भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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पृष्ठ 533

[Page Header] ४ आल्हाखण्ड । ५३२

आश हमारी अब तुमहीं लग साँची सुनो कनौजीराय ।. तुम जो जावो ब्रह्मा सँग मा तौ सबकाम सिद्धिहैजाय २२ सुनिकै बातें ये मल्हना की बोले फेरि कनौजीराय ॥ हम चलिजैबे ब्रह्मा सँग मा लैबे विदा मातु करवाय २३ इतना कहिकै लाखनि चलिभे अपनी फौज पहुँचे आय ॥ बाजा डङ्का इत ब्रह्मा का हाहाकार शब्द गा छाय २४ उतै कनौजी लाखनिराना अपनी फौज लीन सजवाय ॥ यह सुधि पाई उदयसिंह जब आये तबै तड़ाकाधाय २५ औ यह बोले लखराना ते मानो कही कनौजीराय ॥ साथी हमरे की ब्रह्मा के जोतुमफौजलीनसजवाय २६ पहिले लड़िकै हमरे सँगमा पाछे धरयो अगारी पाँय ॥ इतना सुनिकै सय्यद् बोले तुम सुनिलेउ कनौजीराय २७ संग न जावो तुम ब्रह्मा के सम्मन यहै ठीक ठहराय ॥ करो लड़ाई तुम ऊदन ते तौ सब जैहैं काज नशाय २८ हितू तुम्हारे नहिं ब्रह्मा हैं जैसे हितू बनाफरराय ॥ कहा मानिकै यह सय्यद् का लाखनि फेंटदीनखुलवाय २६ भई अठारह उरई वाले मोहबे अये तड़ाकाधाय ॥ बड़ बड़ शूरन को सँग लैके ब्रह्मा कूच दीन करवाय ३० सात दिनौना के अरसा माँ दिल्ली गये बँदेलेराय ॥ दिल्ली केरे फिरि ढाँड़े गा लश्कर ब्रह्मा दीन डराय ३१ गड़िगा तम्बू तहँ ब्रह्मा का भारी ध्वजा रहा फहराय ॥ माहिल पहुँचे फिरि दिल्ली मा जहँ पर बैठ पिथौरा राय ३२ बड़ी खातिरी पिरथी कीन्ही अपने पास लीन बैठाय ॥ काहे आये उरई वाले आपन हाल देउ बतलाय ३३