भारतकोश
आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)

Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik

महाकवि जगनिक द्वारा

DevanagariHindipublished618 पृष्ठ

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बेलाकेगौनेकाप्रथमयुद्ध । ५३१ ३ माहिल बोले तब ब्रह्मा ते ठाकुर काह धरावो नाम ॥ पान चबावो तुम दिल्ली का नाहीं उदयसिंह का काम १० जाति कुलीने नहिं ऊदन हैं नहिं विश्वासयोग यहिकाल ॥ इन्हें निकारयो परिमालिक है खोटे देशराज के लाल ११ मतलब इन ते जो रहिहैं ना पिरथी करी बहुत सनमान ॥ अगुवाकारी होयँ बनाफर तौ सब लड़ैं बीर चौहान १२ पान चबावों तुम जल्दी सों देबे बिदा तुरत करवाय ॥ इतना सुनिकै ब्रह्मा चलिभे पहुँचे पाननिकट फिरिआय १३ लै कै बीरा तहँ ऊदनते ब्रह्मा गये तड़ाकाखाय ॥ आल्हा-मनमा कायल द्वैगे ऊदन बहुत गये शरमाय १४ दूनों भाई चले तड़ाका दशहरि पुरै पहुँचे आय ॥ आल्हा बोले तहँ ऊदन ते यह गति भई लछुरवा भाय १५ बड़ बड़ राजन के सम्मुख मा ब्रह्मा लीन्ह्यो पान छिनाय ॥ घटिहा राजा मोहबे वाला कैसी हँसी दीन करवाय १६ तुम नहिं मोहवे ऊदन जावो हट्का रहे लछुरवाभाय ॥ कहा हमारा तुम माना ना ताका पायगयो फलआय १७ इतना कहिकै आल्हा ठाकुर सोये बिकट नींद को पाय ॥ कछू दिनौना के बीते मा गौना समय पहुँचा आय १८ मल्हना निश्चय तब ठहरायो जैहैं नहीं बनाफरराय ॥ बिना बनाफर उदयसिंह के लैहै कौन बिदा करवाय १६ यहै सोचिकै मल्हना रानी लाखनिराना लीन बुलाय ॥ आल्हा ऊदन दुउ रूठे हैं जान्ने आप कन्नौजीराय २० हूँ दिन बाकी नहिं गौना के याकी कौन करी तदबीर ॥ जब सुधि आवै इन बातन की तबहीं होय करेजे पीर २१