भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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सर्गः ७ ] राज्यकाण्डम् ( पूर्वार्द्धम् ) ४२९

रामाज्ञया तदा सर्वांस्तोषयन्ती वचोऽब्रवीत् । आगन्तव्यं मया साकं युष्माभिश्च न संशयः ॥ ७ ॥ गच्छध्वं स्वस्वगेहानि सर्वास्तूर्णं समज्ज्वलाः । एवं सीतावचः श्रुत्वा ताः सर्वाः कमलोचनाः ॥ ८ ॥ सीतां नत्वा ययुः सर्वाः सन्तुष्टा मुदिताननाः । स्वस्वगेहानि वेगेन रूपवत्पुत्रसंस्तुताः ९ । अथ रामस्तु तां रात्रिं निनाय सीतया सुखम् । ब्राह्मे मुहूर्त्ते श्रुत्वा स वन्दिगीतं मनीषिणाम् १०॥ रामः प्रबुद्धस्तु जपात्कृतशौचादिकक्रियः । स्नात्वा नित्यविधिं कृत्वा कृत्वा शम्भोः प्रपूजनम् ११॥ कथां पौराणिकीं श्रुत्वा दत्त्वा दानान्यनेकशः । कृत्वोद्योगविधिं च संस्तूय गणनायकम् ॥१२॥ कृत्वाऽभ्युदयिकं श्राद्धं घृतश्राद्धं यतिव्रतम् । कामधेनुं कल्पवृक्षं पुष्पकं च सुरद्रुमम् ॥१३॥ मणिद्वयं पृथक्पूज्य सर्वाः कृत्वा तु भोजनम् । धृत्वा वस्त्राणि शस्त्राणि बहुधा मातृः प्रणम्य च ॥१४॥ ययौ स शिविकारूढः पुष्पकं बन्धुभिर्वृतः । पुरोऽग्र्याः सचिवैः सैन्यैः सेवकैर्ज्ञातिभिः सह ॥१५॥ यानमारुरुहुः सर्वाः सीताद्यास्ताः स्त्रियः शुभाः ॥१६॥ कौसल्याद्या मातरश्च सम्पूर्णा न यथासुखम् । यात्राकाण्डे यथा शिष्य विमानरचना पुरा ॥१७॥ ते वर्णिता मया तद्वदधुनाऽऽवां शृणुष्व पुनः । तदा निनेदुर्वादित्राणि तूर्यमृदङ्गकादयः ॥१८॥ ननृतुर्वारनार्य्यश्च नटा गानं प्रचक्रिरे । अथ रामोऽब्रवीद्यानं गच्छ पूर्वदिशं शनैः ॥१९॥ तथेत्युक्त्वा पुष्पकं तद्ययावाकाशवर्त्मना । नत्वा रामं सुसम्प्राप नगर्य्यां गुहकं यथासुखम् ॥२०॥ पूर्वदेशे नृपाः सर्वे श्रुत्वा रामं समागतम् । प्रत्युज्जग्मुः राघवेंद्रं प्रबद्धकरसम्पुटाः ॥२१॥ प्रणेमुस्ते रमानाथं नानोपायनपाणयः । पूजयित्वा श्रीरामं नीत्वा राज्यं निजं निजम् ॥२२॥ रामाज्ञया सर्वन्गाय सम्पूर्णानि नृपोत्तमाः । स्वकोशादीनि रामाय समर्प्य स्थिरमानसाः ॥२३॥ मागधान् समतिक्रम्य विमानेन रघूत्तमः । पश्यन्नानाविधान् देशान्भूर्तिकीर्तेः पुरं ययौ ॥२४॥


सलाह की। फिर रामके आज्ञानुसार सीता सबको प्रसन्न करती हुई कहने लगी—तुमलोग भी मेरे साथ चलो। अब कोई चिन्ता मत करो और अपने अपने महलोंमें जाकर हमारे साथ चलनेकी तैयारी करो। इस तरह सीताकी बात सुनकर कमल सदृश नेत्रोंवाली उन स्त्रियोंने सीताको प्रणाम किया और प्रसन्नतापूर्वक सुन्दरत्न नूपुरोंका झंकार करती हुई अपने महलोंको चली गयीं ॥ ६-८ ॥ तदनन्तर रामने सीताके साथ वह रात्रि सुखपूर्वक बितायी। ब्राह्म मुहूर्त्तमें उन्होंने बन्दीजनोंके मुखसे स्तुति सुनी। तब शीघ्र शौचादि क्रियायों की और स्नानादि नित्यकर्म करके पश्चात् शिवजीका विधिवत् पूजन किया ॥ १० । ११ ॥ बादमें पौराणिकी कथाएं सुनीं, अनेक प्रकारके दान दिये और अनेक उत्सव शिव गणनादि का पूजा की ॥ १२ ॥ तब आभ्युदयिक श्राद्ध तथा घृतश्राद्ध करके कामधेनु, कल्पवृक्ष, पुष्पक, पारिजात वृक्ष तथा दोनों मणियोंका पूजन किया। इसके बाद अपनी समस्त माताओंको प्रणाम करके बहुमूल्य अनेक प्रकारके वस्त्र बांटे और बन्धुओं तथा कितने ही राजाओंके साथ पालकीपर सवार होकर पुष्पक विमानके पास जा पहुंचे ॥ १३-१५ ॥ वहीं अपने पुत्रों, मन्त्रियों, सेनाओं, सेवकों तथा कहनों समेत बहुत-सी सीतादि स्त्रियां और कौशल्यादि माताएं सवार हुईं। रामदासने कहा- हे शिष्य ! यात्राकाण्ड प्रथम में जिस प्रकार यानकी रचना कह आया हूँ ॥ १६ ॥ १७ ॥ ठीक उसी तरह इस यानका भी रचना था। उनकी यात्राके समय अनेक प्रकारके बाजे बजे और मगध तथा बन्दीजनोंने स्तुति की, वेश्यायें नाचीं और गायकोंने गान गाये। इसके अनन्तर रामने विमानको पूर्व दिशाकी ओर चलनेकी आज्ञा दी ॥ १८ । १९ ॥ सब पुष्पक रामके आज्ञानुसार आकाशमार्गसे उड़ता हुआ चला। रामको प्रणाम करके सुमुख म... पूर्व दिशामें आनन्दपूर्वक रहने लगे ॥ २० ॥ जब पूर्व देशके लोगोंने सुना कि राम आये हैं तो बहुतके बड़े-बड़े राजे हाथ जोड़कर उनके पास गये ॥ २१ ॥ सामन्त पहुंचकर उन्होंने भगवान्‌को प्रणाम किया और अनेक प्रकारके भेंट उनकी सेवामें उपस्थित की और विधिवत् पूजन किया ॥ २२ ॥ इसके बाद उन्होंने अपना समस्त कोष आदि रामको अर्पण कर दिया और उनकी आज्ञासे