आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंउदयसिंहकाहरण । ५२५ ६ इतना सुनिकै सुभिया बेड़िनि तुरतै उठी तड़ाका धाय ८३ सहुवा बीरन को बुलवावा औ सब हाल दीन बतलाय ॥ करो तयारी समरभूमि की आये लड़न बनाफरराय ८४ खबरि फैलिगै यह बेड़ियन-मा हैंगे डेढ़ सहस तय्यार ॥ झीलम बखतर सबहिन पहिरा सबहिन बाँधिलीन हथियार ८५ कोउकोउबेड़ियाचढ़िहाथिनमा कोउ कोउ घोड़भये असवार ॥ बहुतक बेड़िया हैं पैदल मा लीन्हे हाथ ढाल तलवार ८६ गड़िगा तम्बू ह्वाँ आल्हा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥ बाजै डंका अहर्तंका का हाहाकार शब्दका छाय ८७ देवा ऊदन इन्द्दल ठाकुर तीनों भये बेगि तय्यार ॥ हथी चढ़ैया हाथिन चढ़िगे बाँके घोड़न भे असवार ८८ दुहुँ दल तुरतै इकठौरी भे लागी चलन तहाँ तलवार ॥ कहुँ कहुँ भाला कहुँ कहुँ बरछी कहुँ कहुँ मारैं ज्वान् कटार ८६ कटि भुजदण्डै गिरैं खेत में उठि उठि रुण्ड करें तलवार ॥ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ६० मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्त की धार ॥ ना मुहँ फेरैं मोहबे वाले नादल बेड़ियनकात्यहिबार ६१ बड़े लड़ैया ई बेड़िया हैं इनते हारिगयी तलवार ॥ को गति वरणै तहँ इन्द्दल कै सबदिशिकरै भड़ाभड़मार ६२ सुनवाँ सुभिया कै वरणी में जादुन दऊ बड़ी हुशियार ॥ आगी पानी अरु आँधी की पुरियन होय तहाँपर मार ६३ चलै सिरोही रणमण्डल मा क्षत्री गरु करैं ललकार ॥ कहुँ ज्वालपकनि बिजली चमकनि तड़पै चहूँदिशा तलवार ६४ क्षत्री गाजैं डंका बाजैं बाजैं तहाँ शूर सरदार ॥