भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

पृष्ठ 592, कुल 811 में से

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५७६ आनन्दरामायणे [ सर्गः ३

ॐ नमो भगवते श्रीरघुनाथाय शार्ङ्गिणे । चिन्मयानन्दरूपाय ससीताय नमो नमः ॥९८॥ ॐ नमो भगवते श्रीराम श्रीकृष्णाय चक्रिणे । विशुद्धज्ञानदेहाय ससीताय नमो नमः ॥९९॥ ॐ नमो भगवते श्रीवासुदेवाय धीविष्णवे । पूर्णानन्दरूपाय ससीताय नमो नमः ॥१००॥ ॐ नमो भगवते श्रीराम रामभद्राय वेधसे । सर्वलोकशरण्णाय ससीताय नमो नमः ॥१०१॥ ॐ नमो भगवते श्रीरामयामिततेजसे । ब्रह्मानन्दैकरूपाय ससीताय नमो नमः ॥१०२॥ इति नमस्काराष्टकमन्त्रा ।

नृत्यगीतादिवाद्यादिपुराणपठनादिभिः । राजोपचारैर्निखिलैः सन्तुष्टो भव राघव ॥१०३॥ विशुद्धज्ञानदेहाय रघुनाथाय वेधसे । अन्तःकरणशुद्धिं देहि मे रघुनन्दन ॥१०४॥ नमो नारायणानंत श्रीराम करुणानिधे । मामुद्धर जगन्नाथ घोरान्संसारसागरात् ॥१०५॥ रामचन्द्र महेश्वास शरणागतवत्सर । त्राहि मां सर्वलोकेश तापत्रयमहाबलात् ॥१०६॥ श्रीकृष्ण श्रीकर श्रीश श्रीराम श्रीनिधे हरे श्रीनाथ श्रीमहारिष्णो श्रीनृसिंह कृपानिधे ॥१०७॥ गर्भजन्मजराव्याधिघोरसंसारसागरात् मामुद्धर जगन्नाथ कृष्ण विष्णो जनार्दन ॥१०८॥ श्रीराम गोविन्द मुकुंद कृष्ण श्रीनाथ विष्णो भगवन्नमस्ते । प्रौढारिषड्वर्गमहाभयेभ्यो मां त्राहि नारायण विश्वमूर्ते । १०९ ॥ श्रीरामाग्रज यज्ञेश श्रीधरानन्द राघव । श्रीगोविन्द हरे विष्णो नमस्ते जानकीपते ॥११०.। ब्रह्मानन्दैकविज्ञनं त्वन्नामस्मरणं नृणाम् । स्वत्पादाम्बुजसद्भक्तिं देहि मे रघुपल्लभ । १११ । नमोऽस्तु नारायण विश्वमूर्ते नमोऽस्तु ते शाश्वत विश्वयोने । त्वमेव विश्वं सचराचरं च त्वामेव सर्वं प्रवदन्ति सन्तः ॥११२॥ नमोऽस्तु ते कारणकारणाय नमोऽस्तु कैवल्यफलप्रदाय नमो नमस्तेऽस्तु जगन्मयाय वेदान्तवेद्याय नमो नमस्ते ।११३

भगवान् श्रीरघुनाथ, शार्ङ्गी चिन्मयानन्दरूप और सीतासहित रामको प्रणाम है । ९८ ॥ भगवान् श्रीरामकृष्ण चक्री, विशुद्ध ज्ञानदेहधारी, सीता के साथ रामको प्रणाम है, ९९ ॥ भगवान् श्रीवासुदेव-स्वरूप विष्णु पूर्णानन्दरूप सीताके साथ रामको प्रणाम है ॥१००॥ भगवान् श्रीरामभद्र, वेधा (ब्रह्मा) और सब लोगोंके शरणदाता सीताके साथ रामको प्रणाम है ॥१०१॥ जो अनन्त तेजधारी भगवान् रामचन्द्रजी हैं। उन ब्रह्मानन्दके एकमात्र रूपधारी सीताके साथ रामको प्रणाम है ॥१०२॥ हे राघव ! मेरे नृत्य, गीत, वाद्य तथा पुराण पठन आदि समस्त राजोचित उपचारांसे आप प्रसन्न हो । १०३ ॥ विशुद्ध ज्ञानरूप देह धारण करनेवाले श्रीरघुनाथजीको प्रणाम है। हे रघुनन्दन ! आप हमें अन्तःकरणकी शुद्धि प्रदान करिए । १०४॥ हे नारायण ! हे अनन्त ! हे श्रीराम ! हे करुणानिधे ! आपको प्रणाम है। हे जगन्नाथ ! हमारा घोर संसारसागरसे उद्धार करें ॥१०५॥ हे रामचन्द्र ! हे महेश्वास ! हे शरणागतवत्सल ! हे सर्वलोकेश ! इस तापत्रयरूपी महानलसे बचाइए ॥१०६॥ हे कृष्ण ! हे श्रीश ! हे श्रीराम ! हे श्रीनिधे ! हे श्रीनाथ ! हे महाविष्णो ! हे श्रीनृसिंह ! हे कृपानिधे ! गर्भ, जन्म, जरा तथा व्याधिरूप घोर संसारसागरसे मुझे उद्धारिए ! हे जगन्नाथ ! हे कृष्ण ! हे विष्णो ! हे जनार्दन ! १०७-१०८॥ हे श्रीराम ! हे गोविन्द ! हे मुकुन्द ! हे कृष्ण ! हे श्रीनाथ ! हे विष्णो ! हे भगवन् ! आपको नमस्कार है । हे नारायण ! हे विश्वमूर्ति ! प्रौढ़ अरिषड्वर्गके महाभयसे मेरी रक्षा करिए । १०९ हे श्रीराम ! हे अग्रभुन ! हे यज्ञेश ! हे श्रीधरानन्द राघव ! हे गोविन्द ! हे हरे ! हे विष्णो ! हे जानकीपत, आपको नमस्कार है । ११० ॥ हे रघुपल्लभ ! आपका नामस्मरण ब्रह्मानन्दक विज्ञानको उत्पन्न करता है। आप हम अपने चरणकमलकी सद्भाक्ति प्रदान करिए ॥ १११ ॥ हे कारणोंके भी कारण ! आपको नमस्कार है। हे कैवल्य फल प्रदान करनेवाले प्रभो ! आपको प्रणाम है । हे जगन्मय ! हे वेदान्तवेद्य ! आपको नमस्कार है, नमस्कार है ॥ ११२ ॥ हे भरतके अग्रज !

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