श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 408, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें| ३९२ | आनन्दरामायणे | [ सर्गः २ |
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मन्त्रात्मकमिदं सर्वं व्याख्यातं सर्वमंगलम् । उक्तानि तव पुत्रेण विघ्नराजेन धीमता ॥१६६॥ सनत्कुमाराय पुरा तान्युक्तानि मया तव । यः पठेच्छृणुयाद्वापि स तु ब्रह्मपदं लभेत् ॥१६७॥ तावदेव बलं तेषां महापातकदन्तिनाम् । यावन्न श्रूयते रामनामरूपंचाननध्वनिः ॥१६८॥ ब्रह्मघ्नश्च सुरापश्च स्तेयी च गुरुतल्पगः । शरणागतघाती च मित्रविश्वासघातकः ॥१६९॥ मातृहा पितृहा चैव भ्रूणहा वीरहा तथा । कोटिकोटिमहत्पापि क्षुद्रपापानि यान्यपि १७०॥ संवत्सरं क्रमाज्जप्त्वा प्रत्यहं रामसन्निधौ निष्कण्टकं सुखं भुक्त्वा ततो मोक्षमवाप्नुयात् ॥१७१॥
सूत उवाच
एवं शौनक पार्वत्यै रामनामसहस्रकम् यथा शिवेन कथितं मया तेऽद्य निवेदितम् ॥१७२॥
श्रीरामदास उवाच
यथा शिष्य त्वया पृष्टं रामनामसहस्रकम् तन्मयोक्तं सविस्तरं मया तेऽद्य निवेदितम् । १७३॥ अनेन गर्म सदसि नारदः स्तुतवान्मुनिः । रामनामसहस्रेण भुक्तिमुक्तिप्रदेन च ॥१७४। श्रीरामनाम्नां परमं सहस्रकं पापापहं सौख्यविवृद्धिकारकम् भवापहं भक्तजनैकपालकं स्त्रीपुत्रपौत्रप्रदमृद्धिदायकम् ॥१७५।
इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये राज्यकाण्डे पूर्वार्द्धे रामसहस्रनामकथनं नाम प्रथमः सर्गः ॥ १ ॥
द्वितीयः सर्गः
( कल्पवृक्ष और पारिजातके पृथ्वीपर आनेका कारण )
विष्णुदास उवाच
गुरो त्वया रामनामसहस्रं राघवस्य च ध्यानं कल्पतरोर्मूले कथितं स्वर्णपीठके ॥ १ ॥
सिद्धिर्योंका करनेवाला और मुक्ति-मुक्तिका दाता है। हे पार्वति ! मैंने अभी जो सहस्रनाम तुम्हें बतलाया है, यह मन्त्रात्मक और सर्वमंगलकारक है। इसे तुम्हारे पुत्र गणेशजीने स्वयं सनत्कुमारको बतलाया था उसे मैंने आज तुमसे कहा है। जो कोई इस सहस्रनामको पढ़ता और सुनता है, उसे ब्रह्मपद प्राप्त होता है॥ १६४-१६७ ॥ महापातकरूपी मत्तवाले हाथियोंका बल तभी तक रहता है, जब तक रामनामरूपी पंचानन (सिंह) की गर्जना नहीं सुनायी देती । १६८ ॥ जो मनुष्य ब्रह्महत्यारा, मद्यप गुरुकी शय्यापर शयन करनेवाला तथा चोर हो। जो शरणागतको मारनेवाला, मित्रके साथ विश्वासघात करनेवाला, माता पिता, भ्रूण (गर्भस्थ संतान) तथा वीर मनुष्यकी हत्या करनेवाला हो तथा जिसने संसारमें करोड़ों पाप किये हों, वह भी यदि श्रीरामके पास बैठकर एक संवत्सर पर्यन्त प्रतिदिन इस स्तोत्रका पाठ करे तो संसारम निष्कंटक सुख भोगकर अन्तमे मोक्ष पाता है । १६९ ॥ १७० सूतजी बोले हे शौनक ! शिवजीने पार्वतीको जिस प्रकार रामका सहस्रनाम सुनाया था वही मैंने आज तुम्हे बताया है । १७१ । श्रीरामदासने कहा - हे शिष्य ! जैसे तुमने हमसे रामका सहस्रनाम पूछा वैसे मैंने तुम्हे बतलाया। उसी सहस्रनामसे नारदने सभामे रामजीकी स्तुति की थी। क्योंकि यह स्तोत्र भुक्ति-मुक्ति सब कुछ देनेवाला है। १७२-१७४। यह रामका सहस्रनाम पापोंका नाशक, सौख्यवर्द्धक, सांसारिक पापोंका नाशक भक्तजनोंका पालक और स्त्री-पुत्र-पौत्र तथा सम्पत्तिका देनेवाला है। १७५॥ इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे पं० रामतेज-पाण्डेयविरचित 'ज्योत्स्ना' भाषाटीकासहिते राज्यकाण्डे पूर्वार्द्धे प्रथमः सर्ग ॥ १ ॥
श्रीविष्णुदासने कहा- हे गुरो ! आपने रामका सहस्रनाम बताते समय कहा था कि कल्पवृक्षके नीचे