरि फाटक उपर पहुँवा जाय ॥ औ कहि पठवा गंगाधर को सबकी कैद देउ छुटवाय २३ नाहीं बचिहौ ना महलन माँ बूँदी शहर देउँ फुँकवाय ॥ सुना सँदेशा महराजा जब मनमाँ बार बार पछिताय २४ पै जब सूझी कछु मनमाँ ना सबकी कैद दीन छुटवाय ॥ घायल करहति ऊदन लाखनि मलखे पास पहुँचे आय २५ मिला भेंट करि सब आपस में उत्तर दिशा चले हर्षाय ॥ एक तरफ सों जयचंद राजा दूसरी तरफ बनाफरराय २६ मोती जवाहरि परे बीचमाँ सबके गयी प्राणपर आय ॥ बड़ी लड़ाई भै बूँदी मा अद्भुत समर कहा ना जाय २७ मारे मारे तलवारिन के नदिया वही रक्तकी धार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौड़ा भै औ रुण्डन के लगे पहार २८ घोड़मनोहर की पीठी सों देवा गरू देय ललकार ॥ चढ़ा कबूतरी पर मलखाने ऊदन बेंदुलपर असवार २९ भयो जवाहरि फिरि सम्मुख माँ लीन्हे तीनिलाख असवार ॥ का गति बरणों मैं मोती कै दूनों हाथ करै तलवार ३०
२० आलहखण्ड । ३८६ मीराताल्हन बनरस वाला सिर्गा घोड़े पर असवार ॥ अल्ला अल्ला औ बिसमिल्ला करिकै खूब मचाई रार ३१ झुके सिपाही बूँदी वाले दोऊ हाथ करैं तलवार ॥ बड़े लड़ैया मुहबेवाले एकते एक शूर सरदार ३२ येऊ मारैं औ ललकारैं हारैं नहीं तहाँ पर ज्वान ॥ छोड़ि आसरा जिंदगानी का क्षत्रिन खून कीन मैदान ३३ दूनों दिशि की तहँ मारुन माँ क्षत्री बूँदी के हैरान ॥ तीनि लाख बूँदीके ठाकुर ह्वैगै समर भूमि वैरान ३४ मती जवाहर त्यहिसमया माँ दूनों भाय गये घबड़ाय ॥ मलखे ठाकुर त्यहि औसर माँ तिनका कैदलीन करवाय ३५ भागि सिपाही अरझ्वारातब अपने अपने लिहे परान ॥ जीति के डंका तब बजवाये नाहर समरधनी मलखान ३६ राजा जयचँद के तम्बू माँ पहुँचे सबै शूर सरदार ॥ को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरबार ३७ जितने घायल अपनी दिशिके सबको तुरतलीन उठवाय ॥ मलहम पट्टी तिन क्षत्रिन के घायन ऊपर दीन कराय ३८ सुनी हकीकति जब गंगाधर मनमाँ बारबार पछिताय ॥ मेलछाँड़िकै त्यहि औसर माँ और न कछू ठीक ठहराय ३६ लिखिकै चिट्ठी त्यहि समयामाँ जयचँद पास दीनपठवाय ॥ कैदी छोड़ो दोउ पुत्रनको भाँवरि तुरत लेउ करवाय ४० जहँना तम्बू महराजा का धावन तहाँ पहुँचा आय ॥ चिट्ठी दीन्ह्यो महराजाको दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४१ पढ़िकै चिट्ठी जयचँदराजा तुरतै सबका दीनसुननाय ॥ सम्मत सबके तब याही भै कैदी देउ पुत्र छुड़वाय ४२
लाखनिका विवाह । ३८७ २१ म्वती जवाहर दोउ पुत्रन को राजा तुरत लीन बुलवाय ॥ लिखी हकीकति जो गंगाधर तिनको तुरतदीन बतलाय ४३ गंगा कैलेउ तुम तम्बुन माँ तुम्हरी कैद देइँ छुड़वाय ॥ सुनिकै बातें ये जयचंदकी दोऊ गंगा लीन उठाय ४४ तब छुड़वायो जयचंद राजा पहुँचे धाम आपने जाय ॥ सम्मत कीन्ह्यो फिरि गंगाधर मड़ये मूड़ लेब कटवाय ४५ अकसर लड़काको लै आवो जावो पूत जवाहरलाल ॥ सुनिकै तुरतै सो गमनत भा आयो जहाँ बैठ नरपाल ४६ कहि समुझायो सब राजा को दोऊ चरणन शीश नवाय ॥ अकसर लड़का को पठवावो सबियाँ शंका देउ भुलाय ४७ इतना सुनिकै मलखे बोले राजन हुकुम देउ फरमाय ॥ पांच सात मिलि हमअब जैबे भौंरी तुरत देब करवाय ४८ सुनिकै बातें मलखाने की आयसु दीन कनौजीराय ॥ बैठि पालकी में लखराना देबी फूलमती को ध्याय ४६ आल्हा ऊदन मलखे ब्रह्मा देवा बनरस का सरदार ॥ गंगा मामा लखराना का सोऊ बांधि लीन हथियार ५० सवैया ॥ ते सरदार सबै चलिकै फिरि भीतर भौन के जाय सिधाये । सुन्दर आसन डारितहाँ नृप आदर भाव किये अधिकाये ॥ पण्डित आयकै बैठि गयो गठिबन्धन हेतु सुता बुलवाये । सातसुहागिल आय तहाँ ललिते मन मोदन गीत सुनाये ५१ पहिली भाँवरिके परतै खन क्षत्री आये आध हजार ॥ आल्हा ऊदन मलखे ब्रह्मा इनहुन खैंचि लीन तलवार ५२
२२ आल्हखण्ड । ३८८ आधे आँगन भाँवरि होवैं आधे होय भड़ाभड़ मार ॥ मारे मारे तलवारिन के आँगन वही रक्त की धार ५३° काटिकै कल्ला दुइ पल्ला करि लल्ला बच्छराज के लाल ॥ लड़ै इकल्ला अति हल्लाकरि अल्हो खैर करैं त्यहिकाल ५४ भा खलभल्ला औ हल्ला अति बल्लन क्यार मनो त्यवहार ॥ काटि बजुल्ला सोने छल्ला लल्ला उदयसिंह सरदार ५५ हनि हनि मारै औ ललकारै देवा मैनपुरी चौहान ॥ म्वती जवाहर दूनों भाई लीन्हे तहाँ अनेकन ज्वान ५६ बड़ी लड़ाई करिहारे तहँ पै नहिं विजय परी दिखराय ॥ तब पछितान्यो फिरि गंगाधर दीन्ह्यो मारु बन्द करवाय ५७ कन्या दान दीन आनँद सों नेगिन नेग दीन हर्षाय ॥ सातो भाँवरि पूरी करिकै पूरा ब्याह दीन करवाय ५८ बिदा न करिबे हम ब्याहे में लीन्ह्यो गवन सालमें आय ॥ इतना कहिकै गंगाधर जी दायज खूबदीन अधिकाय ५६ बात मानिकै चन्देले फिरि तहँ ते कूच दीन करवाय ॥ विदा मांगिकै मलखे ब्रह्मा पहुँचे नगर मोहोबे आय ६० बाजत डंका अह्तंका के कनउज गये कनौजी आय ॥ अनँद बधैया घर घर बाजीं मंगल गीतरही सब गाय ६१ रानी तिलका त्यहिअवसर में बिप्रन दान दीन अधिकाय ॥ ध्रुबी शारदा के बरदानी दूनों भाय बनाफरराय ६२ सवैया ॥ गावत गीत सबै तिनको जिनको कछु ज्ञान बलै अधिकाई । १-( अल्हा ) देवी का नाम है ॥
लाखनिका विवाह। ३८६ २३ ते मनमाँझ विचारकरै औ धरै मनमें प्रभुकी प्रभुताई ॥ त्यागत झूठ प्रपञ्च सबै औ जबै मन भासत हैं रघुराई । नाशत पाप सबै ललिते फलिते जगधर्म कि बेलि सदाई ६३ सोई मन्तर मन अन्तर धरि यन्तर धर्म बनाफरराय ॥ बड़ी बड़ाई कनउज पायो कीरति रही आजलों छाय ६४ बिपदा सहिकै यहि दुनियामा त्यागा धर्म नहीं कहुँभाय ॥ तासों बेली यह फैली अति सुन्दर धर्म रूप जलपाय ६५ अधरम बेली दुरयोधन की छैलिकै लीन जगतकोछाय ॥ तैसे - रावण कंसासुरहू बाढ़यो धनै बलै अधिकाय ६६ रीछ बँदरवा ग्वालन बालन दूनन दीन्यो तुरत नशाय ॥ तासों चाहिये यहि दुनियामाँ नितप्रतिनवत नवन नैजाय६७ धन बल बाढ़ै त्यहि दुनियामाँ कीरति जाय धरामें छाय ॥ खेत छूटिगा दिननायक सों झंडागड़ा निशाकोआय ६८ तारागण सब चमकन लागे संतन धुनी दीन परचाय ॥ परे आलसी खटिया तकितकि घोंघों करठ रहे घरांय ६६ आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय ॥ हुकुम तुम्हारो जो पावत ना ललिते कहतकथाकस गाय७० रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलों तुम यशसों रहौ सदा भरपूर ७१ माथ नवावों पितु अपने को जिनबल गाथ भई यह पार ॥ जैसे सेयो बालापन में तैसे सदा होउ रखवार ७२ जल थल जन्मों चहु पहाड़ में स्वामी होयँ राम भगवान ॥ यह बर पावैं ललिते पण्डित खण्डित होय न हमरी बान ७३
२४ आल्हखण्ड । ३६० पूर विवाह भयो लाखनि को हँाते करों. तरंगको अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानी कन्त ७४ इति श्रीलखनऊनवासि (सी, आई, ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजवाबूप्रयागनारायण जीकी आज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलांनिवासि मिश्र वंशोद्भवबुध कृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृत लाखनि पाणिग्रहणवर्णनोनामद्वितीयस्तरंगः २ ॥ लाखनिरानाजीका विवाह सम्पूर्ण ॥ इति ॥
अथ आल्हखण्ड ॥ गाँजर की लड़ाईका प्रारम्भ ॥ सवैया ॥ दानिन में बलि औ हरिचन्द शिबी दधि कर्ण इन्ही यश पाये । बीरन में गिनती रघुबीर औ धीरन कृष्ण युधिष्ठिर गाये ॥ पापिन औ परितापिन में जग कंस दशानन बीर सुनाये । जापिन योग उदार अपार सदाशिवही ललिते मन आये १ सुमिरन ॥ प्रथमै ध्यावों श्री गणेश को लीन्हे सुभग पुस्तकी हाथ ॥ करों बन्दना शिवशंकर की दूनों धरों चरणपर माथ १ देवि दुर्गा को ध्यावों फिरि लैके रामचन्द्र को नाम ॥ कीरति गावों मैं ऊदन कै पूरणकरो हमारो काम २ देवि शारदा मइहरवाली मनियादेव महोबे केर ॥ ध्यावों ललिता नैमिषार की माता मोरि दीनता हेर ३ नहीं बीरता कछु मोमें है तव बल धरी धीरता हीय ॥
२ आल्हाखण्ड । ३६२ कीरति तुम्हरी जो कोउ गावै पावै वहै चहै जो जीय ४ निरभय होवै घर बाहर सों केवल करै तुम्हारी आश ॥ बन्धन छूटैं सब दुनियां के यमकी परै गले नहिं पाश ५ छूटि सुमिरनी गै हाँते अब सुनिये गाँजर केर हवाल ॥ साजिकै फौजै ऊदन चलि हैं लड़ि हैं बड़े बड़े नरपाल ६ अथ कथाप्रसंग ॥ जैचन्द राजा कनउज बाला आला सकलजगत सरनाम ॥ लागि कचहरी त्यहि राजा कै सोहैं सोन सरिस त्यहिधाम १ को गति वरणै त्यहि मन्दिरकै ज्यहिमाँ भरी लाग दर्बार ॥ आस पास माँ राजा सोहैं बीचम कनउज का सरदार २ बनासिंहासन है सोने का हीस पन्ना करै बहार ॥ तामैं बैठे जैचन्द बोले सुनिये सकल शूर सरदार ३ बारह वरसन का अरसा भा पैसा मिला न गाँजर क्यार ॥ कौन शूरमा मोरे दलमाँ नङ्गी काढ़िलेय तलवार ४ करै बन्दगी तलवारी सों औ गाँजर को होय तयार ॥ सुनिकै बातें ये जैचँदकी झुकिगे सकल शूर सरदार ५ झुका डुलरुवानाहिं द्यावलिको औ आल्हाक लहुरवाभाय ॥ सुनिकै बातें ये जैचंद की नैना अग्निवरण ह्वैजायँ ६ सबदिशिताक्यो सबक्षत्रिनको सबहिन लीन्ह्यो मूड़नवाय ॥ उठा डुलरुवा तब द्यावलिको औ आल्हा को शीशनवाय ७ सुमिरि भवानी जगदम्बा को म्यान ते खैंचिलीन तलवार ॥ किह्यो बन्दगी फिर राजा को यहु द्यावलिको राजकुमार ८ हाथ जोरिकै बोलन लाग्यो सुनिये विनय कनौजीराय ॥ लाखनि राना सँगमाँ दीजै लीजै पैसा सकल मँगाय ६
