भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 409

१८ आल्हखण्ड। ४० = चिन्ता ठाकुर रुसनी वाला ताको जीति लीन फिरिजाय ॥ बजे नगारा हहकाराके तहँ ते चला बनाफरराय १८३ आयकै पहुँचा फिरि गोरखपुर सबियाँ शहर लीन घिरवाय ॥ सूरजठाकुर गोरखपुर का ऊदन लीन तहाँ बँधवाय १८४ तहँते चलिकै पटना आवा यहु रणबाघु बनाफरराय ॥ पूरन राजा पटना वाला ताको कैदलीन करवाय १८५ चला बनाफर फिरि तहँना ते काशीपुरी पहुँचा आय ॥ धन्य बखानैं हम काशी का मनमेंशिवाचरणकोध्याय१८६ अज अबिनाशी घट घट बासी पूरण ब्रह्म शम्भु करतार ॥ परम पियारी निज काशी के आजौ सत्य सत्य रखवार १८७ रहे भास्करानंद स्वामी हैं सबके माननीय शिरताज ॥ अब लग काशी हम देखी ना ना कछुपरा क्यहूने काज १८८ वर्ष अठारा कीन नौकरी बाबू प्रागनारायण धाम ॥ छपीं पुस्तकैं ह्याँ जितनी हैं ते सब पढ़ा पेटके काम १८६ सुनी बड़ाई भल काशी की दासी सरिस मुक्ति तहँ भाय ॥ तौनी काशी अविनाशी मा ऊदन तम्बू दीन गड़ाय १६० हंसामनि काशी का राजा ऊदन कैद लीन करवाय ॥ मारू डंका फिरि बजवाये कनउज चला बनाफरराय १६१ तीनि महीना औ तेरा दिन गाँजर खूब कीन तलवार ॥ बारह राजन को कैदी करि पठवा जयचंद के दरबार १६२ बोला मारग में लाखनि ते बेटा देशराज को लाल ॥ हम पर साँकर जहँ कहुँ परि है लाला रतीभानके लाल १६३ बदला देहौ की मुरिजैहौ लाखनि साँच देउ बतलाय ॥ सुनिकै बातें बघऊदन की लाखनिगंगशपथगाखाय १६४