भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

पृष्ठ 774, कुल 811 में से

संदर्भ में पढ़ें
पृष्ठ 774

श्रीसीतापतये नमः श्रीवाल्मीकिमहामुनिकृतशतकोटिरामचरितान्तर्गत-

आनन्दरामायणम्

'ज्योत्स्ना'ऽभिधया भाषाटीकयाऽऽटीकितम्


पूर्णकाण्डम्

प्रथमः सर्गः

( सोमवंशी राजाओंकी कथाका विस्तार )

श्रीरामदास उवाच

अथ शासति राजेन्द्र रामे सीताभिरञ्जिते । समायामेकदा दूत. सुवेगश्च गजाद्वयात् ॥ १ ॥
सभास्थं स विक्लवो रामं नत्वाऽब्रवीद्वचः । राम राजीवपत्राक्ष सोमवंशाद्भवैर्नृपैः ॥ २ ॥
सवेष्टितं गजपुरं नलार्यैश्चिरजीविभिः । तद्दूतवचनं श्रुत्वा राघवोऽतीव विस्मितः ॥ ३ ॥
वसिष्ठं प्राह भद्रान्मे न कदा पार्थिवात्मजाः । समागता मया योद्धुं किमिदानीं हि भूपते ॥ ४ ॥
किं कारणं गुरो ह्यत्र विचारय सविस्तरम् । तद्रामवचनं श्रुत्वा तं गुरुः प्रत्यभाषत ॥ ५ ॥
प्रष्टव्यमत्र वाल्मीकिं येन ते चरित कृतम् तच्छ्रुत्वा लक्ष्मण प्रेष्य समाहूयाथ तं मुनिम् ॥ ६ ॥
सीतया पूजनं कृत्वा शर्म पृष्ट्वं न्यवेदयत् । वाल्मीकिस्तु तदा प्राह राम किंचिद्विहस्य सः ॥ ७ ॥
किं त्वं न वेत्सि राजेन्द्र विनोदान्मां तु पृच्छसि । शृणुष्व तर्हि मे वाक्यं सर्व शृण्वन्तु ते प्रियाः ॥ ८ ॥
एकादश सहस्राणि वत्सराणि तथा पुनः । एकादश समाश्चापि मासास्त्वैकादशैव हि ॥ ९ ॥


श्रीरामदास कहने लगे- जब कि रामचन्द्रजी सीताके साथ सुख भोगते हुए अयोध्याका राज कर रहे थे । उन्हीं दिनों सुवेगका एक घबड़ाया हुआ दूत हस्तिनापुरसे आ पहुँचा । उसने भगवान्‌को प्रणाम करके कहा-हे राजीवपत्राक्ष राम ! सोमवंशी राजे नल आदिने हस्तिनापुरको चारों ओरसे घेर लिया है । दूतकी यह बात सुनकर रामचन्द्रजी बड़े विस्मित हुए ॥ १-३ ॥ वे गुरु वसिष्ठसे बोले- हे गुरुवर ! यह मैं क्या सुन रहा हूँ ? आज तक तो कभी ये राज मेरे साथ युद्ध करने नहीं आय थे ॥ ४ ॥ कृपा करके आप इसपर सविस्तार विचार करिए । रामकी बात सुनकर वासिष्ठजीने कहा कि यह बात आप वाल्मीकिजीसे पूछें । क्योंकि उन्होंने ही आपके चरित्रकी रचना की है यह सुनकर रामने लक्ष्मणको भेजकर वाल्मीकिजीको बुलवाया ॥ ५ ॥ ६ ॥ वाल्मीकिने आनेपर सीताके साथ-साथ रामने उनकी पूजा की और हस्तिनापुरका सब समाचार कह सुनाया । वाल्मीकिने हँसकर कहा- क्या आपको ये बातें नहीं मालूम हैं ? मालूम हैं । किन्तु कौतुक वश आप हमसे पूछ रहे हैं। अच्छा, आपकी यही इच्छा है तो सुनिए । आपके प्रियजन भी सावधानीके साथ मेरी बात सुनें ॥ ७ ॥ ८ ॥ ग्यारह हजार ग्यारह वर्ष, ग्यारह महीना, ग्यारह दिन, ग्यारह घड़ा और ग्यारह पलका समय