आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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नदीबेतवाकासमर। ५१५ २३ स्वारथ साथी सब दुनिया है कासों करों जगतमें साथ २४५ सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को ह्याँते करों तरँग को अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानीकन्त २४६ इति श्रीलखनऊनिवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायण जीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलांनिवासि मिश्र वंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृतनदीबे- तवायुद्धवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः॥ १ ॥ नदीबेतवाकायुद्धसमाप्त ॥ इति ॥