भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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श्रीसीतानाथाये नमः

श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गतं—

आनन्दरामायणम्

'ज्योत्स्ना'ऽऽख्यया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्


विलासकाण्डम्

प्रथमः सर्गः

( शिवकृत रामस्तवराज )

विष्णुदास उवाच

गुरो ते श्रोतुमिच्छामि तद्वदस्व सविस्तरम् स्तुतो रामः शिवेनात्र येन रामस्तवेन हि । १ ॥
तं रामस्तवराजं मे विस्तरेण प्रकाशय ।

श्रीशिव उवाच

इति शिष्यवचः श्रुत्वा रामदासोऽब्रवीद्वचः ॥ २ ॥

श्रीरामदास उवाच

सम्यक् पृष्टं त्वया वत्स सावधानमनाः शृणु । प्रोच्यते रामचन्द्रस्यस्तवराजो यथाऽधुना ॥ ३ ॥
यत्परं यद्गुणाधारं यज्ज्योतिर्मलं शिवम् । तदेव परमं तत्त्वंकैवल्यपददायकम् ॥ ४ ॥
श्रीरामेति परं जाप्यं तारकं ब्रह्मसंज्ञितम् । ब्रह्महत्यादिपापघ्नमितिवेदविदो विदुः ॥ ५ ॥
श्रीराम राम रामेति ये वदन्त्यपि सर्वदा । तेषां भुक्तिश्च मुक्तिश्चभविष्यति न संशयः ॥ ६ ॥
स्तवराजः पुरा प्रोक्तः शिवेन परमात्मना । तमहं संप्रवक्ष्यामिहरिध्यानपुरःसरम् ॥ ७ ॥
तापत्रयाऽग्निशमनं सर्वाघौघनिकृन्तनम् । दारिद्र्यदुःखशमनंसर्वसम्पत्प्रदायकम् ॥ ८ ॥

विष्णुदासने कहा—हे गुरो ! मैं यह जानना चाहता हूँ कि शिवजीने किस रामस्तवराजसे रामचन्द्रजीकी स्तुति की थी ॥ १ ॥ कृपा करके आप मुझे वह रामस्तवराज बतला दीजिये । इस तरह अपने शिष्यकी बात सुनकर श्रीरामदासने कहा— ॥ २ ॥ हे वत्स ! तुमने मुझसे बहुत अच्छी बात पूछी है। मैं तुम्हें वह स्तवराज बतलाता हूँ, सावधान होकर सुनो ॥ ३ ॥ जो संसारमें सबसे श्रेष्ठ है, जो सब सद्गुणोंका आधार है, जो एक निर्मल एवं पवित्र ज्योति है, वह ही परम प्रधान तत्त्व है और मोक्षपददायक है ॥ ४ ॥ बड़े-बड़े विद्वानोंका कहना है कि 'श्रीराम' यह सर्वोत्तम तारक मन्त्र है और ब्रह्महत्या प्रभृति महान् पातकोंका नाशक है ॥ ५ ॥ जो सज्जन सर्वदा 'श्रीराम' नामका जप करते हैं, उन्हें जबतक विश्व-व्यापारमें रहते हैं, तबतक सांसारिक भोग मिलते हैं और शरीर त्याग करनेपर मुक्ति मिल जाती है ॥ ६ ॥ जो मैं तुमसे कहनेवाला हूँ, इस स्तवराजको शिवजीने स्वयं मुझसे कहा था। उसीको आज भगवान्का ध्यान करके मैं तुमसे कहूँगा ॥ ७ ॥ यह तीनों (दैहिक, दैविक और भौतिक) तापोंको नष्ट करनेवाला,