भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 451, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 451

३६ आल्हखण्ड । ४५० आगे हलका भा हाथिन का पाछे चले घोड़ असवार ७६ अभई ठाकुर ह्वाँ ताहर का होवै खूब भड़ाभड़ मार ॥ दूनों मारैं तलवारी सों दूनों लेयँ ढालपर वार ७७ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ७८ को गति बरणै त्यहि समया कै आमाझोर चलै तलवार ॥ बार चूकिगा माहिलवाला झूझा उरई का सरदार ७९ रञ्जित अभई दुउ ठकुरन के उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥ सुरपुर पहुँचे दोऊ ठाकुर ब्रह्मा आयगयो त्यहिबार ८० लाश पाय कै दुउ बीरन कै मोहबे तुरत दीन पठवाय ॥ सुमिरिगजानन शिवशङ्करको मारन लाग फौज मा जाय ८१ ब्रह्मा मारै तलवारी सों घोड़ा टापन देय गिराय ॥ ब्रह्मा ठाकुर के मुर्च्चामा सईनिगयो तड़ाका आय ८२ हँसिकै बोला सो ब्रह्माते ठाकुर साँच देयँ बतलाय ॥ डोला दैकै चन्द्रावलि का पवनी करो आपनी जाय ८३ सुनिकै बातें ये सईनि की बोला मोहबे का सरदार ॥ नाम न लीन्हे अब डोलाका नहिं मुखघाँसिदेउँ तलवार ८४ सुनिकै बातें ये ब्रह्माकी सईनि मारा गुर्ज उठाय ॥ वार रोकि कै ब्रह्माठाकुर तुरतै दीन्ह्यो मूड़ गिराय ८५ मईनि आवा तब सम्मुखमा सोऊ वार चलावा आय ॥ खाली वार परी मईनि कै ब्रह्मा दीन्ह्यो मूड़ गिराय ८६ मईनि सईनि दोऊ झूझे माहिल अटे तड़ाका धाय् ॥ हाल बतावा पृथीराज का माहिल बारबार समुझाय ८७ इकले ब्रह्मा हैं मोहवेमा तिनका आप लेउ बँधवाय ॥