भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

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१० | आल्हाखण्ड | ५२६ को गति बरणै तहँ बेड़ियन कै उनतो भली मचाई रार ६५ इनहुन दुर्गति तिनकी कीन्ही कायर छोड़ि भागि मैदान ॥ कटि कटि कल्ला गिरैं बलेड़ा घैहा होयँ अनेकन ज्वान ६६ पाँचसै बेड़िया घायल हैगे सब दल रहिगा एकहजार ॥ तीनसै क्षत्रिय मोहबेवाले जूझे समर तहाँ त्यहिवार ६७ रानी सुनवाँ सुमिया बेड़िनि जादुन करैं तहाँपर रार ॥ कोऊ काहूते कमती ना दोऊ जादुन में हुशियार ६८ बीरमहम्मद की पुरिया को सुमिया छाँड़ि दीन त्यहिवार ॥ नारसिंह की जादू लैके सुनवाँ तजा तुरतललकार ९९ चिल्हिया हैकै सुनवाँ सुमिया दूनन खूब कीन मैदान ॥ लड़ते लड़ते दूनों चिल्हिया पहुँचींजायतुरतअसमान १०० लड़ते लड़ते द्वउ ऊपर ते नीचे गिरीं तड़ाका आय ॥ बड़ी लड़ाई भै पंजन ते अद्भुत समर कहानाजाय १०१ जहाँ लड़ाई द्वउ चिल्हियनकी इन्दल तहाँ पहुँचा आय ॥ सुनवाँ बोली तहँ इन्दल ते बेटा मूड़ देउ बगदाय १०२ इन्दल बोले तब सुनवाँ ते कैसे देवैं मूड़ गिराय ॥ जो हम मारैं यहि तिरिया को तौ रजपूती धर्मनशाय १०३ हाथ मेहरियन पर छाँड़ैं ना कबहूँ बीर समर में माय ॥ कैसे मारैं हम तिरिया को माता सोचो और उपाय १०४ इतना सुनिकै सुनवाँ बोली बेटा जूरा लेउ उड़ाय ॥ वातैं सुनिकै ये सुनवाँ की जूरा काटि लीन त्यहिठायाँ १०५ जीवन दान दीन सुमियाको सोऊ भागि तड़ाकाधाय ॥ जादू झूठी भई सुमिया की तबसोलागितहाँपछिताय १०६ ऊदन देबाकी मारुन मा बेड़िया भागे खेत बराय ॥