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आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

नदीबेतवाकासमर। ५१५ २३ स्वारथ साथी सब दुनिया है कासों करों जगतमें साथ २४५ सुमिरि भवानी शिवशङ्कर को ह्याँते करों तरँग को अन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही भवानीकन्त २४६ इति श्रीलखनऊनिवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबाबू प्रयागनारायण जीकीआज्ञानुसार उन्नामप्रदेशान्तर्गत पँड़रीकलांनिवासि मिश्र वंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पण्डितललिताप्रसादकृतनदीबे- तवायुद्धवर्णनोनामप्रथमस्तरंगः॥ १ ॥ नदीबेतवाकायुद्धसमाप्त ॥ इति ॥

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॥श्री गणेशाय नमः॥ अथ आल्हखण्ड ॥ ठाकुरउदयसिंहजीकाहरणवर्णन ॥ सवैया ॥ बज्रसे अंग ओ बानर हय अरु बीरन में बलवान महा । रणमण्डल कोउ न जाय सकै ज्यहि ठौर जबै यहु बीर रहा ॥ सप्त समुन्दर नाँघि अगाध दशकन्धर को पुर जाय दहा । आयहु फेरि जबै लखिते रघुनाथ ते साँच हवाल कहा १ सुमिरन ॥ तुम्हैं बहादुर मैं ध्यावत हौं अञ्जनि पूत वीर हनुमान ॥ तुम्हीं गोसइयाँ दीनबन्धु हौ नितप्रतिकरौं चरणकोध्यान १ सरबरि तुम्हरी का दुनिया मा दूसर कौन बहादुर ज्वान ॥ शरण तुम्हारी मा आयन है साँचे वीर बली हनुमान २ गदा प्रहारी हे असुरारी मारी दुष्ट लङ्किनी नारि ॥ पर्शंत पाँयन मकरी तरिगै लायो पर्वत श्रृंग उखारि ३ बड़े पियारे रघुनन्दन के वन्दन करौं जोरि दोउ हाथ ॥ अक्षत चन्दन धूप दीप सों पूजन करौं मानसी नाथ ४

२ आल्हखण्ड । ५१८ करो मनोरथ पूरण हमरे सबविधि माननीय हनुमान ॥ छूटि सुमिरनी गै हनुमत कै ऊदन हरण सुनो अब ज्वान ५ अथ कथाप्रसंग ॥ 'एक समैया की बातें हैं परिगै पर्व दशहरा आय ॥ सुनवाँ बोली तब ऊदन ते साँची सुनो बनाफरराय १ मोरि लालसा यह डोलति है मज्जन करों बिठूरै जाय ॥ आयसु लैके तुम दादा की देवर मोहिं देउ हनवाय २ यह मन भायगई ऊदन के आल्हा महल पहुँचे जाय ॥ हाथ जोरि अरु बिनती करिकै बोला तहाँ लहुरवाभाय ३ सुनवाँ भौजी की इच्छा है हमको गंग देउ हनवाय ॥ आयसु पावैं जो दादा की तौ हम जायँ बिठूरै धाय ४ इतना सुनिकै आल्हा बोले मानों साँच लहुरवा भाय ॥ देश देश.के राजा अइहैं करिहौं कलह तहाँपर जाय ५ त्यहिते बैठो घर अपने मा ऊदन साँच दीन बतलाय ॥ पर्व दशहरा की फिरि अइहै औरे साल हनायो जाय ६ इतना सुनिकै ऊदन बोले दादा सुनो बनाफरराय ॥ पगिया हमरी कछु अरुझीना जो तहँ रारि मचैवे जाय ७ बाचा हारे हम भौजी ते तुमको गंग देब हनवाय ॥ मोहिं भरोसा है दादा को करिहौ पूर मनोरथ भाय ८ बातें सुनिकै बघऊदन की दीन्ह्यो हुकुम बनाफरराय ॥ 'हुकुम पायकै ऊदन ठाकुर लीन्हीं तुरत फौज सजवाय ६ सजी पालकी तहँ ठाढ़ी थीं सुनवाँ फुलवा भई सवार ॥ घोड़ बेंदुला का चढ़वैया औ जगनायक भयो तयार १० सवालाख दल ऊदन लैके तुरतै कूच दीन करवाय ॥

