भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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[Header] बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ४३१

इतना सुनिकै माहिल बोले मानो साँच पिथौराराय ॥ ब्रह्मा आये हैं गौने को फौजैं परीं डाँड़ पर आय ३४ पहिले बीरा ऊदन लीन्ह्यो सो ब्रह्मा ने लीन छिनाय ॥ अब मन तुम्हरे जैसी आवै तैसी कहो पिथौराराय ३५ इतना सुनिकै पिरथी बोले माहिल साँच देयँ बतलाय ॥ बिना लड़ाई के गौना कहु कैसे देयँ पिथौरा राय ३६ करें लड़ाई अब सैंभराभरि पाछे बिदा लेयँ करवाय ॥ यह कहि दीजो तुम ब्रह्मा ते माहिल बार बार समुझाय ३७ इतना सुनिकै ब्रह्मानँद ते माहिल खबरि जनाई आय ॥ बिना लड़ाई के मनिहैं ना यहु महराज पिथौराराय ३८ इतना सुनिकै ब्रह्मा ठाकुर कागज कलमदान मँगवाय ॥ लिखिकै चिट्ठी दी धावन को धावन चला तड़ाका धाय ३६ जहाँ कचहरी पृथीराज की धावन अटा तड़ाका आय ॥ हाथ जोरिकै धावन तुरतै चिट्ठी तहाँ दीन पकराय ४० बाँचत चिट्ठी ब्रह्मानँद की पिरथी क्रोध कीन अधिकाय ॥ शूर चौंड़िया को बुलवायो औ सबहालकह्योसमुझाय ४१ तुरतै डंका को बजवावो सबियाँ फौज लेउ सजवाय ॥ बाँधि जँजीरन तुम ब्रह्मा का हमका बेगि दिखावो आय ४२ हुकुम पिथौरा का पावनखन डंका तुरत दीन बजवाय ॥ बाजे डंका अहतंका के हाहाकार शब्द गा छाय ४३ सजिसजितोपें खेतन चलिभईं हाथिन होन लागि असवार ॥ झीलमबखतरपहिरी सिपाहिन हाथ म लई ढाल तलवार ४४ दुइ दुइ भाला इक इक बरछी कोउ कोउ बाँधी तीनकटार ॥ वीर तमंचा कड़ाबीन औ गदकागुर्ज लीन त्याहिवार ४५