श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 444, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें४२८ आनन्दरामायणे [ सर्गः ७
अवनीं जेतुमुद्युक्तो मुहूर्त्तं तानपृच्छत। तत्तूर्तेर्गर्गकैर्दत्तो मुहूर्त्तः परमः शुभः ॥११४॥ तं श्रुत्वा तान् पुनः पूज्य सर्वान् रामो व्यसर्जयत् । ततो रामोऽब्रवीद्वाक्यं लक्ष्मणं पुनः स्थितम् ॥११५॥ अवनिस्थाञ्छत्रून् जेतुं साङ्गं गच्छासि पाथिवैः । विमानेनैव गच्छामि सेनां चोदय सत्वरम् ॥११६॥ नानास्त्राणि यन्त्राणि वाहनानि समन्ततः । स्थापयस्व विमानेऽद्य सनथ्यः शतशो नराः ॥११७॥ धनधान्यतृणादीनां संग्रहं कुरु पुष्पक । पुरीं गोप्तुं सुमन्त्रोऽस्तु सैन्येन परिवेष्टितः ॥११८॥ एवमाज्ञाप्य सौमित्रिं श्रीरामो जानकीगृहम् । ययौ चकार सौमित्रिर्यथा रामेण शिक्षितः ॥११९॥
इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे वाल्मीकीये राज्यकाण्डे पूर्वार्द्धे राज्यविभागो नाम षष्ठः सर्गः ॥ ६ ॥
सप्तमः सर्गः
( रामकी मारत्तवर्षपर विजय )
श्रीरामदास उवाच
अथ रामो रहः सीतां स्त्रोद्योगमवदच्छनैः । अवनिस्थाञ्छत्रून् जेतुं पुत्राभ्यां बन्धुभिर्नृपैः ॥ १ ॥ तद्रामवचनं श्रुत्वा जानकी प्राह लज्जिता । न हि त्वद्विरहं सोढुं समर्था रघुनन्दन ॥ २ ॥ त्वयाऽहमवनीं द्रष्टुं यास्यामि जगतां प्रभो । तथेत्युक्त्वा रघुश्रेष्ठो लालयामास जानकीम् ॥ ३ ॥ एतस्मिन्नन्तरे सद्यो ह्युर्मिलाद्याः स्त्रियश्च ताः । कुशस्य च लवस्यापि पत्न्यः श्रुत्वाऽवनेर्जयम् ॥ ४ ॥ कर्तुं रामसमुद्योगं पुत्राभ्यां बन्धुभिर्नृपैः । जानकीं प्रार्थयामासुर्यास्यामोऽद्य त्वया सह ॥ ५ ॥ स्वस्वकांतवियोगं च सोढुं नैव क्षमा वयम् । सीता तासां वचः श्रुत्वा राघव श्राम्य तद्वचः ॥ ६ ॥
शत्रुओंको परास्त करके मजाश्वपुरमें शत्रुहन्ता तथा वनस्थलपुरमें चित्रकेतुको बिठाल दिया और वहाँसे लौट-कर लक्ष्मण फिर रामकी सेवामें लग गये । इसके अनन्तर रामने ज्योतिषियोंको बुलाकर उनकी पूजा की और पृथ्वीविजय करनेके लिए शुभ मुहूर्त पूछा । उन गणकोंने भी रामको बहुत ही बढ़िया मुहूर्त बताया ॥ १११-११४ ॥ मुहूर्त सुनकर रामने फिर उनकी पूजा की और विदा कर दिया फिर रामने लक्ष्मणसे कहा-मैं पृथ्वीपर रहनेवाले समस्त गजाओंको जीतनेके लिए विमानसे यात्रा करूँगा । तुम जाकर सेनाको तैयार करके भजो । विविध प्रकारके अस्त्र-शस्त्र और सकड़ांको संख्याम अच्छी-अच्छी तोपें लेकर मेरे विमानमें रखवाओ । खर्चके लिए धन धान्य तथा घास आदिका ठीकसे प्रबन्ध करके पुष्पक विमानमें रखवा दो । अयोध्यापुरीकी रक्षा के लिए कुछ सेनाके साथ सुमन्त्र यहींपर ही छोड़ दिये जायेंगे ॥ ११५ ॥ ॥ ११६ ॥ इस प्रकार आज्ञा देकर राम अपने रनिवासम चले गये और लक्ष्मण रामके आज्ञानुसार सेना आदिकी तैयारीमें लग गये ॥ ११७-११९ ॥ इति श्रीशतकोटिरामचरितान्तर्गते श्रीमदानन्दरामायणे पं० रामतेज-पाण्डेयविरचित'ज्योत्स्ना'भाषाटीकासमन्विते राज्यकांडे पूर्वार्द्धे षष्ठः सर्ग ॥ ६ ॥
श्रीरामदास फिर कहने लगे-इसके पश्चात् राम एकान्तमे सीतासे बोले कि मै अपने पुत्रों तथा बान्धवों-को साथ लेकर पृथ्वीके राजाओंको जीतनेके लिए जाऊंगा । इस प्रकारकी बात सुनी तो लज्जित होकर सीताने रामसे कहा-हे रघुनन्दन मै आपका विरह नहीं सहन कर सकूँगी । मैं भी इस पृथ्वीतलको देखनेके लिए आपके साथ-साथ चलूँगी । रामने सीताकी मांग स्वीकार कर ली ॥१-३॥ यह खबर धर-धारे उर्मिलादिका स्त्रियो तथा कुश लव आदिकी पत्नियोंके पास पहुंची और उन्होने सीतासे प्रार्थना की कि आप हमको भी अपने साथ ले चलें । हम भी अपने-अपने पतियोंका वियोग सहन करनेमे असमर्थ हैं । सीताने उनकी बातें सुनीं तो रामसे