भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 364

३४८ आनन्दरामायणे [ सर्गः १

काचित्पक्त्वा भोजनं तु काचित्पाकस्य मञ्चिकाम् । काचिन्मज्जयतीदन्ता मुक्तकेशा ययौ जवात् ॥४६॥ स्तनालिंगिता काचित्क्षिप्त्वोपस्थने कन्दू । ययौ वेगेन ललना वस्त्राणामवलम्बकम् ॥४७॥ क्षालयन्ती पतेः पादमेकं प्रक्षाल्य भामिनी । पादमन्यङ्गलङ्गां तु नावच्छुन्द्रा मवागमत् ॥४८। मीनना गमनेन्द्रं हि शीघ्रं दृष्टार मा तदा । काचिद्दर्शो नुग्रथनान् दूरं कृत्वा पतेर्मुखम् ॥४९॥ ददर्श गच्छं दृष्टुं प्रासादे घस्तयहृष्टा । काचिद्विनिद्रिताऽऽरात्री व्यक्त्वा निद्रां तरान्विता ५०॥ विस्मृतार्धवसना मन्दान्ध्रा निद्राशणान्विता । नेकभ्यां कुचितन् केशान् यपयन्ती तदाशयौ ॥५१॥ त्यक्त्वाऽऽख्यां द्विकाञ्चित्पा कुर्वन्तं कर्माणिधिप । ययौ वेगेन प्रासादं श्रुत्वा राघवमागतम् ॥५२॥ काचिदङ्गेऽनुलेपी मा कुर्वती चापरे भुजे । कर्तुकामा ययौ शीघ्रं तथैव प्रमदोत्तमा ॥५३। काचिदेके पदे कृत्वा नूपुरंऽदानि भामिनी । अपरे कर्तुकामा सा तथैवाट्टाहमारुह्यौ ॥५४। कथयन्ती शुभां वार्ता सपत्न्युः पुरतः स्थिता । श्रुत्वा रामे ममायान्तं दृष्ट्वान गजगामिनी ॥५५॥ क तभिजपति पात्रे कुर्वन्ती पक्वरूपकम् ।भूमौ त्यक्त्वाऽऽद्रवात्र मा ययौ रामं निरीक्षितुम्॥५६॥ काचिन्स्नात्वा द्विज्यवस्था कुर्वन्ती म प्रदक्षिणा । तुलसीं च महादेवं श्रुत्वा रामं ययौ जवात् ॥५७॥ काचिद्रज्जुयन्त्र कूपे कच्वा तोयाद्यमुद्यता । त्यक्त्वा रज्जुघटं कूपे दृष्टावेदुनिभानना ॥५८॥ काचिन्मज्जयन्ती स्तन्यं गृह. पालयन्ती वधः कुचरोवालकं श्रुत्वा तथैव सा ययौ जवात् ॥५९॥ काचिन्मा परिधायाथ वस्त्रं कच्छं करोम सा । कुरुक्रमा ययौ वेगातन्देवाढुलवस्त्रकम् ॥६०॥ एवं कर्माप्यनेकानि कुर्वन्त्यस्ताः पुरस्त्रियः । विक्षिप्य गलि नत्वानि ययौ गमं निरीक्षितुम् ॥६१॥ दृष्ट्वा रामं गजस्थं ता ववृषुः पुष्पवृष्टिभिः । ऊचुः परस्परं नार्यः शश्वोऽट्टालमस्थिताः ॥६२॥ धन्या सा रामजननी कौमल्या या रघूत्तमम् । सुपुवे गजराजानं पश्चिणेणनीरुथा । ६३॥

भोजन करती थीं और कोई भोजन बना रही थी या उसकी अज्ञा तक छोड़के भागी। कोई बालको संभार रही थी, वह बेशक हाथम याते ही दौड़ पड़ा। किमोका पति आलिंगन कर रहा था। इतनेमें रघूका आगमन सुना तो स्वाभाविक हाव लिङ्गनकर दौड़ आयें। कोई अपने पतिके पैर धो रही थी, उसने एक पैर धोकर डमग पगता हुआ था कि उसे खबर लगी कि संगके सहित राम आ रहे हैं, वह तुरन्त उठकर प्रासादपर चढ़ गयी। कोई पतिके साथ शय्यापर सोती थी ॥४४-५०॥ इससे उसको आंखोका काजल मुँहपरमे पुछ गया यह भी यह समाचार पाने ही झरोखे सम्मुखवाले भागको इटाती हुई दौड़ी ॥५१॥ कोई उबटन लगा रही थी, वह एक हाथसे साडी सम्हालता हुई दौड़ पड़ी किणका पति कामोन्मत्त होकर आलिंगन करता बजता था। वह भी एक हाथमें सांडी सम्हालते हुई चली आयी। ॥५१॥ ५३। कोई कामिनं नूपुर पहिन रही थी। वह कनल एक ही पैरम उसे पहनकर भरना संभालकर दौड़ पडी ॥५४॥ कोई पतिस वात कर रही थी, वह जहाँतक बात कर चुकी थी वहीं हा छोड़कर दौड़ आयी ॥ ५५। कोई पतिके लिए भोजन बना रही थी, वह भी पाथको व्योका त्यों छोड़कर रामको देखने लिए दौड़ पडी ॥ ५६ । कोई स्नान करके तुलसी तथा महादेवकी प्रदक्षिणा कर रही था वह भी रामका आगमन सुनकर उसे अधूरा ही छोड़कर भाग चली। ५७। कोई चण्डयूरा रस्सी बांधकर पानी भरने गयी थी, वह रस्सा और घड़ा कूपमे ही फेककर चल पडी ॥५८॥ कोई बालकत स्तन्यपान करा रही थी, वह बालकका प्रिये हुए ही दौड़ आयी ॥ ५९ कोई भोजन अधिक कामीम निवृत्तकर अट्ट पर जाना चाहती थी, वह माधे काछ पहने हुए ही चली आयी ॥६०॥ इस प्रकार अनेक तरहके काम को करतो हुई स्त्रियां अपना अपना काम छोड़कर रामके दर्शनके लिए छज्जे और हटापर आ खड़ी हुई ॥ ६१॥ हाथीपर बैठे हुए रामको देखकर स्त्रियां उनपर फूलोंकी वर्षा करती हुई आपसमे इस प्रकार बाते करती थी-॥६२। रामकी माता कौशल्या धन्य