भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 282
२७६आनन्दरामायणे[ सर्गः ४

इत्युक्त्वा राघवः सीतां पर्यङ्के रत्नमण्डिते । सुष्वाप सीतया रात्रीं दामीभिर्वीजितः सुखम् ॥८२॥
इति श्रीमत्परमहंसपरिव्राजकाचार्य श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये विलासकाण्डे देहरामायणं नाम तृतीयः सर्गः ॥ ३ ॥


चतुर्थः सर्गः

( सीताके विविध अलङ्कारोंका वर्णन )

श्रीरामदास उवाच
चतुर्थावशिष्टायां निशायां रघुपायकम् । उत्थोत्थानार्थं सन्नाहा रणित्राद्यबहिःस्थिताः ॥ १ ॥
वन्दिनो मागधाः सूता नर्त्तक्यश्च नटादयः । वादयामासुर्वाद्यानि ननृतुश्चाप्सरोगणाः ॥ २ ॥
जगुरुच्चैर्गीतानि स्तोत्राणि विविधानि च । प्रभातिकीं स्तुतिं प्रोचुः कलकण्ठैर्मनोरमैः ॥ ३ ॥
विघ्नेश्वरः सकलविघ्नविनाशदक्षो दक्षस्त्वजा भगवती हि सरस्वती च
दृष्टाष्टभैरवगणा नव दिव्यदुर्गा देव्यः सुशम्भु नृपते तव सुप्रभातम् ४॥
भानुः शशी क्षितिसुतो बुधशुक्रमन्दा राहूः सकेतुरदितिर्दितिराजितेयाः
शक्रादयः कमलभूः पुरुषोत्तमेन्द्रो, रुद्रः करोतु सततं तव सुप्रभातम् ५॥
पृथ्वी जलं ज्वलनमारुतपुष्कराणि सप्ताद्रवोऽपि भुवनानि चतुर्दशैवं ।
शैला वनानि सरितः परितः पवित्रा गङ्गादयो विदधतां तव सुप्रभातम् । ६ ।।
दिक्संक्रमं तदखिलं दिग्गभा दिगीशा नागाः सुपर्णभुजगा नगरोश्चवृक्षा ।
पुण्यानि देवसदनानि बिलानि दिव्यान्यप्याहतं विदधतां तव सुप्रभातम् ॥ ७॥
वेदाः षडङ्गमहिताः स्मृतयः पुराणं काव्यं मदागमपथो मुनयोऽपि दिव्याः।
व्यासादयः परमलारुणिका ऋषीणां गात्राणि वै विदधतां तव सुप्रभातम् ॥ ८॥


चंडालका निचाड मैंने तुम्हें बतला दिया। यह देहरामायण मुक्ति तथा मुक्ति दोनों का फल देनेवाला है ॥ ८१ ॥ इतना कहकर रामचंद्रजी सीताके साथ रत्नजटित पलङ्गपर सो गए और दासियाँ पंखा झलने लगीं ॥ ८२ ॥
इति श्रीमत्कोविदानन्दघनजीवन श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये पद गम्भीरस्वादविदितज्ञ'ज्योत्स्ना'-मराठीटीकासमन्विते विलासकाण्डे तृतीयः सर्गः ॥ ३ ॥

श्रीरामदासजी कहने लगे — जब चार घड़ी रात बाकी रह जाती थी, तभी भगवान्‌को जगानेके लिए बंदीजन, मागध, सूत, नाचनेवाली वेश्यायें और नट आदि लोग रनिवासके बाहर आकर बाजे बजाते थे और नर्तकियां नाचती थीं ॥ १ ॥ २ । अन्य लोग सामङ्ग-गायन विविध प्रकारके स्तोत्र व उनका अपने कोमल कण्ठसे प्रातःकालकी स्तुतियां किया करते थे। वे कहते थे ॥ ३ हे नृपते ! समस्त विघ्नसमुहको नष्ट करनेमें निपुण विघ्नेश्वर (गणेशजी), दक्षकन्या भगवती पार्वती, सरस्वती, अभिमानकी मूर्ति अष्टभैरव-गण, नौ दिव्य दुर्गायें तथा अगणित देवतागण ये सब आपका प्रभात मङ्गलमय करें ॥ ४ । सूर्य, चंद्रमा, मङ्गल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि, राहु, केतु, दिति तथा आदितिके पुत्र इंद्रादि देवता, ब्रह्मा, विष्णु और महेश ये सब आपका प्रभात मङ्गलमय करें । ५ । पृथ्वी, जल, अग्नि, वायु, तड़ाग, सप्त पर्वत, चतुर्दश भुवन, शैल, वन और भुवनविख्यात गङ्गा आदि नदियां आपका प्रभात मङ्गलप्रद करें ॥ ६ । समस्त दिक्‌चक्र (दसों दिशाएँ), दिग्गज, दिक्पाल, नाग, सुपर्ण, पर्वतके लतातें, पवित्र देवायतन और गिरिकन्दराएँ, ये सब सर्वदा आपका प्रभात मङ्गलमय करें ॥ ७ । षडङ्ग सहित चारों वेद, स्मृति, पुराण, काव्य, अच्छे अच्छे मताय, ब्राह्मण आदि ग्रन्थ, व्यास आदि दिव्य मुनिगण तथा ऋषियोंके गात्र आपका प्रभात मङ्गलमय करें । ८ ॥