अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)

अमनस्क योग (गुरु गोरखनाथ - सहज समाधि, तारक योग एवं मनोलय विज्ञान सटीक)
Amanaska Yoga with Intro by MM Gopinath Kaviraj
गुरु गोरखनाथ (भूमिका: महामहोपाध्याय गोपीनाथ कविराज) द्वारा
DevanagariHindipublished128 पृष्ठ
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स्वयंबोध अमनस्कयोग१ अमनस्कखण्ड२ प्रथमाध्याय३ कैलासशिखरासीनं सर्वज्ञं सर्वगं शिवम्४। वामदेवो मुनिश्रेष्ठः प्रणम्य परिपृच्छति ॥ १ ॥ मुनिश्रेष्ठ वामदेव जी ने कैलास पर्वत के शिखर पर बैठे हुए सर्वज्ञ सर्व- व्यापी भगवान् शिवजी को प्रणाम कर पूछा ॥ १ ॥ वामदेव उवाच- देवदेव महादेव सर्वानुग्रहकारक५ । जीवन्मुक्तिप्रदोपायं कथयस्व मम प्रभो ॥ २ ॥ वामदेव जी ने कहा—सब पर अनुग्रह करनेवाले देवाधिदेव हे महादेव जी ! हे प्रभो ! जीवन्मुक्ति प्रदान करनेवाला उपाय मुझसे कहने की कृपा कीजिये ॥ २ ॥ १. (ख) अमनस्क योगशास्त्र । २. (ख) नहीं है । ३. (ख) नहीं है । ४. (ख) नहीं है । ५. (ख) प्रणम्य शिरसा देवं कृतांजलिरुमापतिम् । जीवन्मुक्तिप्रदोपायं कथयस्वेति पृच्छति ।