आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंगौंजरकीलड़ाई । ४०५ १५ माल खजाना सब लुटवायो डंका फेरि दीन बजवाय ॥ जीति कामरू कामक्षा को तहँते कूच दीन करवाय १५२ जायकै पहुँचे बंगाले में झंडा तहाँ दीन गड़वाय ॥ बजे नगारा तहँ आल्हा के नभऔअवनिशब्दगाछाय१५३ गा हरिकारा तब जल्दी सों राजै खबरि सुनावा जाय ॥ भारी फौजै क्यहु राजा की डाँड़े परीं हमारे आय १५४ सुनिकै बातें हरिकारा की राजा गयो सनाकाखाय ॥ देखन पठवा क्यहु अफसर को त्यहिसबखबरिसुनावाआय १५५ गुरुखा राजा बंगाले का मन्त्रिन बोला बचन सुनाय ॥ तुरत नगाड़ा को बजवावो सबियाँफौजलेउसजवाय १५६ हुकुम पायके महराजा का सबियाँ फौज भई तैयार ॥ पहिल नगाड़ा मा जिनबंदी दुसरे फाँदिभये असवार १५७ हथी अगिनियाँ महराजा को सोऊ बेगि भयो तय्यार ॥ सुमिरि भवानी जगदम्बा का राजा तुरत भयो असवार १५८ ढाढ़ी करखा बोलन लागे बिप्रन कीन बेद उच्चार ॥ रणकी मौहरि बाजन लागीं रणकाहोनलागब्यवहार १५६ पांच घरी के फिरि अर्सा मां राजा गयो समर में आय ॥ घोड़ बेंदुला को चढ़वैया यहु रणबाधु बनाफरराय १६० सम्मुख आवो महराजा के औ यह बोला भुजा उठाय ॥ बारह बरसन की बाकी अब राजन आप देउ मँगवाय१६१ लाखनि आये हैं कनउज ते आल्हा ऊदन साथ लिवाय ॥ छोटे भाई हम आल्हा के ऊदन नाम हमारो आय १६२ इतना सुनिकै गुरुखा राजा बोला महाक्रोध को पाय ॥ टरिजा टरिजा रे सम्मुख ते नहिंशिरदेवों भूमिगिराय १६३