श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)
Srimad Ananda Ramayana Hindi
महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा
स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)
पृष्ठ 797, कुल 811 में से
संदर्भ में पढ़ें७८० आनंदरामायणे [ सर्गः ६
शंभुरुवाच
१२३ करुणाकरं भयनाशनं दुरितापहं माधव मखसंस्थितं नलसंस्थितं परमेश्वरम् । पालकं जगतामकं भवतारकं रिपुमारकं त्वां भजे जगदीश्वरं नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३२॥
ध्रुवंच वनमालिनं मनरूपिणं धरणीधरं श्रीहरिं त्रिगुणात्मकं तुलसीधरं वपुस्स्वम् । अर्ककं शरणप्रदं मधुमारकं बहुपालकं त्वां भजे जगदीश्वरं नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३३॥
गोकुलं मथुरःस्थितं रजकांतकं गजमारकं मन्सुतं बकमारकं वृकवानरं तुंगाह्वयम् । नन्दजं वसुदेवजं बलिपोषणं सुरपालकं त्वां भजे जगदीश्वर नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३४॥
केशवं काकघातिनं कपिमार्क मृगमर्दनं सुंदर द्विजपालकं दिनिजार्द्दनं दनुजार्द्दनम् । श्रावकं खरमर्द्दनं ऋषिपूजितं मुनिचिंतितं त्वां भजे जगदीश्वर नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३५॥
शंखजं जलशायिनं कुशपालकं रथवाहनं सुरनूतं प्रियपुष्पकं प्रियभूसुरं लवपालकम् । श्रीधरं मधुसूदनं भरताग्रजं गरुडध्वजं त्वां भजे जगदीश्वर नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३६॥
गोप्रियं गुरुपुत्रदं वदतां वरं करुणानिधिं सव्वंपं जनतोषदं सुरपूजितं श्रुतिभिः स्तुतम् । शुक्तिदं जनमुक्तिदं जनरंजनं नृपनन्दनं त्वां भजे जगदीश्वरं नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३७॥
चिद्वनं गिरजाधवन् प्राणशालि- वरदानमुद्य श्रीधरं धृतपद्मकं चक्रहस्तकं गतिदायकम् । शान्तिदं जनतारक, शङ्खधारिणं गजगामिनं त्वां भजे जगदीश्वर नररूपिणं रघुनन्दनम् ॥३८॥
शार्ङ्गिणं कमलाननं कमलादृशं पदपंकजं श्यामलं शरणागतं शशिगोमदं करुणाकरम् ।
समय भगवान् वनमाला धारण किये थे और उनके गान्धर्व दिव्य चन्दनका लेप किया हुआ था ॥ ३१ ॥ प्रशंसाजनकहे रघुनन्दन तुम्हारे भजन कर, भवौघ प्राप्तगमन मुक्त करनेवाले, पापनाशकारक, लक्ष्मीके पति, जगत्के परमेश्वर, सबer पालक, भक्तोंका नाशन्वान, भवसागर नाशक, शमसंहारकारी नररूप- धारी हे जगदीश्वर रघुनन्दन मै आपका प्रणाम करता हूँ ॥ ३२ ॥ ध्रुवरति वनमालाधारी, मधुनामक राक्षसका संहारक, ब्रजके पालक नवीन मेघके समान श्यामवर्ण, पृथ्वीकी रक्षा करनेवाले, सत्त्व, रज और तम इन तीनो गुणोंसे युक्त तुलसीके पति, शंकरस्वरूप आपकी विस्तार करनेवान, नररूपाधारी जगदीश्वर हे रघुनन्दन ! मै आपका भजन करता हूँ। ३३ । द्विद्गवले मथुरामें निवास करनेवाले, रजकमारी गजास्तकारी, सज्जनोंम संस्तुत, बकासुर, वृकासुर और कङ्काको मारनेवाले, नन्दसुवन वसुदेवके पुत्र पातालमे बलिके यज्ञम जानेवाले देवताओंके पालक, नररूपधारी हे जगदीश्वर रघुनन्दन ! मैं आपका भजन करता हूँ ॥ ३४ ॥ केशव, बाणसेके घिरे हुए, बालि वानरका मारनेवाले, मृगरूपधारी मारीचको मारनेवाले, सुन्दर, ब्राह्मणीके रक्षक राक्षसोंका संहार करनेवाले, सर्वदा बाल्मीकिदूत, खरको मारनेवाले, ऋषियोंसे पूजित, मुनियों द्वारा चिन्तित ओर नररूपधारी हे जगदीश्वर रघुनन्दन ! मै आपका भजन करता हूँ ॥ ३५ ॥ संसङ्गरूप बाणपण करनेवाले, तिलक शुक जैसे यशस्वी बालक हैं, रथ जिसकी सवारी है, सम्पूर्ण स्वर्ग जिनको नमस्कार करती है, जिसके सेवक विमान त्रिपथ प्रिय है, जो ब्राह्मणोमे अतिशय प्रेम रखते हैं एवं नामका जिनका बालक है जो लंकाका नाश करते हैं, जिन्होने मधुनामक दैत्यका संहार किया था जो भरतके बडे भ्राता है ओर जिनकी ध्वजामें गरुडका चिह्न बना हुआ है, ऐसे नररूपधारी हे जगदीश रघुनन्दन ! हम आपका भजन करते है ॥ ३६ ॥ जिनको गौ विशेष प्रिय है, जो यमलोकसे गुरुपुत्रको लौटा लाये थे, जो वक्ताओंमे श्रेष्ठ हैं, जो करुणाके समुद्र हैं जो सब तरहसे अपने भक्तोंकी रक्षा करते हैं, जो अपने भक्तोको प्रसन्न रखते हैं, देवतागण जिनका पूजन करते हैं चारों वेद जिसकी स्तुति करते हैं, जो सब प्रकारके भोग प्रदान करते हैं और जो अपने भक्तोंको मुक्ति प्रदान करते हैं, महाराज दशरथके पुत्र हे जगदीश्वर रघुनन्दन मैं आपका भजन करता हूँ ॥ ३७ ॥ चिद्घनरूप में, गिरजाजी मणियोकी माला धरण करनेवाले, प्राण-युक्त, श्रीधर, धैर्य प्रदान करनेवाले, गतिकारक, चक्रहस्तधारी, शान्तिदाता जनतारक, शङ्ख धारी, गजगामी, नररूप धारण करनेवाले हे जगदीश्वर रघुनन्दन ! मै आपका भजन करता हूँ ॥ ३८ ॥ धनुष