भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

पृष्ठ 644, कुल 811 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 644

६२८ ] आनन्दरामायणे [ सर्गः ६

'आयंगौः०' भूतगणेभ्यो नमः भूतानागानावाहयामि ॥ १६ । वरुणवायुमध्ये भद्रे नदीभ्यः पौञ्जिष्टं गन्धर्वाप्सरोभ्यो नमः गन्धर्वाप्सरस आवाहयामि ॥ १७ ॥ ब्रह्मसोममध्ये वाप्यां 'यदक्रंदः प्रथमं०' स्कन्दाय नमः स्कन्दमावाहयामि ॥ १८ । 'नमः शंभवे०' नंदीश्वराय नमः नंदीश्वरमावाहयामि ॥१९। 'भद्रं कर्णेभिः०' शूलाय नमः शूलमावाहयामि ॥ २० । 'विश्वकर्मा- ह्यज०' महाकालाय नमः महाकालमावाहयामि ॥ २१ ॥ ब्रह्मैशानमध्ये वल्लीषु 'आदितिद्यौँ०' ऋक्षादिभ्यो नमः ऋक्षादीनावाहयामि ॥२२। ब्रह्मंद्रमध्ये वाप्यां 'श्रियस्ते०' दुर्गायै नमः दुर्गामा- वाहयामि ॥ २३ ॥ 'इदं विष्णु०' विष्णवे नमः विष्णुमावाहयामि । २४॥ ब्रह्माग्निमध्ये वल्लीषु 'उदीरिता०' स्वधायै नमः स्वधामावाहयामि । २५ । ब्रह्मयममध्ये वाप्यां 'अरन्मयो०' मृत्यवे नमः मृत्युमावाहयामि ॥ २६ ॥ ब्रह्मवरुणमध्ये वाप्यां 'गणानांत्वा०' गणपतये नमः गणपति- मावाहयामि ॥२७॥ ब्रह्मवरुणमध्ये वाप्यां 'शन्नोदेवी०' अद्भ्यो नमः अप आवाहयामि । २८ ॥ ब्रह्मवायुमध्ये वल्लीषु 'मरुतोयस्य०' मरुते नमः मरुतमावाहयामि ॥ २९ ॥ ब्रह्मणः पादमूले कर्णिकाधः 'स्योनापृथिवि०' पृथ्व्यै नमः पृथिवीमावाहयामि ॥३०॥ तत्रैव 'पञ्च नद्यः सरस्वती०' गंगादिसर्वनदीरावाहयामि ॥ ३१। तत्रैव धाम्नोद्याम्नोजगंस्ततोवरुण०' सप्तसागरेभ्यो नमः सप्त- सागरान्वावाहयामि ॥३२॥ ततः कर्णिकोपरि नाममंत्रेण मेरवे नमः गदामावाहयामि । ३३ । ततः पीतपरिधौ सोमादिसन्निधौ क्रमेण आयुधानि सोमसमीपे गदायै नमः गदामावाहयामि ॥ ३४ ॥ ईशानसमीपे शूलाय नमः शूलमावाहयामि ॥३५॥ इन्द्रसमीपे वज्राय नमः वज्रमावाहयामि ॥३६॥ अग्निसमीपे शक्तये नम शक्तिमावाहयामि ॥३७॥ यमसमीपे दंडाय नमः दंडमावाहयामि । ३८॥ निर्ऋतिसमीपे खङ्गाय नमः खड्गमावाहयामि ॥ ३९ । वरुणसमीपे पाशाय नमः पाशमावाह- यामि ॥४०॥ वायुसमीपे अंकुशाय नमः अंकुशमावाहयामि ॥४१॥ पुनः सोमस्योत्तरे सदा समीपे


इस मन्त्रसे सर्वरूप विश्वेदेवका आवाहन करे। १४॥ यम और निर्ऋतिके बीचवाले भद्रमे 'अग्नियं देव' इस मन्त्रसे यक्षोंका आवाहन करे ॥ १५ ॥ निर्ऋति और वरुणके बीचवाले भद्रमे 'आयंगौ' इस मन्त्रसे भूतों और नागोंका आवाहन करे ॥ १६ ॥ वरुण और वायुके मध्यमें नदीभ्यः' इस मन्त्रसे गन्धर्वों और अप्सराओं- का आवाहन करे ।। १७ ।। ब्रह्मा और सोमके मध्यवाली वापामे 'यदक्रन्दः' इस मन्त्रसे स्कन्दका आवाहन करे ! १८ ।। 'नमः शंभवे' से नन्दीश्वर, 'भद्रं कर्णेभिः' से शूल और 'विश्वकर्मा' इस मन्त्रसे महाकालका आवाहन करे । १९ ॥ २० ॥ २१ ॥ ब्रह्मा और ईशानके मध्यवाली वल्लियोंमे 'आदितिद्यौ' इस मन्त्रसे नक्षत्र आदिका आवाहन करे ।। २२ ।। ब्रह्मा और इन्द्रके मध्यवाली वापीमे 'श्रियस्ते' इस मन्त्रसे दुर्गाका आवाहन करे ॥ २३ ॥ 'इदं विष्णुः' इस मन्त्रसे विष्णुका आवाहन करे ॥ २४॥ ब्रह्मा और अग्निके मध्यवाली वल्लीमे 'उदीरिता' इस मन्त्रसे स्वधाका आवाहन करे ॥ २५ ॥ ब्रह्मा और यमके मध्यवाली वापीमें 'अरं मृत्यो' इस मन्त्रसे मृत्युका आवाहन करे । २६ ॥ ब्रह्मा और निर्ऋतिके मध्यवाली वल्लियोंमे 'गणानां त्वा' इस मन्त्रसे गणपतिक। आवाहन करे । २७। ब्रह्मा और वरुणके मध्यवाली वापीमे 'शन्नो देवी' इस मन्त्रसे जलका आवाहन करे ॥ २८ ॥ ब्रह्मा और वायुके मध्यवाली वल्लियोंमें 'मरुतो यस्य' इस मन्त्रसे मरुत्का आवाहन करे ॥ २९ ॥ ब्रह्माके पाँवके पासवाला कर्णिकाके नीचे 'स्योना पृथिवि' इस मन्त्रसे पृथ्वीका आवाहन करे ॥ ३० ॥ वहीं ही पञ्चनद्यः' इस मन्त्रसे गंगा आदि सब नदियोंका आवाहन करे ॥ ३१ । वहीं ही 'धाम्नो धाम्नो' इस मन्त्रसे सप्त सागरोंका आवाहन करे ॥ ३२ ॥ इसके बाद कर्णिकाके ऊपर नाममन्त्रस मेरका आवाहन करे ॥ ३३ ॥ पीत परिधिमे सोम आदिके पास क्रमशः आयुधोंका आवाहन करे । गदाके नाम- मन्त्रसे गदाका, ईशानके समीप शूलके नाममन्त्रसे शूलका, इन्द्रके समीप वज्रका, अग्निके पास शक्तिका यमके समीप दण्डका, निर्ऋतिके पास खड्गका और वरुणके पास पाशका आवाहन करे ॥३४-४०॥ फिर वायुके

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित) · पृष्ठ 644, कुल 811 में से · BharatKosha