भारतकोश
अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj

गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा

DevanagariHindipublished128 पृष्ठ

पृष्ठ 106, कुल 128 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 106

ावबोधस्य ह्युदासीनस्य सर्वतः । सदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकम्प्युपयुज्यते(orएकमप्युपयुज्यते). Yes! एकमप्युपयुज्यते! Wait, is the dot an anusvara or just ? If someone wrote एकमप्युपयुज्यते, with a smudge, or एकम्प्युपयुज्यते. Let's write सदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकम्प्युपयुज्यतेorसदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकमेक...? Wait, look at the dot above : it is right above the right vertical of . That's where an anusvara sits on . So सदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकम्प्युपयुज्यते` is visually what's printed!

*   Next verse:
    `सदा दृष्टिविशेषांश्च विविधान्यासनानि च ।`
    `अन्तःकरणभावश्च योगिनो नोपयोगिनः ॥३८॥`

*   Hindi:
    `सदा दर्शनविशेष अर्थात् निरन्तर विविध प्रकार की दृष्टियों का अभ्यास`
    `( त्राटक आदि ), नाना प्रकार के आसनों का अभ्यास तथा अन्तःकरण भाव`
    `( एकाग्रता का अभ्यास ) ये सब योगी के उपयोगी नहीं हैं ॥ ३८ ॥`