उदयसिंहकाहरण । ५१६ ३ बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गा छाय ११ आठ रोजकी मैजलि करिकै पहुँचा तहाँ बनांफरराय ॥ तम्बू गड़िगा तहँ ऊदन का भारी ध्वजा रहा फहराय १२ सुभिया बेड़िनि झुन्रागढ़ ते पहुँची सबऊ बिठूरै जाय ॥ करै तमाशा सो तम्बुन में पावै द्रव्य तहाँ अधिकाय १३ जहँपर तम्बू था ऊदन का - सुभिया तहाँ पहुँची आय ॥ रूप देखिकै बघऊदन का दीन्ह्यो नाच रंग बिसराय १४ कछु नहिं भावै सुभिया मनमा ठगिनी भई तहाँपर आय ॥ औरी नटिनी सँग जे आईं तिनका नाच दीनकरवाय १५ अपना बैठे तहँ सोचति है कैसे मिलैं बनाफरराय ॥ जादू डारौं जो ऊदन पर तबहुँन काजसिद्धदिखलाय १६ जाहिर जादू मा सुनवाँ है हमरे जाय प्राण पर आय ॥ मनमा सोचै मनै बिसूरै मनमा बार बार पछिताय १७ डारि मोहनी दी लश्कर मा जेवर डिब्बा लीन उठाय ॥ दीन रुपैया ऊदन ठाकुर नटिनिन कूचदीन करवाय १८ चढ़ीं पालकी सुनवाँ फुलवा गंगा उपर पहुँचीं जाय ॥ मज्जन कीन्ह्यो उदयसिंह तहँ विप्रनदानदीन अधिकाय १९ मज्जन कीन्ह्यो जगनायक जी प्रातःकृत्य कीन हर्षाय ॥ दान मान दै सब विप्रन को सबहिन कूचदीनकरवाय २० लखा तमाशा औ मेला खुब तम्बुन फेरि पहुँचे आय ॥ उखरि ग तम्बू फिरि ऊदन का लश्कर कूच दीन करवाय २१ बाजैं डंका अह्तंका के हाहाकार शब्द गे छाय ॥ अस्त दिवाकर जब पश्चिम भे तम्बूदीन तहाँ गड़वाय २२ उत्तम नदिया हैं यमुनाजी उतरे जहाँ बनाफरराय ॥

