भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 475, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 475

१२ आल्हखण्ड । ४७४ तेहिते आज्ञा हम को देवो ओ महराज कनौजीराय ॥ इतना सुनिकै जयचंद जरिगे बोले सुनो बनाफरराय ११७ रय्यति लूटी तुम गाँजर की मोहवे द्रव्य दीन पहुँचाय ॥ दै समझौता सब गाँजर का पाछे जाउ बनाफरराय ११८ घोड़ा लूटे तुम बूँदी के सो-सब कहाँ दीन पठवाय ॥ गेहूँ खाये तुम गाँजर के ताते गई म्टाई आय ११९ इतना कहिकै जयचंद राजा पहरा चौकी दीन कराय ॥ कैद जानिकै आल्हा ठाकुर रूपनबारी लीन बुलाय १२० खबरि सुनावो तुम ऊदन का आल्हा परे कैदमा जाय ॥ दै समझौता तुम गाँजर का भाई अपन छुटाओ आय १२१ इतना सुनिकै रूपन चलि भा रिजिगिरि अटा तड़ाकाधाय ॥ खबरि सुनाई बघऊदन का सुनतै जरा लहुरवाभाय १२२ द्यावलि बोली जगनायक ते तुमहूं चलेजाउ यहि बार ॥ कपड़ा मैले सब हमरे हैं कैसे जायें राजदरवार १२३ इतना सुनिकै ऊदन ठाकुर तुरतै इन्दल लीन बुलाय ॥ कपड़ा दीन्ह्यो जगनायक को तुरतै बेंदुल लीन सजाय १२४ उड़न बछेड़ा हरनागर पर जगना तुरत भयो असवार ॥ घोड़ बेंदुला के ऊपर मा ठाकुर उदयसिंह सरदार १२५ जयचंद राजा की ड्योढ़ी मा दोऊ अटे तड़ाका आय !! मस्ता हाथी जयचंद राजा फाटक ऊपर दीन ढिलवाय १२६ मारिकै भाला जगनायक ने हाथी दीन्ह्यो तुरत भगाय ॥ जहाँ कचहरी महराजा की दोऊ अटे तड़ाकाधाय १२७ सात तवा तहँ ईसपात के जयचंद राजा दीन धराय ॥ भाला गाड़ै ई लोहे पर औ बलमोहिंदेय दिखलाय १२८

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य) · पृष्ठ 475, कुल 618 में से · BharatKosha