गॉजरकीलड़ाई । ३६३ ३ बिना हकीकी लखराना के पैसा कौन तसीलै जाय ॥ साथ में होवैं लखराना जो तम्बू बैठे लेयें मँगाय १० लड़ै भिड़े को जिम्मा हमरो इन को वार न बाँको जाय ॥ हुकुम जो पावौं महराजा को गाँजर अबै पहुँचों जाय ११ सुनिकै बातें बघऊदन की बोला कनउज को सरदार ॥ सोरह रानिन में इकलौतो मेरो लाखनि राजकुमार १२ सो नहिं जैहै चढ़ि गाँजर को पैसा मिलै चहौ रहिजाय ॥ सुनिकै बातें ये जैचँद की बोला तुरत बनाफरराय १३ क्षत्री राजा यह नहिं सोचैं मानो सत्य बचन महराज ॥ रही न देही रामचन्द्र के रहि ना गये कृष्ण यदुराज १४ यशै इकेलो जग में रहिगो गावैं तीनलोक तिहुँकाल ॥ तासों देवो सँग लाखनि को सोचो कछू नहीं नरपाल १५ सुनिकै बातें ये ऊदन की जैचँद हुकुम दिन फरमाय ॥ हुकुम पायकै महराजा को लाखनि ढिगै पहुँचो जाय १६ कही हकीकति सबजैचँदकी यहु द्यावातिको राजकुमार ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की लाखनि बेगि भयो तय्यार १७ चोबदार को फिर बुलवायो ताको दीनो हुकुम सुनाय ॥ पिटै ढिंढोरा अब कनउज माँ सजिकै फौज आयसबजाय १८ सुनिकै बातें लखराना की दौरत चोबदार चलिजाय ॥ ढोल बजाई गै कनउज माँ सब का खबरि दीन पहुँचाय १६ खबरि पायकै सब क्षत्री दल तुरतै सजन लागि सरदार ॥ हथी महाउत हाथी लैकै तिनका करनलागि तय्यार २० अंगद पंगद मकुना भौंरा हाथी झूमा दीन बिछाय ॥ चुम्बक पत्थर का हौदा धरि जामें सेल बरौंवा खाय २१
रेशम रसन सों कसिकै फिरि साँलों सीढ़ी दीन लगाय ॥ बारह कलशन की अम्बारी तिनपर धरी तुरतही जाय २१ घण्टा बांधे तिन के गर माँ क्षत्री होन लागि असवार ॥ भूरी हथिनी लखराना की सोऊ बेगि भई तय्यार २३ चन्दन सीढ़ी तामें लागी वामें लाखनि भये सवार ॥ हाथी सजिगा जब आल्हा का हाथ म लई ढाल तरवार २४ मनमाँ सुमिरयो जगदम्बा का अम्बा लाज तुम्होरे हाथ ॥ बैठ्यो हाथी पर आल्हा जब नायो रामचन्द्र को माथ २५ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे घोड़न होन लागि असवार ॥ घोड़ बेंदुला की पीढ़ी पर चढ़िगो द्यावलिकेर कुमार २६ घोड़ पपीहा मोहबे वालो तापर जोगा भयो सवार ॥ हंसामनि घोड़ा के ऊपर इन्दल आल्हा केर कुमार २७ घोड़ मनोहर पर देबा है भोगा सबजा पर असवार ॥ या बिधि सेना सब इकटौरी बारहलाख भई तय्यार २८ मारू डङ्का बाजन लागे घूमन लागे लाल निशान ॥ कऊ नालकिन कऊ पालकिन कोऊ चढ़े साँड़िया ज्वान २६ आगे हलका है हाथिन का बलका तिनके नाहिं ठिकान ॥ घण्टा बाजैं गल हाथिन के जहँ सुनिपरै बात नहिं कान ३० चिंघरति हाथी आगे चलि भे पाछे घोड़न चली कतार ॥ सरपट घोड़ा कोउ दउरावै कावा देवै कोऊ सवार ३१ कोउ मन पावै असवारे का तौ असमान पहुँचै जाय ॥ कोउ कोउ घोड़ा हंस चालपर कोउकोउमोरचालपरजाय ३२ खुर खुर खर खर कै रथ दौरैं चह चह रहीं धुरी चिल्लाय ॥ छाय अँधेरिया गै दशहू दिशि आपनपरै न हाथ दिखाय ३३