१ आल्हखण्ड । ५२० डिब्बा दीख्यो नहिं जेवर को सुनवाँ गई सनाकाखाय २३ तुरत बनाँफर उदयसिंह को अपने पास लीन बुलवाय ॥ कहि समुझावा तहँ ऊदन ते डिब्बा नहीं परै दिखलाय २४ एक लाख का सब गहना है कैसी करैं बनाफरराय ॥ डिब्बा भूलाहै बिठूर मा मोको याद भयो यहँ आय २५ काह बतावों मैं देवर ते करिये कैसो कौन उपाय ॥ धीरज राखो अपने मनमा बोले वचन ल्हुरवाभाय २६ तुरत बुलायो जगनायक को औ सब हाल कह्यो समुझाय ॥ हम तो जावत हैं बिठूर को तुम अब कूचजाउ करवाय २७ यह मन भायगई जगना के ऊदन गये बिठूरै आय ॥ कैयो दिनका धावा करिकै जगना अटा मोहोबे जाय २८ रहा न मेला कछु लौटेमा सिरकी पाल परे दिखराय ॥ तिनमा नटिनी औ नट ठहरे गे तिन पास बनाफरराय २६ सुभिया दीख्यो जब ऊदन का भै मन खुशी तबै अधिकाय ॥ कहाँते आयो औ कहँ जैहौ ठाकुर हाल देउ बतलाय ३० सुनिकै बातें ये सुभिया की बोले फेरि बनाफरराय ॥ नगर मोहोबा के हम ठाकुर आयन आजु बिठूर नहाय ३१ जब तुम नाचन गइ तम्बूमा गहनो गयो हमार हिराय ॥ पतालगावन त्यहि आयन है तुमते साँच दीन बतलाय ३२ इतना सुनिकै सुभिया बोली मानो साँच बनाफरराय ॥ पँसासारी हमते खेलो हम फिरि पतादेवलगवाय ३३ खेल पसारा सुभिया बेड़िनि बैठे तहाँ ल्हुरवाभाय ॥ जुआँ युद्धसों साँचे क्षत्री कबहूँ न धरैं पछारी पाँय ३४ नल औ पुष्कल आगे खेल्यो झेल्योदुःख नृपति अधिकाय ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२१ ५ भारी गाथा नलराजा की देखो महाभारत में जाय ३५ द्वापर शकुनी के सँग खेल्यो कुन्ती पुत्र युधिष्ठिरराय ॥ हारि द्रौपदी महाराजा गे खैंचा चीर दुशासन आय ३६ मानिकै शासन दुर्योधन का पहुँचे बनोवास फिरिजाय ॥ काटिकै संकट महाराज सब कीन्हेनि महाभारत फिरि आय ३७ यहु दुखदाई पंसासारी खेलन लागि बनाफरराय ॥ जादू डारी सुभिया बेड़िनि भे तब सुवा लहुरवा भाय ३८ डारिकै पिंजरा मा ऊदन का सुभिया कूच दीन करवाय ॥ जायकै पहुँची फिरि दिल्ली मा जहँ पर बसैं पिथौरा राय ३६ जहाँ कचहरी दिल्लीपतिकी सुभिया गई यतन सों धाय ॥ करी बन्दगी महाराजा को दोऊ हाथ जोरि शिरनाय ४० सुभिया बोली फिरि पिरथी ते राजन साँच देयँ बतलाय ॥ डारिकै जादू हम ऊदन पर औ मेला ते लई चुराय ४१ पै डर हमरे है आल्हा का स्वामी जगा देउ बतलाय ॥ डारिकै सिरकी हम दिल्ली मा निर्भय बसी पिथौरा राय ४२ इतना सुनिकै पिरथी बोले सुभिया कूच देउ करवाय ॥ जो सुनिपै हैं आल्हा ठाकुर हम ते रारि मचै हैं आय ४३ इतना सुनिकै सुभिया चलिभै डेरन फेरि पहुँची आय ॥ कूच करावा फिरि दिल्ली ते सब दरबार भँझावा जाय ४४ कहूँ ठिकाना जब लाग्योना सुन्नागढ़ै गयी तब धाय ॥ जहाँ कचहरी गजराजा की सुभिया तहाँ पहुँची जाय ४५ हाथ जोरिकै महाराजा के आपन हाल दीन बतलाय ॥ जगा चाहती हम सुन्नागढ़ यह इककाज हमारो आय ४६ इतना सुनिकै राजा बोले सुभिया कूच जाउ करवाय ॥

