भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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पृष्ठ 777

७६० आनन्दरामायणे [ सर्गः १

अस्माकं सेवकः सोऽस्ति दशास्यः करप्रदः । निजं पुरं प्रगन्तव्यमधुना चिरकालतः ॥४४॥ दिग्भ्रंशयादथ सर्वैर्जीविताः स्म चिरं भुवि । पुरूरवादिकास्ते नः पूर्वजाः सन्ति वा मृताः ॥४५॥ नास्माभिर्विद्यते कापि तद्वार्त्ता भ्रमतः श्रुतम् । अतः स्वगोपुरं गत्वा द्रष्टव्यास्तेऽत्रिपूर्वजाः ॥४६॥ चेत्सोमपृथुगोर्नागं गन्तव्यं दर्शनेच्छया । तर्हि ताभ्यां युता देवाः किं जेता रावणेन हि ॥४७॥ किं ताभ्यां रहिता देवा जिताश्चेति न संशयम् । आगतेभ्यस्त्विह ज्ञेयं विदितं हस्तिनापुरे ॥४८॥ भविष्यति ततो यद्धि कार्य्यं तत्कार्य्यम् । इति निश्चित्य य नलः शनैः स्वनगरं ययौ ॥४९॥ एतस्मिन्नन्तरे राम त्वज्जनोऽप्यवतीर्णवान् । हन्वा तं रावणं देवा मोचितास्ते दिवं गताः ॥५०॥ सप्तद्वीपांतरास्था ये नृपास्ते रावणकृताः । पुरूरवादिकाः स्त्रींश्च निष्कास्यान्यं गजाह्वये ॥५१॥ सुषेणः स्थापितः पूर्वं वानरैः सहितस्त्वया । ततः पुरूरवाद्यास्ते स्वकालेन मृतांस्त्विह ॥५२॥ इदानीं ते समायाताः सोमवंशोद्भवा नृपाः । नलाद्याः सप्त स्वपुरं सप्तद्वीपपुरोत्तमाः ॥५३॥ त्वत्कृताः स्ववशगा ये च द्वीपांतरस्थिताः । तृपास्तेषां पूर्वजान् स्वसैर्न्यैस्ते नृपोत्तमाः ॥५४॥ बलिनः कोटिशः सर्व्वे प्रभायाता गजाह्वयम् । भविष्यति त्वया तैश्च समरः सोमवंशजैः ॥५५॥ तदा ब्रह्मा सुरैर्युक्तः समागत्य तवांतिकम् । पदयोस्ते प्रणामंश्च नलाद्यैः कारयिष्यति ॥५६॥ कृत्वा वः प्रार्थनां तेऽपि त्वां वैकुण्ठं प्रनेष्यति । एव राम सविस्तारं तवाग्रे कथितं मया ॥५७॥ यत्पृष्टं मां त्वया पूर्वं नलादीनां कथानकम् । विवाहकाण्डमारभ्य रम्यं रामायणं शुभम् ॥५८॥ समग्रं हि मया राम पुराणं श्रावितं मया पुत्राभ्यामधुना सर्व्वं शृणुष्व रघुनंदन ॥५९॥ इत्युक्त्वा कुशलवयोरथवाग्दां मुनिस्ततः । विवाहकाण्डाण्डकाण्डानि चत्वारि जगतुः शिशू ॥६०॥


हे मन्त्रणा की कि अब रावण सब देवताओंको पकड़कर लङ्केश्वरपर ही ले आया है, अब हम स्वर्गलोकको नयाँ चल । ३६-४३ । रावण हमारा सेवक है, वह हम कर देता है । इस लोकको घूमते-घूमते ही बहुत दिन हो गये हैं । इसलिए अब अपनी पुरीको लौट चलना चाहिए । कितनी दिशाओंमें घूमते फिरते हमलोग बहुत समय तक जीवित रहे, किन्तु पुरूरवा आदि हमारे पूर्वज जीवित हैं वा मर गये । मुझे उनकी कुछ भी खबर नहीं है ॥ ४४ ॥ ४५ ॥ अतएव चलें, अपने राजभवनहीमें वापस चलें । वहांका हाल-चाल देखें और अपने तीनों पूर्वजोंका दर्शन करें ॥ ४६ ॥ लेकिन उनका यह भी नहीं ज्ञात है कि सोम और पृथु भी तो और-और देवताओंके साथ रावण द्वारा बन्दी नहीं बना लिये गये । हस्तिनापुर चलनेसे यह बात भी ज्ञात हो जायेगी । उसके बाद जो करना उचित होगा, वह किया जायगा । ऐसा निश्चय करके वह अपने नगरको लौटा ॥ ४७-४९ । इसी समय हे राम ! आपका अवतार हो गया । आपने रावणको मार डाला और देवताओंको छुड़ा लिया । जिससे वे सब देवता स्वर्गलोकको चले गये ॥ ५० ॥ सातों द्वीपामें रहनेवाले राजाओंको आपने अपने वशमें कर लिया, वे पुरूरवा आदितीन राजा भी आपके वशमें हो गये । तब आपने उनको हस्तिनापुरसे निकालकर वानरोंके साथ सुषेणको उसका गद्दीपर बिठाल दिया । कुछ दिनों बाद समय आनेपर पुरूरवा आदि भी मर गये ॥ ५१ । ५२ । इस समय नल आदि सोमवंशी राजा उन सप्त राजाओंके साथ यहाँ आ रहे हैं जिनको कि आपने अपने वशमें कर लिया था और अब तक वे किसी दूसरे द्वीपमें रक्षा करते थे । वे राजा अकेले नहीं बल्कि अपने पूर्वजों तथा करोड़ोंकी विशाल सेना के साथ हस्तिनापुरपर चढ़े आ रहे हैं । उन सोमवंशियोंके साथ आपका युद्ध करना पड़ेगा ॥ ५३-५५ ॥ इस समय सब देवोंके साथ ब्रह्माजी आकर नल आदिसें आपका प्रणाम करवायेंगे । ५६ ॥ इसके बाद ब्रह्मा आपकी विधिवत् स्तुति करके अपने साथ आपको वैकुण्ठलोक ले जायेंगे । हे राम ! इस तरह मैंने आपको आज्ञा से उन नल आदि चन्द्रवंशी राजाओंका वृत्तान्त विस्तारपूर्वक बताया ॥ ५७ ॥ हे रघुनन्दन ! बहुत दिन हुए, जब मैंने विवाहकाण्ड- से लेकर सारी रामायण आपको सुनादी थी । अब आप अपने पुत्रोंके मुखसे यह पुनीत कथा सुनिए ॥ ५८ ॥ ५९ ॥ इतना कहकर वाल्मीकिने कुश और लवको रामचरित्र सुनानेकी आज्ञा दी और वे विवाहकाण्ड-