आल्हा-खण्ड / परमाल रासो (महाकवि जगनिक - ५२ लड़ाइयों का ऐतिहासिक वीरगाथा महाकाव्य)
Alha-Khand (Parmal Raso) of Mahakavi Jagnik
महाकवि जगनिक द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंभयो सामना फिरि धाँधू का दूनों लड़न लाग सरदार ॥ छोड़ बेंदुला पर ऊदन हैं धाँधू हाथी पर असवार ५९ पैंड़ लगायो रस बेंदुल के हौदा उपर पहुँचा जाय ॥ गुर्ज चलाई तब धाँधू ने ऊदन लैगे वार बचाय ६० ढाल कि औझड़ ऊदन मारी धाँधू गिरे मूर्च्छा खाय ॥ भागो हाथी जब धाँधू का देवी गयो मरहटाआय ६१ औ ललकारा उदयसिंह को ठाकुर खबरदार है जाय ॥ वार हमारी ते बचिहौना जो बिधि आपुबचायै आय६२ इतना कहिकै देवी मरहटा तुरतै खैंचि लीन तलवार ॥ ऐंचि कै मारा बघऊदन के ऊदन लीन ढालपर वार ६३ फिरि ललकारा उदयसिंह ने नाहर होउ तुरत हुशियार ॥ यह कहि मारा तलवारी को देवी जूझिगयो त्यहिबार ६४ जूझिग देवी जब खेतन मा चौंड़ा गरु करै ललकार ॥ लडै चौंड़िया रण खेतनमा दूनों हाथ करै तलवार ६५ मीरासय्यद बनरस वाले येऊ घोर करैं घमसान ॥ कोगति बरणै तहँ देवा कै ठाकुर मैनपुरी चौहान ६६ फिरिफिरि मारै औ ललकारै रणमा कठिन करै तलवार ॥ धूरी हथिनी के हौदा ते राजा कनउज का सरदार ६७ हनि हनि मारै रजपूतन का अद्भुत युद्ध करै त्यहिबार ॥ कोगतिवरणै तहँ धाँधू कै हाथी उपर जवान असवार ६८ करि खलभल्ला औ हल्लाअति दूनों हाथ करै तलवार ॥ लड़ै इकल्ला यहू लल्लाअति ठाकुर उदयसिंह सरदार ६६ बड़ी लड़ाई त्यहि समया भै चन्दन खम्भा के मैदान ॥ ना मुह फेरैं कनउज वाले ना ई दिल्ली के चौहान ७०