आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंआल्हाकामनावत । ४८५ ५३ लाखनि राना इत हाथी पर वैसी परहुल का सरदार ॥ भाला छूटे असवारन के पैदलचलनलागितलवार २४७ झुके सिपाही दुहुँ तरफा के लागे करन भड़ाभड़ मार ॥ मूंड़न केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डनके लगे पहार २४८ बड़ी लड़ाई मै परहुल में लाखनि राना के मैदान ॥ लड़ैं सिपाही दुहुँ तरफा के कटि २ गिरैंसुघरूवाज्वान२४९ उठि उठि ठाकुर लरैं खेत में कहुँ कहुँ रुण्ड करैं तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार २५० जैसे भेड़िन भेड़हा पैठे जैसे अहिर विडारै गाय ॥ तैसे मारै ऊदन ठाकुर सिंहाफौजगई बिललाय २५१ भागीं फौजै जब परहुल की लाखनि हाथी दीन बढ़ाय ॥ लाखनिराना के मुर्चा मा सिंहा आपु पहुँचा आय २५२ सूँड़ि लपेटा हाथी भिड़िगे दोऊ लड़न लागि सरदार ॥ सिंहा मार्यो तलवारी को लाखनिलीन ढालपरवार २५३ भाला मार्यो लखराना ने नीचे गिरा महाउत आय ॥ बलछी मारा सिंहा ठाकुर लाखनि लैगे वार बचाय २५४ खाली वार परी सिंहा की लाखनि तुरत लीन बँधवाय ॥ जायकै पहुँचे फिरि परहुल मा तुरतै दिया दीन गिरवाय २५५ लैके फौजैं सिंहा ठाकुर संगै कूच दीन करवाय ॥ कोस अढ़ाई कुड़हरि रहिगा डेरा तहाँ दीन डखाय २५६ भैने बोल्यो परिमालिक का मानो कही बनाफरराय ॥ गंगा ठाकुर कुड़हरि वाला कोड़ा घोड़ा लीन चुराय २५७ सवा लाख का सो कोड़ा है जो बनवा राजापरिमाल ॥ महामुशकिलिन घोड़ा दीन्ह्यो कोड़ानहींदीनत्यहिकाल २५८