अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
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संदर्भ में पढ़ें[ ४ ] फलस्वरूप उस स्थान से गोरक्ष का आविष्कार हुआ। इन्हीं गोरक्ष- नाथ ने मत्स्येन्द्रनाथ का शिष्यत्व ग्रहण किया। बाद में गोरक्ष अपने गुरु के साथ नेपाल गये। वहां अनाहूत होने पर उन्होंने मेघसमूहों को आबद्ध कर अनावृष्टि कर दी। अचानक उस मार्ग पर मत्स्येन्द्र के आने पर गोरक्षनाथ साष्टांग दण्डवत् करने के लिए उठे। मेघ मुक्त हो गये और वहाँ वृष्टि हुई।⁸ उपर्युक्त जन्म सम्बन्धी कथांश में कहीं कहीं महादेव के स्थान पर मत्स्येन्द्रनाथ का नाम मिलता है और पुत्रकांक्षिणी नारी के ब्राह्मणी होने का भी कहीं कहीं उल्लेख मिलता है। उपर्युक्त कथा से दो बातें स्पष्ट होती हैं। पहली तो यह कि गोरक्ष का जन्मवृत्तांत रहस्यमय है। दूसरी यह कि नेपाली परंपरा के अनुसार मत्स्येन्द्र गोरक्ष के गुरु थे। गोरक्षसिद्धान्तसंग्रह के अनु- सार गोरक्ष ईश्वरसन्तान थे। उनका चरित्र अत्यन्त शुद्ध और निर्मल था। स्वयं देवी भगवती उनके चरित्र की परीक्षा लेने में परा- जित हुई थीं।⁹ उनके जन्मस्थान और जीवनवृत्त के विषय में विविध मत प्रचलित हैं। इनका संक्षेप इस प्रकार है। १—नेपाल, पंजाब, गोरखपुर आदि को उनका जन्मस्थान माना जाता है। २—निराकार निरंजन के घर्म से गोरक्ष की उत्पत्ति हुई। ये मत्स्य- जात मत्स्येन्द्र के पिता थे। इन्होंने अपने पाप का प्रक्षालन करने के लिए गुरु का अन्वेषण किया और अन्त में अपने पुत्र का ही गुरु रूप में वरण किया। ३—गोदावरी के तट पर एक ब्राह्मणी के गर्भ से गोरक्ष का जन्म हुआ और बारहवें वर्ष के अन्त में मत्स्येन्द्र द्वारा आंतर्धानिक रीति से संप्रदान हुआ। गोरक्ष ने गोसेवा की और योगशक्ति प्राप्त की। ८. नाथ संप्रदायेर इतिहास दर्शन ओ साधनाप्रणाली—डा० कल्याणी मल्लिक, पृ० २८०; कौलज्ञाननिर्णय—डा० प्रबोधचन्द्र बागची, भूमिका पृ० १२। ६. नाथ संप्रदायेर इतिहास दर्शन ओ साधना प्रणाली—पृ० २६।