६ , आल्हखण्ड । ५२२ जो सुनि पै हैं आल्हा ठाकुर हमते रारि मचै हैं आय ४७ सुनिकै बातें गजराजा की सुभिया कूच दीन करवाय ॥ झारखण्ड के फिरि जंगल मा डेराजाय दीन गड़वाय ४८ चौकी पहरा करि जादू के निर्भय बसी तहाँ सुखपाय ॥ सुनवाँ सोचै ह्याँ महलन मा आये नहीं लहुरा भाय ४६ पता लगावों मैं ऊदन का जावों देश देश को धाय ॥ यहै सोचिकै रानी सुनवाँ चिल्हियाबनीसरगमड़राय ५० पहिले ढूँढ़ा त्यहि बिठूर का पाछे गयी कामरू धाय ॥ सिलहट बिजहट मौरँग भुन्ता दिल्लीशहरलखा फिरिजाय ५१ पता न पायो जब ऊदन का पहुँची झारखण्ड में आय ॥ तहाँ पै डेराहैंड बेड़िनि के सुनवाँ बैठि बरगदे जाय ५२ पेड़ बरगदा के नीचे मा सुभिया पलँग लीन बिछवाय ॥ लैकै पिंजरा फिरि सुवना का मानुष तुरतै दीन बनाय ५३ खेलै चौपरि सँग ऊदन के सुभिया बोली बचन सुनाय ॥ व्याह हमारे सँगमा करिये मानो कही बनाफरराय ५४ भजिये अल्ला बिसमिल्ला को ऊदन रटो खुदाय खुदाय ॥ तब सुख पैहौ तुम देहीं का नाहीं खाल लेउँ खिचवाय ५५ खुदा खैरियत तुम्हरी करि हैं बिसमिल भलाकरी सबकाल ॥ बाबा आदम संकट टारी मेटी अली भली जंजाल ५६ बातें सुनिकै ये बेड़िनि की बोला देशराज का लाल ॥ खुदा खुदाई चहु दिखलावैं बिसमिलआयजायँततकाल५७ ऊदन व्याहैं नहिं बेड़िनि को कबहूँ राम नाम बिसराय ॥ देश आरिया के क्षत्री हम कैसे मुसलमान ह्वैजायँ ५८ जब छुइजावैं मुसलमान को तबहीं तुरत करें अस्नान ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२३ ७ बेवश हैकै पिंजरा आयन ताते छूटिगयो सब मान ५६ पढ़ै फारसी हम बिद्या ना अपनौ धर्म करैं प्रतिपाल ॥ नित प्रति ध्यावैं रघुनन्दन को पूरणब्रह्म सुरासुर पाल ६० खाल न रहै जो देहीमा केवल प्राण करैं विश्राम ॥ तबहूँ मुख सों ऊदन ठाकुर कवहूँ न लेयँ खुदाको नाम ६१ निर्भय बातें सुनि ऊदन की बरगद डार दीन टँगवाय ॥ बहुतक बाँसन हनि हनि मारा ऊदन जपो खुदाय खुदाय ६२ सुनिकै बातें ये सुमिया की बोला फेरि बनाफरराय ॥ ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६३ बात न दूसरि हम अब कहिबे चहु तन धजीधजीउड़िजाय ॥ ऊदन ब्याहैं नहिं बेड़िनि को कवहूँ राम नाम बिसराय ६४ सुनिकै बातें उदयसिंह की तुरतै सुवना लीन बनाय ॥ डारिकै पिंजरामा ऊदन का टाँगा फेरि बरगदा आय ६५ देखि दुर्दशा यह ऊदन की सुनवाँ बार बार पछिताय ॥ डारि मशान दियो सुनवाँ ने पाछे पिंजरा लीन उठाय ६६ लैकै पिंजरा कछु दूरी मा सुनवाँ गई तड़ाका धाय ॥ सुवना लैकै फिरि पिंजरा ते मानुष तुरतै दीन बनाय ६७ सुनवाँ बोली फिरि ऊदन ते क्यों नहिं देवर जपो खुदाय ॥ काहे बिज्में तुम बेड़िनि में नित प्रति सहौ बाँसके घाय ६८ चलिये देवर अब मोहबे को तुम्हरी बार बार बलिजायँ ॥ सुनिकै बातें ये सुनवाँ की बोले फेरि बनाफर राय ६९ चोरी चोरा ना हम जैहैं तुमते साँच देयँ बतलाय ॥ लैकै फौजैं दादा आवैं हमरी कैद लेयँ छुड़वाय ७० ऐसे ऊदन अब जैहैं ना नित प्रति सहैं बाँसके घाय ॥