[Header] गॉजरकीलड़ाई । ३६५ ५
डगमग डगमग धरती हाली थर थर शेष गये थर्राय ॥ देव सकाने बहु डरमाने पर्वत खोह छिपाने जाय ३४ को गति बरणै बघऊदन कै आगे घोड़ नचावत जाय ॥ धीरे धीरे छत्तीस दिन में गोरख पुरै पहुँचे आय ३५ पाँच कोस जब बिरिया रहिगइ डेरा तहाँ दीन डराय ॥ ऊँची टिकुरिन तम्बू गड़िगे नीचे लगीं बाजारें आय ३६ कम्मर छोरयो राजपूतन ने झीलम बखतर डरे उतार ॥ तंग बछेड़न के छोरेंगे हाथिन उतरिपरे असवार ३७ झण्डा गड़िगे तम्बुन ढिग में ते सब आसमान फहरायँ ॥ लागि कचहरी गै लाखनि कै बीच म बैठ बनाफरराय ३८ कलम दवाइत को मँगवायो कागज तुरतै लीन उठाय ॥ लिखी हकीकत सब हिरासिंहको अब तुम खबरदार है जाय ३६ बारह बरसै पूरी हुइगईं पैसा दिह्यो न कनउज जाय ॥ अब चढ़ि आये उदयसिंह हैं साथै लिहे कनउजीराय ४० धरम छत्तिरिन के नाहीं ये धोखे डाँड़ दवावैं आय ॥ लै कै पैसा बारह बरस का ह्याँपै बेगि देउ चुकवाय ४१ नहिं भोर भवरहरे पहके फाटत सबियाँ बिरिया लेउँ लुटाय ॥ बाँधिकै मुशकें मैं हिरासिंह की कनउज तुरत देंव पहुँचाय ४२ लिखि परवाना दै धावन को ऊदन करन लाग बिश्राम ॥ लै परवाना धावन चलिभो हिरासिंह बैठरहै निजधाम ४३ लै परवाना अटि धावन गो जायकै द्वारपाल को दीन ॥ लै परवाना द्वारपाल गो हिरासिंहबाम हाथ लैलीन ४४ खोलि लिफाफा सों कागजको आँकुइ आँकु बांचिसबलीन ॥ उत्तरलिखिकै हिरासिंह राजा तुरतै द्वारपालको दीन ४५
३ आल्हखण्ड । ३६६ उत्तर लैके द्वारपाल ने दीन्ह्यो धावन हाथ गहाय ॥ चलिकै धावन तब बिरिया ते पहुँचो उदयसिंहढिग आय ४६ शीश नवायो त्यहि ऊदन को कागज दिह्यो हाथ में जाय ॥ पढ़िकै कागज को बघऊदन औ लाखनिकोदीनसुनाय ४७ सुनिकै कागज को लखराना नैना अग्निवरण हैजायँ ॥ हुकुम लगायो निज फौजन में तोपन बिरिया देव उड़ाय ४८ हुकुम पायकै लखराना को झिलमैपहिरि सिपाहिनलीन॥ धरिकै कुंडी लोहेवाली पाछे ढाल गैंड़ की कीन ४६ यक यक भाला दुइ दुइ बरछी कम्मर कसी तीन तलवारि ॥ जोड़ी तमंचा औ पिस्तौलैं बांधी छूरी और कटारि ५० धरि बंदूकन को कांधे पर क्षत्री भये बेगि तय्यार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बांके घोड़न भे असवार ५१ रणकी मौहरि बाजन लागी रणके होन लाग व्यवहार ॥ ढाढ़ी करखा बोलन लागे विप्रन कीन वेद उच्चार ५२ हिंया हकीकति ऐसी गुजरी अब बिरिया का सुनौहवाल ॥ तुरत नगड़ची को बुलवायो हिरसिंहबिरियाकोनरपाल ५३ हुकुम पायकै सो ठाकुर को तुरतै अटा भौन में जाय ॥ धर्यो नगाड़ा को सँड़ियापर डंका तुरत बजायो धाय ५४ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे बांधि लीन हथियार ॥ तिसर नगाड़ा के बाजत खन क्षत्री भये सबै तय्यार ५५ हिरसिंह विरसिंह दूनों भाई हाथिन ऊपर भये सवार ॥ तोपें सजिकै आगे चलि भइँ पाछे हाथिन केर कतार ५६ चला रिसाला घोड़नवाला पाछे ऊँटन के असवार ॥ चले सिपाही त्यहिके पाछे खच्चर चलिभे डेढ़ हजार ५७
