श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 265, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ेंश्रीसीतानाथाये नमः
श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गतं—
आनन्दरामायणम्
'ज्योत्स्ना'ऽऽख्यया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्
विलासकाण्डम्
प्रथमः सर्गः
( शिवकृत रामस्तवराज )
विष्णुदास उवाच
गुरो ते श्रोतुमिच्छामि तद्वदस्व सविस्तरम् स्तुतो रामः शिवेनात्र येन रामस्तवेन हि । १ ॥
तं रामस्तवराजं मे विस्तरेण प्रकाशय ।
श्रीशिव उवाच
इति शिष्यवचः श्रुत्वा रामदासोऽब्रवीद्वचः ॥ २ ॥
श्रीरामदास उवाच
| सम्यक् पृष्टं त्वया वत्स सावधानमनाः शृणु । प्रोच्यते रामचन्द्रस्य | स्तवराजो यथाऽधुना ॥ ३ ॥ |
| यत्परं यद्गुणाधारं यज्ज्योतिर्मलं शिवम् । तदेव परमं तत्त्वं | कैवल्यपददायकम् ॥ ४ ॥ |
| श्रीरामेति परं जाप्यं तारकं ब्रह्मसंज्ञितम् । ब्रह्महत्यादिपापघ्नमिति | वेदविदो विदुः ॥ ५ ॥ |
| श्रीराम राम रामेति ये वदन्त्यपि सर्वदा । तेषां भुक्तिश्च मुक्तिश्च | भविष्यति न संशयः ॥ ६ ॥ |
| स्तवराजः पुरा प्रोक्तः शिवेन परमात्मना । तमहं संप्रवक्ष्यामि | हरिध्यानपुरःसरम् ॥ ७ ॥ |
| तापत्रयाऽग्निशमनं सर्वाघौघनिकृन्तनम् । दारिद्र्यदुःखशमनं | सर्वसम्पत्प्रदायकम् ॥ ८ ॥ |
विष्णुदासने कहा—हे गुरो ! मैं यह जानना चाहता हूँ कि शिवजीने किस रामस्तवराजसे रामचन्द्रजीकी स्तुति की थी ॥ १ ॥ कृपा करके आप मुझे वह रामस्तवराज बतला दीजिये । इस तरह अपने शिष्यकी बात सुनकर श्रीरामदासने कहा— ॥ २ ॥ हे वत्स ! तुमने मुझसे बहुत अच्छी बात पूछी है। मैं तुम्हें वह स्तवराज बतलाता हूँ, सावधान होकर सुनो ॥ ३ ॥ जो संसारमें सबसे श्रेष्ठ है, जो सब सद्गुणोंका आधार है, जो एक निर्मल एवं पवित्र ज्योति है, वह ही परम प्रधान तत्त्व है और मोक्षपददायक है ॥ ४ ॥ बड़े-बड़े विद्वानोंका कहना है कि 'श्रीराम' यह सर्वोत्तम तारक मन्त्र है और ब्रह्महत्या प्रभृति महान् पातकोंका नाशक है ॥ ५ ॥ जो सज्जन सर्वदा 'श्रीराम' नामका जप करते हैं, उन्हें जबतक विश्व-व्यापारमें रहते हैं, तबतक सांसारिक भोग मिलते हैं और शरीर त्याग करनेपर मुक्ति मिल जाती है ॥ ६ ॥ जो मैं तुमसे कहनेवाला हूँ, इस स्तवराजको शिवजीने स्वयं मुझसे कहा था। उसीको आज भगवान्का ध्यान करके मैं तुमसे कहूँगा ॥ ७ ॥ यह तीनों (दैहिक, दैविक और भौतिक) तापोंको नष्ट करनेवाला,