८ आल्हखण्ड । ५२४ सुवा बनावो अब मानुष ते टाँगो फेरि बरगदा जाय ७१ इतना सुनिकै रानी सुनवाँ टाँगा फेरि बरगदा आय ॥ चील्ह रूप ह्वै उड़ि तहँनाते पहुँची फेरि मोहोबे जाय ७२ मानुष ह्वैकै फिरि महलनमा इन्दल पूत लीन बुलवाय ॥ कहि समुझावा सब इन्दल ते बप्पै खबरि जनावो जाय ७३ सुनिकै बातें ये माता की इन्दल पूत चला शिरनाय ॥ जहाँ कचहरी है आल्हा कै इन्दल पूत पहुँचा आय ७४ बड़े प्यार सों आल्हाठाकुर अपने पास लीन बैठाय ॥ फिरि शिर सूंघ्यो आल्हाठाकुर बोल्यो मधुरवचनमुसुकाय ७५ काह लालसा है बचुवा कै सो अब बेगि देउ बतलाय ॥ इतना सुनिकै इन्दलठाकुर कहिगा यथातथ्य सब गाय ७६ सुनिकै आल्हा बोलन लागे है यहु दुष्ट लहुरवा भाय ॥ करकति छाती दुख सुनिकै अब त्यहिते कैद छुड़ावब जाय ७७ इतना कहिकै आल्हा ठाकुर डंका तुरत दीन बजवाय ॥ सजिगालश्करफिरिआल्हाका तुरतै कूच दीन करवाय ७८ बनिकै चिल्हिया सुनवाँ रानी आधे सरग रही मड़राय ॥ जाय बरगदा के फिरि पहुँची चुप्पे बैठि डारपै जाय ७६ डारि मशान दयो सुभियादल तुरतै पिंजरा लीन उठाय ॥ कछु दूरिचलि झारखण्ड ते फूँका मन्त्र तहाँपर जाय ८० मानुष ह्वैकै फिरि बघऊदन ठाढ़े भये शीश को नाय ॥ तब समुझावा रानी सुनवाँ लश्करगयो तुम्हारो आय ८१ चील्हरूप ह्वै रानी सुनवाँ बैठी एकडार पै जाय ॥ तहँने चलिकै ऊदन ठाकुर आगे मिले फौजमें आय ८२ लादू चौंरी सुभिया वाली सबियाँ हाल कहा समुझाय ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२५ ६ इतना सुनिकै सुभिया बेड़िनि तुरतै उठी तड़ाका धाय ८३ सहुवा बीरन को बुलवावा औ सब हाल दीन बतलाय ॥ करो तयारी समरभूमि की आये लड़न बनाफरराय ८४ खबरि फैलिगै यह बेड़ियन-मा हैंगे डेढ़ सहस तय्यार ॥ झीलम बखतर सबहिन पहिरा सबहिन बाँधिलीन हथियार ८५ कोउकोउबेड़ियाचढ़िहाथिनमा कोउ कोउ घोड़भये असवार ॥ बहुतक बेड़िया हैं पैदल मा लीन्हे हाथ ढाल तलवार ८६ गड़िगा तम्बू ह्वाँ आल्हा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥ बाजै डंका अहर्तंका का हाहाकार शब्दका छाय ८७ देवा ऊदन इन्द्दल ठाकुर तीनों भये बेगि तय्यार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ८८ दुहुँ दल तुरतै इकठौरी भे लागी चलन तहाँ तलवार ॥ कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी कहुँ कहुँ मारैं ज्वान् कटार ८६ कटि भुजदण्डै गिरैं खेत में उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ६० मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥ ना मुहँ फेरैं मोहबे वाले नादल बेड़ियनकात्यहिबार ६१ बड़े लड़ैया ई बेड़िया हैं इनते हारिगयी तलवार ॥ को गति वरणै तहँ इन्द्दल कै सबदिशिकरै भड़ाभड़मार ६२ सुनवाँ सुभिया कै वरणी में जादुन दऊ बड़ी हुशियार ॥ आगी पानी अरु आँधी की पुरियन होय तहाँपर मार ६३ चलै सिरोही रणमण्डल मा क्षत्री गरु करैं ललकार ॥ कहुँ ज्वालपकनि बिजली चमकनि तड़पै चहूँदिशा तलवार ६४ क्षत्री गाजैं डंका बाजैं बाजैं तहाँ शूर सरदार ॥

१० | आल्हाखण्ड | ५२६ को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५ इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥ कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६ पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥ तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७ रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥ कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८ बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥ नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९ चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥ लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १०० लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥ बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१ जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥ सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२ इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥ जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३ हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥ कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४ इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥ वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५ जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥ जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६ ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥

उदयसिंहकाहरण । ५२७ ११ जो कोउ भागतहै सम्मुख ते त्यहिना हनैं बनाफरराय १०७ मारे मारे तलवारिन ते बिड़िया चिरियाकरें निदान ॥ खेत छूटिगा सब बिड़ियन ते जीता उदयसिंह मैदान १०८ बाजे डंका अहंतंका के हैगा घोर शोर घमसान ॥ जितने क्षत्री मोहबेवाले डेरन आयगये ते ज्वान १०६ चील्ह रूप है सुनवाँ रानी महलन आयगयी तत्काल ॥ कूच करायो फिरि लश्कर को बेटा देशराज के लाल ११० आल्हा ठाकुर पचशब्दा पर इन्द्ल पपिहापर असवार ॥ घोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं कम्मरपरी नाँगि तलवार १११ यहु अलबेला भीषमवाला देवा मैनपुरी चौहान ॥ घोड़ मनोहर पर सोहतहै रणमा बड़ालड़ैयाज्वान ११२ कैयो दिनकी मैजलि करिकै झुन्नागढ़ै पहुँचे आय ॥ गड़िगा तम्बू तहँ आल्हा का भारी ध्वजारहा फहराय ११३ ढोल नगारा तुरही बाजीं हाहाकार शब्दगा छाय ॥ गा हरिकारा तब झुन्नागढ़ राजै खबरिजिनावा जाय ११४ आल्हा ऊदन मोहबे वाले धूरे परे हमारे आय ॥ आवैं फौजें झारखण्ड ते अबतो नगर मोहोबे जायँ ११५ सुनिकै बातें हरिकारा की पलकी तुरत लीन मँगवाय ॥ इशरत मुहरें इक हीरा लै पलकी चढ़ा तड़ाकाधाय ११६ जहाँ बनाफर आल्हा ठाकुर राजा तहाँ पहुँचा आय ॥ आदर करिकै आल्हा ठाकुर अपने पास लीन बैठाय ११७ द्वरि अशर्फी दी सम्मुखमा हीरा हाथ दीन पकराय ॥ सखियाँ गाया तब ऊदन की आल्हा यथातथ्यगे गाय ११८ बड़े प्रेम सों दोऊ ठाकुर बोलैं प्रीति रीति के भाय ॥

