भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 738

सर्गः १४] मनोहरकाण्डम् ७२१


रजोरूपा सत्वरूपा तामसी वह्निवासिनी । हेममृगापक्तचित्ता वाल्मीक्याश्रमवासिनी ॥४४॥ पतिव्रता महामाया पीतकौशेयवासिनी । मृगनेत्रा च विद्रोही धनुर्विद्याविशारदा ॥४५॥ सौम्यरूपा दशरथस्नुषा चामरवीजिता सुमेधादुहिता दिव्यरूपश त्रैलोक्यपालिनी ॥४६॥ अन्नपूर्णा महालक्ष्मीर्धीर्लज्जा च सरस्वती । शान्तिः पुष्टिः क्षमा गौरी प्रभाऽयोध्यानिवासिनी ॥४७॥ वसन्तशीतला गौरा रसातलमृतप्लावना रसानासमग्रसंस्था हेमकेयूरमण्डिता ॥४८॥ सुरार्चिता धृतिः कीर्तिः स्मृतिमंधा विभावरी । लघुदरा वरारोहा हेमकुण्डलमण्डिता ॥४९॥ द्विजपत्न्यर्पितनिजभूषा राघवतोषिणी । श्रीरामसेवनरता रत्नताटङ्कधारिणी । ५०। रामवामांगसंस्था च राघवच्छेदकारणी शरयूरसक्रीडाकारिणी राममोहिनी । ५१॥ सुवर्णतुलिता पुष्पा पुण्यकीर्त्तिः कलस्वती । कलगण्ठा कम्बुकण्ठा २भेरूर्मजगामिनी । ५२. रामचिन्तमना रामवन्दिता रामवल्लभा । श्रीरामपदचिह्नाङ्का रामरामेति भाषिणी ५३। रामपर्यङ्कशयना रामांप्रिक्षालिनी वरा । कामधेनुप्रसन्तुष्टा मातुलुङ्गकरे धृता । ५४ । दिव्यचन्दनसंस्था श्रीमूककासुरमर्दिनी । एवमष्टोत्तरशतं सीतानाम्नां सुपुण्यदम् । ५५ । ये पठंति नरा भूमौ ते धन्याः स्वर्गगामिनः । अष्टोत्तरशतं नाम्नां सीतायाः स्तोत्रमुत्तमम् । ५६ जपनीयं प्रयत्नेन सर्वदा भक्तिपूर्वकम् । सन्ति स्तोत्राण्यनेकानि पुण्यदानि महान्ति च ॥५७॥


(३५) रावण निकृन्तयिनी, (३६) विमानगता (३७) मुदा (३८) मृगेशी, (३९) रत्नमण्डिता (४०) रजोरूपा (४१) सत्वरूपा (४२) तामसी, (४३) वह्निवासिनी (अग्निमें निवास करनेवाली), (४४) हेममृगा-सक्तचित्ता (सुवर्णके मृगमें जिनका मन आसक्त हो गया था) (४५) वाल्मीक्याश्रमवासिनी (वाल्मीकिके आश्रममें निवास करनेवाली) । ४४ ॥४० (४६) पतिव्रता (४७) महामाया, (४८) पीतकौशेयवासिनी (रेशमी पीताम्बर धारण करनेवाला), (४९) मृगनेत्रा, (५०) विद्रोही, (५१) धनुर्विद्याविशारदा (धनु-विद्यामें निपुण) (५२) सौम्यरूपा (५३) दशरथस्नुषा (५४) चामरवीजिता, (५५) सुमेधादुहिता, (५६) दिव्यरूप, (५७) त्रैलोक्यपालिनी (५८) अन्नपूर्णा (५६) महालक्ष्मी, (६०) धी, (६१) लज्जा, (६२) सरस्वती, (६३) शान्ति, (६४) पुष्टि (६५) क्षमा (६६) गौरा, (६७) प्रभा, (६८) अयोध्या-निवासिनी, (६६) वसन्तशीतला, ७०) गौरा (७१) रसातलमृतप्लावना (वर्षाके ऋतुमें शीतलता होती उसके अनुसार हरण करनेसे सन्तुष्ट रहनेवाली (७२) रसानासमग्रसंस्था, ७३) हेमकेयूरमण्डिता, (७४) सुरार्चिता, (७५) धृति (७६) कीर्ति (७७) स्मृति, (७८) मेधा, (७६) विभावरी, (८०) लघुदरा, (८१) वरारोहा । ८२) हेमकुण्डलमण्डिता ॥ ४५-४९। (८३) द्विजपत्न्यर्पितनिजभूषा (जिसने अपने सब आभूषण एक ब्राह्मणीको दे दिये थे), (८४) राघवतोषिणी, (८५) श्रीरामसेवनरता, (८६) रत्नताटङ्क-धारिणी (रत्नके बने कर्णफूल पहननेवाली) ॥ ५० ॥ (८७) रामवामांगसंस्था, (८८) राघवच्छेदकारिणी, (८९) शरयूरसक्रीडाकारिणी (सरयूर्जाके जलमें विहार करनेवाला, ९०) राममोहिनी, (९१) सुवर्ण-तुलिता, (९२) पुष्पा (९३) पुण्यकीर्ति, (९४) कलस्वती, (६५) कलगण्ठा, (६६) कम्बुकण्ठा, ९७) गम्भीरा, (६८) गजगामिनी, (६९) रामचिन्तमना, (१००) रामवन्दिता, (१०१) रामवल्लभा, (१०२) श्रीरामपदचिह्नाङ्का (जिनके हृदयमें श्रीरामचन्द्रजीके चरणका चिह्न विद्यमान है), (१०३) रामरामेतिभाषिणी (सदा राम राम कहनेवाली) (१०४) रामपर्यङ्कशयना, (१०५) रामांघ्रिक्षालिनी (रामके पैर धोनेवाली), (१०६) कामधेनुप्रसन्तुष्टा, (१०७) मातुलुङ्गकरधृता, (१०८) दिव्यचन्दनसंस्था शूलकासुरघातिनी (दिव्य चन्दनपर स्थित एवं शलकासुरका नाश करनेवाली) ये एक सौ आठ सीताजीके नाम बड़े पुण्यदायी हैं ॥ ५१-५५ ॥ जो लोग इस अष्टोत्तरशतनामक पाठ करते हैं, वे धन्य और स्वर्गगामी होते हैं । यह स्तोत्र सर्वोत्तम है ॥ ५६ ॥ इसलिए लोगोंको चाहिए कि सदा भक्तिपूर्वक इसका पाठ किया करें । यद्यपि बहुतसे बड़े-बड़े और-और पुण्यदायक स्तोत्र हैं, किन्तु हे भूसुर ! वे सब इसके