अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
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ावबोधस्य ह्युदासीनस्य सर्वतः । सदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकम्प्युपयुज्यते(orएकमप्युपयुज्यते). Yes! एकमप्युपयुज्यते! Wait, is the dot an anusvara or just म? If someone wrote एकमप्युपयुज्यते, with a smudge, or एकम्प्युपयुज्यते. Let's write सदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकम्प्युपयुज्यतेorसदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकमेक...? Wait, look at the dot above म: it is right above the right vertical of म. That's where an anusvara sits on म. So सदाभ्यासरतस्यैतेष्वेकम्प्युपयुज्यते` is visually what's printed!
* Next verse:
`सदा दृष्टिविशेषांश्च विविधान्यासनानि च ।`
`अन्तःकरणभावश्च योगिनो नोपयोगिनः ॥३८॥`
* Hindi:
`सदा दर्शनविशेष अर्थात् निरन्तर विविध प्रकार की दृष्टियों का अभ्यास`
`( त्राटक आदि ), नाना प्रकार के आसनों का अभ्यास तथा अन्तःकरण भाव`
`( एकाग्रता का अभ्यास ) ये सब योगी के उपयोगी नहीं हैं ॥ ३८ ॥`