१२ आल्हखण्ड । ५२८ बिदा मांगिकै फिरि आल्हासों राजा चढ़ा पालकी जाय ११६ गा महराजा मुन्नागढ़ मा तम्बुन स्वये बनाफरराय ॥ राति बसेरा करि मुन्नागढ़ भुरहीं कूच दीन करवाय १२० कैयो दिनकी मैजलि करिकै मोहबे गये बनाफरराय ॥ सौसौ तोपैं दर्गी सलामी जबघरगयेउदयसिंहराय १२१ को गति वरणै त्यहि समयाकै हमरे बून कही ना जाय ॥ ऊदनहरण पूर अब ह्रैगा ध्यावैं तुम्हें शारदा माय १२२ कण्ठ में बैठो तुम महरानी भूले अक्षर देउ बताय ॥ आशिर्वाद देउँ मुंशीसुत जीवो प्रागनरायण भाय १२३ रहै समुन्दर में जबलों जल जबलों रहैं चन्द औ सूर ॥ मालिक ललिते के तबलौं तुम यशसों रहौ सदा भरपूर १२४ माथ नवावों पितु माता को जिनबल पूर कीन यह गाथ ॥ नहीं भरोसा निज भुजबल का स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ १२५ पूर तरंग यहाँ सों ह्रैगा सुमिरों तुम्हें भवानीकन्त ॥ राम रमा मिलि दर्शन देवैं इच्छा यही मोरि भगवन्त १२६ इति श्रीलखनऊनवासि (सी,आई,ई) मुंशीनवलकिशोरात्मजबावूप्रागना- रायणजीकीआज्ञानुसारउनामप्रदेशान्तर्गतपँड़रीकलांनिवासिमिश्रवंशोद्भव बुधकृपाशङ्करसूनु पं० ललिताप्रसादकृतऊदनहरण वर्णनोनामप्रथमस्तरंगः १ ॥ उदयसिंहकाहरणसमाप्त ॥ इति ॥

अथ आल्हखण्ड ॥ बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्धवर्णन ॥ सवैया ॥ ब्याकुल गंध्रब नागसबै नरदेव अदेव लहे दुखभारा। गोतनु धारि गयी पिरथी अरथी सँग देवन लै त्यहिबारा ॥ वाणि भई तबहीं नभते ललिते अवधेशके होब कुमारा । ध्यावत ब्रह्म सुरासुर जाहि स्वई प्रभु राम लियो अवतारा १ सुमिरन ॥ दोउ पद बन्दौं रामचन्द्र के जिनबल चलाजाउँ भवपार ॥ राम न होते जो दुनियामा बेड़ा कौन लगावत पार १ कौन समुन्दर को मथिडारत चौदारतन लेत निकराय ॥ कोथों मारत दशकन्धर को धारत कौन धर्मपथ आय २ कोथों तारत इनपापिन को जिनकीदशाकही ना जाय ॥ मारा मारा कहि तरिगे जो पापी बालमीकि असभाय ३ गीधअजामिलगतिगणिकाकी सबकोविदितभलीविधिआय ॥ १४

