भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 399, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 399

८ आल्हखंड। ३६८ पहिया रथके रथमाँ भिड़िगे घोड़न भिड़ी रान में रान॥ भाला छूटे असवारन के मारैं एक एक को ज्वान ७० ऊँट चढ़ैया ऊँटन भिड़िगे पैदर चलन लागि तलवारि॥ भुजा औ छाती में हनि मारैं कउशिर काटिदेइँ भुइँडारि ७१ बड़ी लड़ाई भै क्षत्रिन कै नदिया बही रक्त की धार॥ लड़ि लड़ि हाथी तामें गिरिगे छोटे दीपन के अनुहार ७२ छुरी कटारी मछली जानो ढालैं कछुवा मनो अपार॥ कटि कटि बार बहैं शूरन के जस नदियामाँ बहै सिवार ७३ भुजा छत्तिरिन के ग्वाहैं जस ऊँटन बँधिगे नदी कगार॥ बिना पैरके बहैं बछेड़ा मानों घूमें मगर अपार ७४ बिना मूड़ के क्षत्री बहि बहि छोटीडोंगिया सम उतरायँ॥ गिद्ध काग सब तिन पर सो हैं मानों जल बिहारको जायँ ७५ नचैं योगिनी खप्पर भरि भरि मज्जैं भूत प्रेत बैताल॥ कुत्तन गरमा आँतनमाला स्यारनसबनकीन मुहँलाल७६ त्यही समइया त्यहिअवसर माँ यहु द्यावलिको राजकुमार॥ गरुई हाँकन सों ललकारै मारै भुजा ताकि तलवार ७७ द्यावा बोलै तब ऊदन ते ऊदन सुनिल्यो कानलगाय॥ भागे क्षत्रिन का मार्यो ना नहिं सब क्षत्रीधर्म नशाय ७८ हाथ सिपाहिन पर डार्यो ना जब लग ढूँढ़ि मिलै सरदार॥ कउँधालपकनिबिजुलीचमकनि आपौ खैंचिलीन तलवार७६ देवा ऊदन के मारुन मा क्षत्री होन लागि खरिहान॥ हिरसिंह विरसिंह दोऊ कोपे तिनहुनकीनघोरघमसान ८० बड़ी लड़ाई भै विरिया माँ हमरे बूतऋही ना जाय॥ जितने कायर रहें फौजन माँ तर लोथिनके रहे लुकाय ८१

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य) · पृष्ठ 399, कुल 618 में से · BharatKosha