गाँजरकीलड़ाई। ३६७ ७ कूच के डङ्का बाजन लाग्यो घूमनलाग्यो लालनिशान ॥ दाढ़ी करखा बोलन लागे बन्दी कीन समरपद गान ५८ मारु मारु करि मौहरि बाजीं बाजीं हाव हाव करनाल ॥ हिरासिंह बिरसिंह दोऊभाई पहुंचे समरभूमि ततकाल ५६ पहिले मारुइ भइँ तोपन की गोलंदाज भये हुशियार ॥ बम्ब के गोला छूटन लागे सीताराम लगैंहैं पार ६० जौने हाथी के गोला लागै मानो चोर सेंधि कैजाय ॥ जौने ऊंट के गोला लागै सारेक कूला जुदा हइजाय ६१ जौने बछेड़ा के गोला लागै मानों मगर कुल्याँचै खाय ॥ गोला लागै ज्यहि क्षत्री के साथै उड़ा चील्ह असजाय ६२ जौने रथमाँ गोला लागै ताके टूक टूक हैजाँय ॥ जौने बैलके गोला लागै मानों गिरह कबूतर खायँ ६३ जौने अँगमॉ गोला लागै तरुवर पात अइस गिरिजाय ॥ चुकीं बरुदैं जब तोपन की तब फिरि मारु बन्दहैंजाय ६४ उठीं बँदूकें बादलपुर की जो नब्बे की एक बिकाय ॥ मघाकी बूंदेन गोली बरषैं क्षत्रिन दीन्हों झरी लगाय ६५ सन् सन् सन् सन् गोली छूटैं क्षत्रिन लगैं करेजे जाय ॥ पार निकरिकै सो छातिन के देहीम करें अनेकन घाय ६६ गिरैं कगारा जस नदिया माँ तैसे गिरैं ऊँट गज धाय ॥ गिरै मुहभरा कितनेउँ क्षत्री कितनेउँ भाँगैं पीठिदिखाय ६७ दूनों दल आगे को बढ़िगे परिगो समर बरोबरि आय ॥ को गति बरणै त्यहि समया कै हमरे बूत कही ना जाय ६८ सूंड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुश भिड़े महौतन केरि ॥ हौदा हौदा यकमिल हइगे मारैं एक एक को हेरि ६६
८ आल्हखंड। ३६८ पहिया रथके रथमाँ भिड़िगे घोड़न भिड़ी रान में रान॥ भाला छूटे असवारन के मारैं एक एक को ज्वान ७० ऊँट चढ़ैया ऊँटन भिड़िगे पैदर चलन लागि तलवारि॥ भुजा औ छाती में हनि मारैं कउशिर काटिदेइँ भुइँडारि ७१ बड़ी लड़ाई भै क्षत्रिन कै नदिया बही रक्त की धार॥ लड़ि लड़ि हाथी तामें गिरिगे छोटे दीपन के अनुहार ७२ छुरी कटारी मछली जानो ढालैं कछुवा मनो अपार॥ कटि कटि बार बहैं शूरन के जस नदियामाँ बहै सिवार ७३ भुजा छत्तिरिन के ग्वाहैं जस ऊँटन बँधिगे नदी कगार॥ बिना पैरके बहैं बछेड़ा मानों घूमें मगर अपार ७४ बिना मूड़ के क्षत्री बहि बहि छोटीडोंगिया सम उतरायँ॥ गिद्ध काग सब तिन पर सो हैं मानों जल बिहारको जायँ ७५ नचैं योगिनी खप्पर भरि भरि मज्जैं भूत प्रेत बैताल॥ कुत्तन गरमा आँतनमाला स्यारनसबनकीन मुहँलाल७६ त्यही समइया त्यहिअवसर माँ यहु द्यावलिको राजकुमार॥ गरुई हाँकन सों ललकारै मारै भुजा ताकि तलवार ७७ द्यावा बोलै तब ऊदन ते ऊदन सुनिल्यो कानलगाय॥ भागे क्षत्रिन का मार्यो ना नहिं सब क्षत्रीधर्म नशाय ७८ हाथ सिपाहिन पर डार्यो ना जब लग ढूँढ़ि मिलै सरदार॥ कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि आपौ खैंचिलीन तलवार७६ देवा ऊदन के मारुन मा क्षत्री होन लागि खरिहान॥ हिरसिंह विरसिंह दोऊ कोपे तिनहुनकीनघोरघमसान ८० बड़ी लड़ाई भै विरिया माँ हमरे बूतऋही ना जाय॥ जितने कायर रहें फौजन माँ तर लोथिनके रहे लुकाय ८१