५. पञ्चम भाग: आल्हा का संन्यास, अमरत्व वरदान व महाकाव्य उपसंहार

२ आल्हाखण्ड । ५३० ये सब पापी हैं प्रथमै के तरिगे रामचरण को ध्याय ४ स्वई भरोसा धरि जियरेमा नितप्रति धरों चरणपरमाथ ॥ पारलगायो भवसागर ते स्वामी रामचन्द्र रघुनाथ ५ छोड़ि सुमिरनी अब रघुबर कै बेला गौन कहौं सब गाय ॥ ब्रह्मा ठाकुर दिल्ली जैहैं पैहैं विजय पिथौराराय ६ अथ कथाप्रसंग ॥ एक समैया इक औसर मा बैठे सभा रजा परिमाल ॥ आल्हा ऊदन इन्द्दल देवा लाखनि साथ और नरपाल १ को गति बरणै त्यहि समयाकै भारी लाग राजदरवार ॥ त्यही समैया त्यहि औसरमा आवा उरई का सरदार २ आवो आवो बैठो बैठो राजै कीन बहुत सतकार ॥ बैठिग ठाकुर उरई वाला आला चुगुलन मा सरदार ३ बिना बुलाये ते बोला फिरि तुम सुनिलेउ रजापरिमाल ॥ औसर ऐसो फिरि पैहौ ना ब्रह्मा गौनलेउ यहिकाल ४ बैठि कनौजी लाखनिराना बैठे देशराज के 'लाल ॥ लैकै वीरा यहि औसर मा तुम धरिदेउ रजापरिमाल ५ कौन बहादुर यहि समया मा बेला गौन चबावै पान ॥ स्यावासि स्यावासि माहिलठाकुर तुम्हरे बचन ठीक परमान ६ इतना कहिकै परिमालिक जी तुरतै धरा तहाँपर पान ॥ है कोउ क्षत्री तेहेवाला लेवै पान आन सो ज्वान ७ सुनिकै बातें परिमालिक की सब कोउ गये सनाकाखाय ॥ बोलि न आवा क्यहु ठाकुरते आनन गये तुरत मुरझाय ८ चारि घरीदिन यहिविधि बीता कोउ न पान पास समुहान ॥ तवै बहादुर द्यावलि वाला पहुँचा उदयसिंह तहँ ज्वान ६

बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३ माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥ पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १० जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥ इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११ मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥ अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२ पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥ इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३ लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥ आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४ दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥ आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५ बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥ घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६ तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥ कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७ इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥ कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८ मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥ बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६ यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥ आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २० हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥ जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१

[Page Header] ४ आल्हाखण्ड । ५३२

आश हमारी अब तुमहीं लग साँची सुनो कनौजीराय ।. तुम जो जावो ब्रह्मा सँग मा तौ सबकाम सिद्धिहैजाय २२ सुनिकै बातें ये मल्हना की बोले फेरि कनौजीराय ॥ हम चलिजैबे ब्रह्मा सँग मा लैबे विदा मातु करवाय २३ इतना कहिकै लाखनि चलिभे अपनी फौज पहुँचे आय ॥ बाजा डङ्का इत ब्रह्मा का हाहाकार शब्द गा छाय २४ उतै कनौजी लाखनिराना अपनी फौज लीन सजवाय ॥ यह सुधि पाई उदयसिंह जब आये तबै तड़ाकाधाय २५ औ यह बोले लखराना ते मानो कही कनौजीराय ॥ साथी हमरे की ब्रह्मा के जोतुमफौजलीनसजवाय २६ पहिले लड़िकै हमरे सँगमा पाछे धरयो अगारी पाँय ॥ इतना सुनिकै सय्यद् बोले तुम सुनिलेउ कनौजीराय २७ संग न जावो तुम ब्रह्मा के सम्मन यहै ठीक ठहराय ॥ करो लड़ाई तुम ऊदन ते तौ सब जैहैं काज नशाय २८ हितू तुम्हारे नहिं ब्रह्मा हैं जैसे हितू बनाफरराय ॥ कहा मानिकै यह सय्यद् का लाखनि फेंटदीनखुलवाय २६ भई अठारह उरई वाले मोहबे अये तड़ाकाधाय ॥ बड़ बड़ शूरन को सँग लैके ब्रह्मा कूच दीन करवाय ३० सात दिनौना के अरसा माँ दिल्ली गये बँदेलेराय ॥ दिल्ली केरे फिरि ढाँड़े गा लश्कर ब्रह्मा दीन डराय ३१ गड़िगा तम्बू तहँ ब्रह्मा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥ माहिल पहुँचे फिरि दिल्ली मा जहँ पर बैठ पिथौरा राय ३२ बड़ी खातिरी पिरथी कीन्ही अपने पास लीन बैठाय ॥ काहे आये उरई वाले आपन हाल देउ बतलाय ३३

