भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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सर्गः ८ ] जन्मकाण्डम् १२९


भविष्यति समस्तं हि वृत्तं शालकयोः शुभम् । ततो मन्त्री मुनेर्वाक्यं राघवाय न्यवेदयत् ॥१३९॥
कुशं लवं समाहूय वाल्मीकिरपि तौ मुदा । समालिङ्ग्य कथाभिस्तां निनाय रजनीं सुखम् ॥१४०॥

इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये जन्मकाण्डे
कुशलवयोः पराक्रमवर्णनं नाम सप्तमः सर्गः ॥ ७ ॥


अष्टमः सर्गः

( रामका सीताको पुनः स्वीकार करना )
श्रीरामदास उवाच

अथ प्रभाते रामेण समाहूतावुभौ शिशू । नत्वा मुनिं मातरञ्च सभायां जग्मतुर्मुदा ॥ १ ॥
वाल्मीकेराज्ञया बालौ जटाकृष्णाजिनाम्बरौ । जन्मकाण्डं त्वेकमेव जग्रतुस्तौ पितुः पुरः ॥ २ ॥
जनैः श्रुत्वा स्वचरितं रामोऽभूदतिविस्मितः ॥ ३ ।
आसन् जनाश्चापि सर्वे विस्मयाविष्टमानसाः । ज्ञात्वा सीताकुमारौ तौ सन्तोषं परमं ययुः ॥ ४ ॥
एतस्मिन्नन्तरे सर्वे लवबाणस्वरूपीडिताः । शत्रुघ्नाद्या ययुस्तत्र यानस्थाश्चाप्तजीविताः ॥ ५ ॥
अंगदाद्याः पार्थिवाश्च मोहनास्त्रैकजीविताः । ययुः सवानराः सर्वे लक्ष्मणोऽपि ययावरुक् ॥ ६ ॥
सर्वे नत्वा रामचन्द्रं तस्थुश्चास्थांतिके मुदा । अथ समाप्य रामोऽपि तौ विसृज्यादरेण हि ॥ ७ ॥
राक्षसेंद्रं लक्ष्मणं च शत्रुघ्नं मकरध्वजम् । खगराजं सुषेणं च जांबवन्तं वचोऽब्रवीत् ॥ ८॥
आनयध्वं मुनिवरं समीतं देवममितम् । अद्यास्तु पर्षदां मध्ये प्रत्ययो वै सभांगणे ॥ ९ ॥
गंगाया दक्षिणे तीरे सभा कार्याऽऽयता शुभा । करोतु शपथं सीता ममाग्रे जाह्नवीतटे ॥१०॥
मुनीश्वराद्याः सर्वे तां जानन्तु गतकल्मषाम् । तथा ममापि वाल्मीके शुद्धिं जानंतु देवताः ॥११॥


जब सभामें ये दोनों रामायण गाने पहुंचेंगे, उस समय सारा वृत्तान्त ज्ञात हो जायगा । १३८ ॥ तदनुसार मंत्री लौट आया और बाल्मीकिने जो कुछ कहा था, सो रामको बतला दिया । उधर वाल्मीकिने लव और कुशको पास बुलाकर हृदयसे लगाया और अनेक प्रकारकी कहानियां कहते हुए रात बितायी ॥ १३९ ॥ १४० ॥ इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे पं० रामतेजपाण्डेयकृत-'ज्योतिष्मती'भाषाटीकासहिते जन्मकाण्डे सप्तमः सर्गः ॥ ७ ॥

श्रीरामदास बोले-दूसरे दिन सबेरे रामने उन दोनों बालकोंको बुलवाया और वे अपनी माता तथा मुनि वाल्मीकिको प्रणाम करके रामकी सभामें गये ॥ १ ॥ जटा एवं वल्कल वस्त्र धारण किये हुए उन बच्चोंने उस दिन वाल्मीकिके आज्ञानुसार केवल जन्मकाण्डका गान किया । २ ॥ रामने जब अपना चरित्र सुना तो बड़े विस्मित हुए । सभामे बैठे हुए लोगोको भी बड़ा आश्चर्य हुआ और जब यह जाना कि ये सीताके बेटे हैं तो बहुत ही प्रसन्न हुए । ३ ॥ ४॥ उसी समय लवके बाणोंसे पीड़ित लक्ष्मण-शत्रुघ्न आदि भी वहाँ आ पहुंचे । उनके साथ अङ्गद-हनुमान् आदि जो लवके मोहनास्त्रसे मूर्च्छित हो गये थे, वे भी आये। वहाँपर सबान रामको प्रणाम किया और उनके समीप जाकर बैठ गये । तब रामने अपने मंत्रियोंसे सलाह करके लव कुशको विदा कर दिया ॥ ५-७ ॥ तदनन्तर विभीषण, लक्ष्मण, शत्रुघ्न, मकरध्वज तथा अङ्गदको सम्बोधित करके राम बोले-तुम सब जाकर बाल्मीकिके साथ सीताको यहाँ ले आओ। आज इस सभामे यह निश्चय किया जायगा कि सीता-का क्या अपराध है। इसी पुनीत जाह्नवीके तटपर सीता शपथ खायगी । यहाँपर आये हुए समस्त ऋषिगण जिससे यह समझ जायें कि सीता सर्वथा निष्कलंक तथा पापोंसे रहित है। साथ ही हमारो ओरसे बाल्मीकिकी भी परीक्षा होगी । इस प्रकार रामके आज्ञानुसार लक्ष्मणादि वाल्मीकिके पास गये और उन्होंने