आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउदयसिंहकाहरण । ५२७ ११ जो कोउ भागतहै सम्मुख ते त्यहिना हनैं बनाफरराय १०७ मारे मारे तलवारिन ते बिड़िया चिरियाकरें निदान ॥ खेत छूटिगा सब बिड़ियन ते जीता उदयसिंह मैदान १०८ बाजे डंका अहंतंका के हैगा घोर शोर घमसान ॥ जितने क्षत्री मोहबेवाले डेरन आयगये ते ज्वान १०६ चील्ह रूप है सुनवाँ रानी महलन आयगयी तत्काल ॥ कूच करायो फिरि लश्कर को बेटा देशराज के लाल ११० आल्हा ठाकुर पचशब्दा पर इन्द्ल पपिहापर असवार ॥ घोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं कम्मरपरी नाँगि तलवार १११ यहु अलबेला भीषमवाला देवा मैनपुरी चौहान ॥ घोड़ मनोहर पर सोहतहै रणमा बड़ालड़ैयाज्वान ११२ कैयो दिनकी मैजलि करिकै झुन्नागढ़ै पहुँचे आय ॥ गड़िगा तम्बू तहँ आल्हा का भारी ध्वजारहा फहराय ११३ ढोल नगारा तुरही बाजीं हाहाकार शब्दगा छाय ॥ गा हरिकारा तब झुन्नागढ़ राजै खबरिजिनावा जाय ११४ आल्हा ऊदन मोहबे वाले धूरे परे हमारे आय ॥ आवैं फौजें झारखण्ड ते अबतो नगर मोहोबे जायँ ११५ सुनिकै बातें हरिकारा की पलकी तुरत लीन मँगवाय ॥ इशरत मुहरें इक हीरा लै पलकी चढ़ा तड़ाकाधाय ११६ जहाँ बनाफर आल्हा ठाकुर राजा तहाँ पहुँचा आय ॥ आदर करिकै आल्हा ठाकुर अपने पास लीन बैठाय ११७ द्वरि अशर्फी दी सम्मुखमा हीरा हाथ दीन पकराय ॥ सखियाँ गाया तब ऊदन की आल्हा यथातथ्यगे गाय ११८ बड़े प्रेम सों दोऊ ठाकुर बोलैं प्रीति रीति के भाय ॥