आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंचन्दनखम्भाकामंदान । ५६७ ३ भा खलभल्ला औ हल्ला तब लोगन दीन्ह्यो लागलगाय ॥ मुर्चाबन्दी दुहुँ तरफा ते दूनों तरफ बीर समुहाय ११ मारन लागे तलवारी सों दूनों तरफ बरोबरि आय ॥ अपने अपने सब मुर्चनमा ज्वाननदीन्हे ज्वान गिराय १२ औ ललकारैं फिरि फिरि मारैं अद्भुत समर कहा ना जाय ॥ लिहे जँजीरें हाथी मारैं घोड़ा मारैं टाप चलाय १३ दाँतन काटैं फिरि फिरि डाटैं चाटैं रक्त भूत बैताल ॥ मारि लहाशन के भुइँ पाटैं ल्वाटैं समरशूर त्यहिकाल १४ ह्वातैं लागीं तहँ श्वानन की ज्वानन खूब कीन तलवार ॥ मारे मारे तलवारिन के नदिया बही रक्तकी धार १५ मुण्डन केरे मुड़चौरा भे औ रुण्डन के लगे पहार ॥ खट खट खट खट तेगा बोलै ऊना चलै बिलाइतिक्यार १६ भाला बरछी तीर तमंचा कहुँ कहुँ कड़ाबीनकी मार ॥ छुरी कटारी कउ कउ मारैं कउ कउ बीर रहे ललकार १७ कउ मुखफारैं नखन बिदारैं डारैं चीरि फारि मैदान ॥ कोऊ हारै नहिं काहू सों ज्वाननकीन घोर घमसान १८ परशूठाकुर लाखनि दिशि को अंगद नृपतिग्वालियरक्यार ॥ मुर्चाबन्दी भै दूनन कै दूनों लड़न लागि सरदार १६ अंगद मारै तलवारी सों परशू लेय ढालपर वार ॥ परशू मारै तलवारी सों अंगद रोकि लेय त्यहिवार २० बड़ी लड़ाई भै दूननमा दूनन खूब कीन तलवार ॥ वार चूकिगे अंगद राजा परशू मारिदीन त्यहि वार २१ गिरिगा राजा ग्वालियर का आयो बीर भुगन्ता ज्वान ॥ बीर भुगन्ता के मुर्चा मा परशू खूब कीन मैदान २२