हाला आवैं जब हाथिन के तब बिन मरे मौत है जाय॥ कोउ कोउ रोवैं महतारिन का. कोउ२दुलहिनिकालुलुआयँ ८२ कायर बिनवैं यह सुर्य्यन सों बाबा आजु अस्त हइजाउ॥ राति अँधेरिया जो कै पाउँ भागिकैतीसकोसघरजाउँ ८३ माठा रोटी घरमाँ खावैं आपनि भैंसि चरावन जायँ॥ ऐसि नौकरी हम करिहैं ना करडा बेंच शहरमाखायँ ८४ त्यही समय्या त्यहि अवसर माँ हिरसिंह बोल्यो भुजाउठाय॥ बनते कन्या धरि आईती त्यहिके अहिउ बनाफरराय ८५ अहिउ टुकरहा परिमालिक के औ चंदेले केर गुलाम॥ जाति गुलामन की हीनी है तुम्हरो नहीं लड़ैको काम ८६ यह कहिभाला नागदवनिको दूनो अँगुरिन लीनउठाय॥ दूनो अँगुरिन भाला तौले काली नाग ऐस मन्नाय ८७ तारा टूटै आसमान ते औ हिरगास भुई ना जायँ॥ छूटिग भाला जो हाथे ते कम्मर मचा ठनाका आय ८८ तेरते कटिगा यह मछरीबँद ऊपर कटिगा कुत्ताकबार॥ बचा दुलरुआ द्यावलि वाला ज्यहिका राखिलीन कर्त्तार ८९ औ ललकारा फिरि हिरसिंहको ठाकुर खबरदार हैजाउ॥ दूधु लरिकई मा पायो ना तुम्हरे मरे चढ़ै ना घाउ ६० वार हमारी सों बचिजायो घरमाँ छठी धरायो जाय॥ गर्दन ठोंक्यौ फिरि बेंदुल के हौदा उपर पहूंचो धाय ६१ ढालकी औफरिसों हनिमारा हिरसिंह गिरयो मूर्च्छाखाय॥ तब फिरि विरसिंह ने ललकारा ऊदन खबरदार है जाय ६२ भाला बरछिन को बहुमारा ऊदन लीन्ह्यो वार बचाय॥ वाकिकै मारा फिर विरसिंह को सोऊ गिरा मूर्च्छा खाय ६३
१० आल्हाखण्ड । ४०० बाँधिकै मुंशकै फिरि दोउनकी कनउज तुरत दीन पहुँचाया ॥ किला जीतिकैफिरि विरियाको आगे चला बनाफरराय ६४ चारिकोस जब पट्टी रहिगै ऊदन डेरा दीन गड़ाय ॥ सात निराजा पट्टी वालो ताको डाँड़ दवायो जाय ६५ तब हरिकारा पट्टी वाला सातनि खबरि सुनावाआय ॥ गाफिल बैठे तुम महाराजा डांड़े फौज परी अधिकाय ६६ इतना सुनिकै सातनि राजा गुसी धावन दीन पठाय ॥ हाल पायकै सो फौजन का राजै फेरि सुनावा आय ६७ सुनी हकीकति जब सातनिने डंका तुरतदीन बजवाय ॥ सजे सिपाही पट्टी वाले मनमें श्रीगणेशको ध्याय ६८ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बांके घोड़न भे असवार ॥ झीलमबखतरपहिरि सिपाहिन हाथम लई ढाल तलवार ६६ चढ़िगा हाथीपर महाराजा करिकै रामचन्द्र को ध्यान ॥ कूच कराय दयो पट्टी सों घूमतआवैं लाल निशान १०० घरी अढ़ाई के अरसा माँ सम्मुख गयो फौजके आय ॥ आवत दीख्यो जब फौजनको तुरतै उठा बनाफरराय १०१ भुजा उठाये ऊदन बोल्यो गरई हाँक देत ललकार ॥ सँभरो सँभरो ओ रजपूतो अपने बांधि लेउ हथियार १०२ इतना सुनिकै सब राजपूतन अपनी लई ढाल तलवार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार १०३ सजा बेंदुला का चढ़वैया लाला देशराज का लाल ॥ मारु मारु करि मौहरिबाजीं बाजीं हाउ हाउ करनाल १०४ बजे नगारा औ तुरही फिरि ढोलन शब्दकीन विकराल ॥ शूर सिपाही दुहुँ तरफा के लागेयुद्धकरनत्यहिकाल १०५