[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ४३१

इतना सुनिकै माहिल बोले मानो साँच पिथौराराय ॥ ब्रह्मा आये हैं गौने को फौजैं परीं डाँड़ पर आय ३४ पहिले बीरा ऊदन लीन्ह्यो सो ब्रह्मा ने लीन छिनाय ॥ अब मन तुम्हरे जैसी आवै तैसी कहो पिथौराराय ३५ इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल साँच देयँ बतलाय ॥ बिना लड़ाई के गौना कहु कैसे देयँ पिथौरा राय ३६ करें लड़ाई अब सैंभराभरि पाछे बिदा लेयँ करवाय ॥ यह कहि दीजो तुम ब्रह्मा ते माहिल बार बार समुझाय ३७ इतना सुनिकै ब्रह्मानँद ते माहिल खबरि जनाई आय ॥ बिना लड़ाई के मनिहैं ना यहु महराज पिथौराराय ३८ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर कागज कलमदान मँगवाय ॥ लिखिकै चिट्ठी दी धावन को धावन चला तड़ाका धाय ३६ जहाँ कचहरी पृथीराज की धावन अटा तड़ाका आय ॥ हाथ जोरिकै धावन तुरतै चिट्ठी तहाँ दीन पकराय ४० बाँचत चिट्ठी ब्रह्मानँद की पिरथी क्रोध कीन अधिकाय ॥ शूर चौंड़िया को बुलवायो औ सबहालकह्योसमुझाय ४१ तुरतै डंका को बजवावो सबियाँ फौज लेउ सजवाय ॥ बाँधि जँजीरन तुम ब्रह्मा का हमका बेगि दिखावो आय ४२ हुकुम पिथौरा का पावनखन डंका तुरत दीन बजवाय ॥ बाजे डंका अहतंका के हाहाकार शब्द गा छाय ४३ सजिसजितोपें खेतन चलिभईं हाथिन होन लागि असवार ॥ झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ४४ दुइ दुइ भाला इक इक बरछी कोउ कोउ बाँधी तीनकटार ॥ वीर तमंचा कड़ाबीन औ गदकागुर्ज लीन त्याहिवार ४५

६ आल्हखण्ड । ५३४ कच्छी मच्छी नकुला सब्जा हरियल मुश्की घोड़ अपार ॥ ताजी तुर्की पँचकल्यानी इनपर होन लागि असवार ४६ अंगद पंगद मकुना भौंरा सजिगे श्वेतवरण गजराज ॥ सोहैं अँवारी तिन हाथिन पर बहुतन हौदा रहे विराज ४७ को गति बरणै त्यहि समया कै मानो कोप कीन सुरराज ॥ बाजैं डंका अह्तंका के मानों गिरैं उपर ते गाज ४८ पहिल नगाड़ा में जिनबन्दी दुसरे फाँदि भये असवार ॥ तिसर नगाड़ा के बाजत खन चलिभे सबै शूर सरदार ४९ खर ,खर खर खर कै रथदौरे रवन्ना चले पवन की चाल ॥ हाथी चिंघेरै घोड़ा हींसे कीन्हेनिशब्दबहुतनरपाल ५० गुस्ती धावन तहँ ब्रह्मा का. तम्बुन अटा तड़ाका आय । खबरि सुनाई यह ब्रह्मा को की दल अवै चँदेलेराय ५१ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर फौजैं तुरत लीन सजवाय ॥ बाजे डंका अह्तंका के बंकन शंक दीन बिसराय ५२ ई निरशंका मोहबे वाले , बाँधेनि तुरत ढाल तलवार ॥ साजा ठाढ़ा हरनागर था ब्रह्मा फाँदि भये असवार ५३ पहिली लड़ाई भै तोपन कै पाछे चलन लागि तलवार ॥ कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी मारन लागि शूर सरदार ५४ तीर तमंचन की मारुइ भई कोताखानी चलीं कटार ॥ तेगा चमकै बर्दवान का ऊना चलै बिलाइति क्यार ५५ को गति बरणै त्यहि समयामा बाजै छपक छपक तलवारे ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ५६ ना मुहँ फेरैं दिल्ली वाले ना ई मोहबे के सरदार ॥ मुण्डन केरे मुड़ चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ५७