भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

पृष्ठ 643, कुल 811 में से

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पृष्ठ 643

सर्गः ६ ] मनोहरकाण्डम् १२७


षष्ठः सर्गः

(रामनोभद्रमें देवताओंकी स्थापनाविधि तथा रामनवमीकी कथा)

अथ सर्वतोभद्र तद्देवताश्च लिख्यन्ते । प्राणानायम्य देशकालौ स्मृत्वा रामतोभद्रदेवतास्थापनं वा रायलिंगतोभद्रदेवतास्थापनं वा रमानामनोभद्रदेवतास्थापनं वा रमानामनोभद्रदेवतास्थापनं करिष्य इति संकल्प्य । ब्रह्मजज्ञानमिति मन्त्रस्य वामदेवऋषिः त्रिष्टुप्छन्दः ब्रह्मदेवता ब्रह्मस्थापने विनियोगः ॥ 'ब्रह्मजज्ञान०' सर्वतोभद्रमध्ये ब्रह्माणमावाहयामि ॥ १ ॥ उत्तरे वापीप्राणनामे 'आप्यायस्व०' सोमाय नमः सोममावाहयामि ॥ २॥ ईशान्यौ खंडेन्दौ 'तमीशानं०' ईशानाय नमः ईशानमावाहयामि । ३ ॥ पूर्व्वस्यां वाप्यां 'त्रातारमिन्द्र०' इन्द्राय नमः इन्द्रमावाहयामि ॥ ४ ॥ आग्नेय्यां खंडेन्दौ 'अग्निदूतं०' अग्नये नमः अग्निमावाहयामि ॥ ५ ॥ दक्षिणस्यां वाप्यां 'यमायत्वांगिर०' यमाय नमः यममावाहयामि । ६ ॥ नैर्ऋत्यां खंडेन्दौ 'असुन्वंत०' निर्ऋतये नमः निर्ऋतिमावाहयामि ॥ ७ ॥ पश्चिमायां वाप्यां 'तत्त्वायामि०' वरुणाय नमः वरुणमावाहयामि ॥ ८ ॥ वायव्ये खंडेन्दौ 'आनो नियुद्भिः०' वायवे नमः वायुमावाहयामि ॥ ९ ॥ शम्भुसोममध्ये मन्त्रे 'निवेशनेोवंगमरोवनां०' ध्रुवं अध्वा सोम आपः अनिलं अनल प्रत्यूष प्रभासमित्यष्टवसूनावाहयामि ॥ १० । सोमेशानमध्ये मन्त्रे 'नमस्ते रुद्र०' वीरभद्र शम्भु गिरीशं अजैकपादं अहिवुध्न्यं पिनाकिनं भूरनाधीश्वर कपालिन दिक्पति स्थाणुं रुद्रमित्येकादश रुद्र्रानावाहयामि ॥ ११ ॥ ईशानेंद्रमध्ये मन्त्रे 'आकृष्णेन०' भगं वरुण सूर्य वेदांग भानु रवि तमासि हिरण्यरेतसं दिवाकर मित्र आदित्य विष्णुनिति द्वादशादित्यानावाहयामि । १२ । इन्द्रामिमध्ये मन्त्रे 'अश्विना तेजसा चक्षु०' अश्विनीकुमाराभ्यां नमः अश्विनौ देवावावाहयामि ॥ १३ ॥ अग्नियममध्ये मन्त्रे 'समावर्त्तणितूंतो०' सर्व्वऋतॄन् देवानावाहयामि ॥ १४ ॥ यमनिर्ऋतिमध्ये मन्त्रे 'अमितवं देव०' मरुद्भ्यो नमः मरुतानावाहयामि ॥ १५ ॥ निर्ऋतिवरुणयोर्मध्ये मन्त्रे


अब सर्वतोभद्र और उसके देवताओंके आवाहन तथा स्थापनकी विधि बतलाते हैं। प्राणायामपूर्वक देश काल आदिका उच्चारण करके "रामतोभद्रके देवताका स्थापन, लिंगातोभद्रके देवताका स्थापन, रामनामतोभद्रके देवताका स्थापन अथवा रमारामतोभद्रके देवताका स्थापन करूँ।" ऐसा संकल्प करके "ब्रह्मजज्ञानम्" आदि मंत्रको पढ़ता हुआ विनियोग करे । "ब्रह्मजज्ञानम्" यह मंत्र पढ़कर ब्रह्माका आवाहन करे । उत्तर वापीके पास 'आप्यायस्व' यह मंत्र पढ़कर सोमका आवाहन करे ॥ १ ॥ २ ॥ ईशानके खण्डेन्दुमें 'तमीशानं' इस मंत्रसे ईशका आवाहन करे । ३ ॥ पूर्वकी वापीमें 'त्रातारं' इस मंत्रसे इन्द्रका आवाहन करे ॥ ४ ॥ अग्निकोणके इन्दुमें 'अग्निदूतं इस मंत्रसे अग्निका आवाहन करे ॥ ५ ॥ दक्षिण वापीमें 'यमायत्वा' इस मंत्रसे यमका आवाहन करे ॥ ६ ॥ नैर्ऋत्यके खण्डेन्दुमें 'असुन्दंत' इस मंत्रसे निर्ऋतिका आवाहन करे ॥ ७ ॥ पश्चिम वापीमें 'तत्त्वायामि' इस मंत्रसे वरुणका आवाहन करे ॥ ८ ॥ वायव्य कोणके खण्डेन्दुमें 'आनो नियुद्भिः' इस मंत्रसे वायुका आवाहन करे । ९ ॥ शंभु और सोमके मध्यवाले भद्रमें 'निवेशनीहं०' इस मंत्रसे ध्रुव, अध्वर, सोम आदि आठ वसुओंका आवाहन करे ॥ १० ॥ सोम और ईशानके मध्यवाले भद्रमें 'नमस्तेरुद्र' इस मंत्रसे वीरभद्र, शम्भू, गिरीश, अजैकपाद, अहिवुध्यं, पिनाकी, भूतानामीश्वर, कपाली, दिक्पति, स्थाणु और रुद्र इन एकादश रुद्रोंका आवाहन करे ॥ ११ । ईशान और इन्द्रके मध्यवाले भद्रमें 'आकृष्णेन' इस मन्त्रसे भग, वरुण, सूर्य, वेदांग, भानु, रवि, गभस्ति, हिरण्यरेतस, दिवाकर, मित्र, आदित्य और विष्णु इन द्वादश सूर्योंका आवाहन करे ॥ १२ ॥ इन्द्र और अग्निके मध्यवाले भद्रमें 'अश्विना तेजसा' इस मन्त्रसे अश्विनीकुमारोंका आवाहन करे ॥ १३ ॥ अग्नि और यमके मध्यवाले भद्रमें 'समावर्षणः

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