गाँजरकीलड़ाई। ४०१ ११ पैदल पैदल के बरणी मे औ असवार साथ असवार ॥ सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे अंकुशभिड़े महौतनक्यार १०६ इतसों आगे पट्टी वाला उतसों उदयसिंह सरदार ॥ गज के हौदापर महराजा ऊदन बेंदुल पर असवार १०७ गर्दन ठोंकी जब बेंदुल की हौदा उपर पहुंचा जाय ॥ कलँगी पगड़ी महराजा की ऊदन दीन्ह्यो भूमिगिराय १०८ औ ललकारा महराजा को पैसा आजदेउ मँगवाय ॥ मारि सिरोहिन ते हनिडरिहौं नेका टकालेउँ निकराय १०६ धोखे जयचँद के भूलेना हमरो नाम बनाफरराय ॥ 'उदयसिंह दुनिया मा जाहिर सातनिसाँच दीनबतलाय ११० बारह बरसन की बाकी जो सो तू आज देय समुझाय ॥ नहीं तो बचिहै ना संगरमा जो विधि आपुनचावैआय १११ इतना सुनिकै सातनिराजा हौदा उपर ठाढ़ ह्वैजाय ॥ औ ललकारा बघऊदन का क्षत्री काह गये बौराय ११२ बतियाँ आहिन ना कुम्हड़ा की तर्जनि देखिजायँ कुम्हिलाय ॥ एक बनाफरकै गिन्ती ना लाखन चढ़ें बनाफरआय ११३ जबलग हडिन मा जी रैहै जबलग रही हाथ तलवार ॥ कौड़ी पैसन की बातैं ना देउँ न एक देहैं का बार ११४ जीना चाहै जो दुनियामा तौफिरि लौटिजाय सरदार ॥ नहिं शिरकटिहौं मैं संगर में ऊदन देखु मोरि तलवार ११५ इतना कहिकै सातनिराजा अपने शूरन कहा सुनाय ॥ जाय न पावैं कनउजवाले इनके देवो मूड़ गिराय ११६ सुनिकै बातैं महराजाकी क्षत्रिन कीन घोरघमसान ॥ भाला बलछी तलवारिन सों मारन लागि खूबतहूँज्वान ११७
१२ आल्हाखण्ड । ४०२ बहे पनारा नरदेहिन सों नदिया बही रक्त की धार ॥ लंबी धोतिन के पहिरैया क्षत्री जूझे तीनि हजार ११८ साल दुसाला मोहनमाला आला परे गले में हार ॥ ऐसे सुन्दर राजपूतन को नोचनलागे श्वानसियार ११९ गीधन केरी खूब बनिआई चील्हन भीर भई अधिकाय ॥ लगीं बजारैं तहँ कौवनकी कालीभूमि परै दिखलाय १२० लगी अथाई तहँ भूतन की प्रेतन कथा कही ना जाय ॥ यहु अलबेला आल्हा वाला गर्जा समर भूमिमाआय १२१ इन्दल ठाकुर के सम्मुख मा कोऊ शूर नहीं समुहाय ॥ चढ़ि पचशब्दा हाथी ऊपर आल्हागये समरमें आय १२२ यहु महराजा पट्टी वाला मारत फिरै शूर समुदाय ॥ आल्हा ठाकुर औ सातनि का परिगासमर बरोबरिआय १२३ सातनि बोला तब आल्हाते मानो कही बनाफरराय ॥ दीन न पैसा हम जयचंद को कैयो बार लड़ेते आय १२४ टका न पैहौ आल्हा ठाकुर याते कूच देउ करवाय ॥ इतना सुनिकै आल्हा बोले सातनि काहगयो बौराय १२५ बहुती बातें हम जानैं ना पैसा आज देउ मँगवाय ॥ नहिं दिखलावै अब संगर में जोकछुकीन बूततबजाय १२६ सुनिकै बातें ये आल्हा की सातनि खैंचि लीन तलवार ॥ हनिकै मारा सो आल्हा के आल्हालीन ढालपरवार १२७ भालामारा फिरि आल्हा के सोऊ लीन्ही वार बचाय ॥ गदा करावा सातनि राजा सो शिरपरी महाउतआय १२८ गिरा महाउत जब आल्हा का इन्दल दीन्ह्यो घोड़ उड़ाय ॥ पहुंचा घोड़ा जब हौदापर इन्दलमार्यो ढालघुमाय १२६