भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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लाखनिका विवाह । ३८७ २१ म्वती जवाहर दोउ पुत्रन को राजा तुरत लीन बुलवाय ॥ लिखी हकीकति जो गंगाधर तिनको तुरतदीन बतलाय ४३ गंगा कैलेउ तुम तम्बुन माँ तुम्हरी कैद देइँ छुड़वाय ॥ सुनिकै बातें ये जयचंदकी दोऊ गंगा लीन उठाय ४४ तब छुड़वायो जयचंद राजा पहुँचे धाम आपने जाय ॥ सम्मत कीन्ह्यो फिरि गंगाधर मड़ये मूड़ लेब कटवाय ४५ अकसर लड़काको लै आवो जावो पूत जवाहरलाल ॥ सुनिकै तुरतै सो गमनत भा आयो जहाँ बैठ नरपाल ४६ कहि समुझायो सब राजा को दोऊ चरणन शीश नवाय ॥ अकसर लड़का को पठवावो सबियाँ शंका देउ भुलाय ४७ इतना सुनिकै मलखे बोले राजन हुकुम देउ फरमाय ॥ पांच सात मिलि हमअब जैबे भौंरी तुरत देब करवाय ४८ सुनिकै बातें मलखाने की आयसु दीन कनौजीराय ॥ बैठि पालकी में लखराना देबी फूलमती को ध्याय ४६ आल्हा ऊदन मलखे ब्रह्मा देवा बनरस का सरदार ॥ गंगा मामा लखराना का सोऊ बांधि लीन हथियार ५० सवैया ॥ ते सरदार सबै चलिकै फिरि भीतर भौन के जाय सिधाये । सुन्दर आसन डारितहाँ नृप आदर भाव किये अधिकाये ॥ पण्डित आयकै बैठि गयो गठिबन्धन हेतु सुता बुलवाये । सातसुहागिल आय तहाँ ललिते मन मोदन गीत सुनाये ५१ पहिली भाँवरिके परतै खन क्षत्री आये आध हजार ॥ आल्हा ऊदन मलखे ब्रह्मा इनहुन खैंचि लीन तलवार ५२