भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

पृष्ठ 497, कुल 618 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 497

४ आल्हाखण्ड । ४६६ लाखनिराना मीरा सय्यद धतुवाँ सहित उतरिगे पार ॥ नौसै हाथी लखराना का सातसै हथी पिथौरा क्यार २२ सोलासै के हाथी दलमा पहुँचे तुरत कनौजीराय ॥ जितने हाथी दूनों दल के सोसब तुरतलीन खिदवाय २३ गा हरिकारा पृथीराज का चौंड़ै खबरि जनाई जाय ॥ हमरी अपनी सब हथिनिनको लाखनिराना लीनखिदाय २४ सुनिकै बातैं हरिकारा की चौंडा फौज लीन सजवाय ॥ धाँधूठाकुर को सँग लैके तुरतैं कूचदीन करवाय २५ बीस खेत जब लाखनि रहिगे चौंड़ा बोला वचन सुनाय ॥ कहाँते आयो औ कहँ जैहौ आपन हाल देउ बतलाय २६ इकलो हाथी लखि चौंड़ाको लाखनि भूरी दीन बढ़ाय ॥ सम्मुख आये जब चौंड़ा के बोले तबै कनौजीराय २७ बेन चकवै के नाती हम बेटा रतीभान को जान ॥ मोहबा देखन हम जाइत हैं लाखनि नाम हमारो मान २८ आल्हा ऊदन के सँग आयन चौंड़ा साँच दीन बतलाय ॥ इतना सुनतै चौंड़ा बोला मानो कही चँदेलेराय २६ आल्हा चाकर परिमालिक के सो कनउजको गये रिसाय ॥ कीनि चाकरी उन जयचँदकी तिनके साथ कनौजीराय ३० ऐसी कहिये नहिं काहू सों अबहीं कूच देउ करवाय ॥ संगति राजा अरु चाकर की कतहूँ न सुनाकनौजीराय ३१ इतना सुनिकै लाखनि बोले मानो कही चौंड़ियाराय ॥ बड़ी बड़ाई ऊदन कीन्ही तब मनगई लालसा आय ३२ बिना मोहोबा आँखिन दीखे कैसे कूच देयं करवाय ॥ इतना सुनिकै चौंड़ा बोला मानो साँच कनौजीराय ३३