भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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सिरसाकासमर । ४२१ ११ पाग बैजनी शिरपर बाँधे हाथ म लये ढाल तलवार १०६ फिरिफिरि ध्यावै शिवशंकरको गावै सुन्दर भजन बनाय ॥ चील्ह औ गीध उड़ैं खपरिनपर कुत्ता स्यार रहे चिल्लाय १०७ मरण काल के जो अशकुन हैं मलखे दीख तहाँपर आय ॥ पै भयलायो मन अन्तर ना यहु निशंक बनाफरराय १०८ इकडिशि तोपनको छुटवावा इकडिशि धावा दीन कराय ॥ जैसे भेड़िन भिड़हा पहुँचै जैसे अहिर बिडारै गाय १०६ तैसे मारै रजपूतन को यहु रणबाधु बनाफरराय ॥ ताहर चौड़ा औ चन्दन का मोर्चा मलखे दीन हटाय ११० जौनै हौदा मलखे ताकैं घोड़ी तहाँ देय पहुँचाय ॥ जाय महावत का हनिडारैं औ असवारै देयं गिराय १११ दहिने बाँये टापन मारै सम्मुख दाँतन लेय चबाय ॥ मलखे ठाकुर के मारुनमा बहुदल परा तहाँभहराय ११२ जहँना हाथी पृथीराज का मलखे तहाँ पहुंचे आय ॥ पतरी लकड़िन खन्दक पाटे ताके पार पिथौराराय ११३ खाली खन्दक एक बीच में ताको दीख बनाफरराय ॥ गर्दन ठोंकी तहँ घोड़ी की दूनों ऐँड़ा दीन लगाय ११४ चूकि कबुतरी धरती जाना खन्दक परी तड़ाकाजाय ॥ मलखे घोड़ी दोउ खन्दकमा भालन उपर गिरे भहराय ११५ बलछी भालनकी नोकन सों घायल भये बनाफरराय ॥ बड़ा सोचभा तहँ घोड़ी का रोवैं बारबार पछिताय ११६ घोड़ी तड़पी फिरि खन्दकते मलखे सहित पारगै आय ॥ पदुम फाटिगा तहँ तरवा का औ मरिगये बनाफरराय ११७ गा हरिकारा तब सिरसामा बिरमै खबरि बतावा जाय ॥