भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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सिरसाकासमर। ४१६ द्वारे ठाढ़े मलखाने थे चिट्ठी तुरत दीन पकराय ८४ चढ़ा पिथौराहै सँभराभरि औ यह कहा बनाफरराय ॥ किला गिरावैं जो सिरसा का तौ सब रारि शान्तहैजाय ८५ नहीं तो बचिहैं न संगरमा जो बिधि आपु बचावैं आय ॥ लौटि पिथौरा अब जैहै ना सिरसा ताल देय करवाय ८६ मृत्यु आयगै मलखाने कै जो नहिं किला देयँ गिरवाय॥ लौटि पिथौरा अब जैहै ना नेका टका लेय निकराय ८७ चौंड़ा बकशी पृथीराज का सोऊ कहा सँदेशा आय ॥ बने जानना मलखाने अब घरमा बैठि रहैं शर्माय ८८ कौने राजा की गिनती मा जो नहिं किला देयँ गिरवाय॥ कह्यो सँदेशा यह ताहर है सो सुनिलेउ बनाफरराय ८९ मलखे चाकर परिमालिक का सो कस रारि मचावै आय ॥ दीन बड़ाई हम चाकरको पहिले फौज लीन हटवाय ९० जियति न जाई अब संगर ते जो बिधि आपु बचाई आय ॥ कह्यो सँदेशा सब लोगन को धावन बार बार समुझाय ९१ सुनिकै बातैं ये धावन की क्रोधित भयो बनाफरराय ॥ हुकुम लगायो फिरि सिरसामें बांजन सबै रहे हहराय ९२ बोले मलखे फिरि धावन ते यह तुम कह्यो पिथौरै जाय ॥ मारे मारे मुख धावन के धावन द्याव तहाँ समुझाय ९३ यहै बतायो तुम पिरथी ते आवत समरधनी मलखान ॥ कसरि न राखैं चौंड़ा ताहर संगर करैं दूनहू ज्वान ९४ कीन जनाना हम दोउन का उनके साथ कौन मैदान ॥ हमरो संगर पृथीराज को जावैं सँभरि आज चौहान ९५ इतना सुनिकै धावन चलि कै राजै खबरि बतावा आय ॥