श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 591, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ेंसर्गः ३ } मनोहरकाण्डम् ५७५
नमः सत्याय शुद्धाय बुध्द्याय ज्ञानरूपिणे । गृहाणाचमनं देव सर्वलोकैकनायक ॥८१॥ ब्रह्मांडोदरमध्यस्थैस्तीर्थेश्च रघुनन्दन । स्नापयिष्याम्यहं भक्त्या त्वं गृहाण जनार्दन ॥८२॥ संतप्तकांचनप्रख्यं पीतांबरमिमं हरे । संगृहाण जगन्नाथ रामचन्द्र नमोऽस्तु ते ॥८३॥ श्रीरामाच्युत यज्ञेश श्रीघनानन्द राघव । ब्रह्मसूत्रं सोत्तरीयं गृहाण रघुनायक ॥८४॥ किरीटहारकेयूररत्नकुंडलमेखलाः । ग्रैवेयकौस्तुभं हारं रत्नकंकणनूपुरान् ॥८५॥ एवमादीनि सर्वाणि भूषणानि रघूत्तम । अहं दास्यामि ते भक्त्या संगृहाण जनार्दन ॥८६॥ कुंकुमागकुकस्तूरीकर्पूरेणमिश्रचन्दनम् । तुभ्यं दास्यामि विश्वेश श्रीराम स्वीकुरु प्रभो ॥८७॥ तुलसीकुन्दमन्दारजातिपुन्नागचम्पकैः । कदंबकरवीरैश्च कुसुमैः शतपत्रकैः ॥८८॥ नीलांबुजैर्बिल्वदलैः पुष्पमाल्यैश्च राघव । पूजयिष्याम्यहं भक्त्या संगृहाण नमोऽस्तु ते ॥८९॥ वनस्पतिरसैर्दिव्यैर्गन्धाढ्यैः सुमनोहरैः । रामचन्द्र महीपाल धूपोऽयं प्रतिगृह्यताम् ॥९०। ज्योतिषां पतये तुभ्यं नमो रामाय वेधसे । गृहाण दीपकं राजंस्त्रैलोक्यतिमिरापहम् ॥९१॥ इदं दिव्यान्नममृतं रसैः षड्भिरन्वितम् । श्रीराम राजराजेन्द्र नैवेद्यं प्रतिगृह्यताम् ॥९२॥ नागवल्लीदलैर्युक्तं पूगीफलसमन्वितम् । तांबूलं गृह्यतां राम कर्पूरादिममन्वितम् ॥९३॥ मङ्गलार्थं महीपाल नीराजनमिदं हरे । संगृहाण जगन्नाथ रामचन्द्र नमोऽस्तु ते ॥९४॥
अथ नमस्काराष्टकमन्त्राः
ॐ नमो भगवते श्रीरामाय परमात्मने । सर्वभूतान्तरस्थाय सीतीताय नमो नमः ॥९५॥ ॐ नमो भगवते श्रीराम रामचन्द्राय वेधसे । सर्ववेदांतवेद्याय सीताय नमो नमः ॥९६॥ ॐ नमो भगवते श्रीविष्णवे परमात्मने । परात्पराय रामाय सीताय नमो नमः ॥९७॥
किये हुए इस पूजनको ग्रहण करिए ॥८०॥ सत्य, शुद्ध, बुद्ध्य और ज्ञानस्वरूप सत्यवान्को प्रणाम है । हे देव ! हे सर्वलोकैकनायक ! मेरे दिये हुए इस आचमनको आप ग्रहण करें ॥८१॥ ब्रह्माण्डमें जितने तीर्थ हैं, उनके जलसे मैं आपको स्नान कराऊँगा सो आप स्वीकार करें ॥८२॥ हे हरे ! अच्छी तरह तपाये हुए सुवर्णके समान इस पीताम्बरको आप ग्रहण कीजिए । हे जगन्नाथ ! हे रामचन्द्र ! आपको प्रणाम है ॥८३॥ हे श्रीराम ! हे अच्युत ! हे यज्ञेश ! हे श्रीघनानन्द ! हे राघव ! हे रघुनायक ! उत्तरीय वस्त्रके साथ दिये हुए मेरे इस यज्ञोपवीतको आप ग्रहण करें ॥८४॥ किरीट, हार, केयूर, रत्नजड़ित कुण्डल, मेखला, माला, कौस्तुभका हार, रत्नजटित कंकण, नूपुर, इस प्रकार सब तरहके आभूषण मैं आपको भक्तिपूर्वक दूंगा, सो आप ग्रहण करिए ॥८५ । ८६॥ कुमकुम, अगरु, कस्तूरी तथा कपूरसे मिश्रित चन्दन हे विश्वेश ! हे श्रीराम ! हे प्रभो ! मैं आपको दूंगा। सो आप स्वीकार करें ॥८७॥ तुलसी, कुन्द, मन्दार, जूही, पुन्नाग, चम्पक, कदम्ब, करवीर तथा शतपत्रके फूल, नीलकमल, बिल्वपत्र और पुष्पमाल्यादिसे मैं आपका पूजन करूँगा । उसे आप ग्रहण करें। मैं आपको प्रणाम करता हूँ ॥८८ । ८९॥ वनस्पतिके दिव्य रसों और सुगन्धसे मिश्रित दिव्य धूप आपको आघ्रापन कराऊँगा हे रामचन्द्र, हे महीपाल ! आप इसे ग्रहण करें ॥९०॥ संसारके सारे ज्योतिर्मय पदार्थोंके पति हे राम ! हे वेध ! आपको नमस्कार है । हे राजन् ! तीनोंलोकका अंधकार नष्ट करनेवाले इस दीपकको आप ग्रहण करिए । छः रसोंसे युक्त तथा अमृतके समान सुस्वादु यह दिव्यान्न तैयार है । हे श्रीराम ! हे राजराजेन्द्र ! आप इस नैवेद्यको ग्रहण करिए ॥९१ । ९२॥ पानके पत्तोंसे जोड़े हुए, सुपारी तथा कर्पूरादि मसालोंसे युक्त इस ताम्बूलको आप ग्रहण करें ॥९३॥ हे महीपाल ! हे हरे ! मङ्गलके निमित्त दिये हुए मेरे इस नीराजनको आप ग्रहण करें। हे जगन्नाथ ! हे रामचन्द्र आपको प्रणाम है ॥९४॥ अब आठ नमस्कार बतलाते हैं । भगवान्, श्रीराम, परमात्मा, सब प्राणियोंके भीतर रहनेवाले, सीताके माप रामचन्द्रज- को प्रणाम है ॥९५॥ भगवान् श्रीरामचन्द्र, ब्रह्मा और सब वेदांत जाननेवाले सीताके पति रामको प्रणाम है ॥९६॥ भगवान् विष्णु, परमात्मा, परात्पर एवं सीताके साथ विराजमान रामको प्रणाम है ॥९७॥