भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 679

सर्गः ९ ] मनोहरकाण्डम् १६१


ये ढुंढिं पूजयिष्यन्ति तेऽर्च्याः स्युःसुरपुंगवन्। माधवाग्रे चतुर्थी तु तस्मिन्काल उपोषितः ॥२८॥
अर्चयित्वा विघ्नराजं यात्रां तत्र कारयेत्। चतुर्थी कुन्दनाम्नीयं कुन्दपुष्पैः प्रपूजयेत् ॥२९॥
माघशुक्लपंचमी सा ज्ञेया धीवरैर्परा शुभा । तस्यां तीर्थं रघुनाथमर्चयेद् गंधचंदनैः ॥३०॥
माघशुक्लचतुर्थ्यां तु वरमागत्य च श्रिया । पञ्चम्यां कुन्दकुसुमैः पूजां कुर्यात्ससृद्धये ॥३१॥
नीत्वा रामं चूतवृक्षमूले दोलस्थमीश्वरम्। सीतारामं पूजये च गेहे चाऽथ प्रपूजयेत् ॥३२॥
प्रवृत्ते मधुमासे तु प्रतिपद्दिने रवौ। कृत्वा चावश्यकार्याणि संतर्प्य पितृदेवताः ॥३३॥
वंदयेद्दोलिकाभूमिं... भूरिद्रुतोपशांतये यदिच्छसि सुखेंद्रेण बहुधा सुकृतेन च ॥३४॥
अतस्त्वं पाहि मां देवि भूते भूतिप्रदा भव। चैत्र मसि महापुण्य पुण्ये तु प्रतिपद्दिने ॥३५॥
यस्तत्र श्वपचं स्पृष्ट्वा स्नानं कुर्यान्नरोत्तमः। न तस्य दुरितं किंचिन्नाधयोव्याधयो नृप ॥३६॥
वृत्ते तुषारसमये सितपञ्चदश्याः प्रातर्वसन्तसमये मधुप्रारंभने च ।
प्राश्याय चूतकुसुमं सह चंदनेन नित्यं हि विप्रपुरुषोऽथ समाः सुखी स्यात् ॥३७॥
चूतमग्रं वसंतस्य माकरं कुसुमं नवं मन्मदनं विवृण्वन् सर्वकामार्थसिद्धये ॥३८॥
पञ्चम्यां माधवस्यापि चूतपुष्पं सचन्दनम् प्राशयेन्नरोऽपि वा गलकंठो भविष्यति ॥३९॥
चूतपुष्पप्राशनेन कोकिलास्वादवन्म्रुदुः भविष्यति मानवानां कलकंठो मनोरमः ॥४०॥
सीताराम मधूपूवैस्तथा कोमलपल्लवैः पूजयेत्त्वन्वहं भक्त्या दोलोत्सव महोत्सवैः ॥४१॥
चैत्रकृष्णप्रतिपदि चूतपुष्पं सचन्दनम् पीत्वा मनोरमं ज्ञेयं सीतारामं प्रपूजयन् ॥४२॥


विशेष बात है, उन्हें बतला रहा हूं। वसन्तऋतु में एक दिन आकर गणेशजीका पूजन करे ॥२५॥२६॥ माघशुक्ल चतुर्थीको गणपति का पूजन तथा उपवास करना चाहिये। ... ... ... अन्न और गणपतिको पूजन करता है, वह प्राणी देवताओं तथा असुरोंका भी पूज्य होता है ॥२७॥२८॥ शास्त्रोंका विधि है कि माघशुक्ल की चतुर्थीको उपवास करके गणेशजी का पूजन और ... ... करना चाहिये। इसका नाम 'कुन्द चतुर्थी' है। इसलिये इस दिन कुन्दके पुष्पसे गणेशजीका पूजन करना चाहिये ॥२९॥ माघशुक्लकी पञ्चमीको 'श्रीयञ्चमी' समझकर उस रोज रामचन्द्रजीका श्वेत चन्दन करना चाहिए। इससे यह मतलब निकला कि माघ शुक्ल चतुर्थीको श्रीसे पूजन करके पञ्चमीको कुन्दके फूलसे अपनी समृद्धिके लिये पूजन करे ॥३०॥३१॥ विशेष अच्छा तो यह हो कि रामचन्द्रजीको आम्रवृक्षके नीचे ले जाय और झूलेमें बिठाकर पूजन करे। यदि ऐसा न कर सके तो घर ही में पूजन कर ले ॥३२॥ चैत्रमास लगते ही प्रतिपदाको सूर्योदयके समय आवश्यक कामोसे निपटकर पितरोंका तर्पण करे और सब प्रकारके दुःखोंकी शान्तिके निमित्त होलिकाभूमिकी वन्दना करना चाहिये। हे देवि ! ब्रह्मा तथा विष्णुजीने आपकी वन्दना की है॥३३॥३४॥ अतएव हे देवि ! तुम मेरे लिये भी विभूतिदात्री बन जाओ। परम पवित्र चैत्रके महीने में पुण्य नक्षत्र और प्रतिपदाको जो मनुष्य श्वपच (चाण्डाल) को छूकर स्नान करता है, उसे न किसी प्रकारका पातक लगता है और न किसी प्रकारके आधि व्याधि ही सताती है ॥३५॥३६॥ जाड़ेके दिन बीत जाने और बसन्त ऋतुके अन्दर वसन्तपञ्चमीके पूर्णिमाको प्रातःकाल चन्दनके साथ आमका बौर चटे तो हे विप्र ! वह प्राणी साल भर बहुत सुखमें रहता है ॥३७॥ बौरको चाटते समय 'चूतमग्रं वसन्तस्य' यह मन्त्र पढ़ना जाय, जिसका मतलब होता है कि हे सहकार वृक्ष ! मैं वसन्तऋतुके अग्रिम भागमें तुम्हारा फूल चन्दनके साथ इस वास्ते चाट रहा हूं कि मेरी सब अभिलषित कामनायें पूर्ण हो जायें ॥३८॥ माधवमासकी बसन्ती पञ्चमीको भी चन्दनके साथ बौर चाटना चाहिये। ऐसा करनेसे उसका स्वर कोकिलके समान मीठा हो जाता है ॥३९॥ उस दिन आम्रपुष्पका प्राशन करनेसे प्रत्येक मनुष्यका स्वर कोयलके स्वरकी तरह मीठा हो सकता है ॥४०॥ प्रतिदिन नूतन म्रुग अथवा वस्त्रको झूलेमें बिछाकर बादामके बौर तथा कोमल पल्लवोंसे सीतासह पूजन करे ॥४१॥ चैत्रकृष्णाकी प्रतिपदाको चन्दनके साथ आम्रका