भारतकोश
श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

श्रीमदानन्द रामायण (९ काण्ड संपूर्ण - हिन्दी अनुवाद सहित)

Srimad Ananda Ramayana Hindi

महर्षि वाल्मीकि / अज्ञात द्वारा

स्रोत: Srimad Ananda Ramayana Complete 9 Kandas with Hindi Translation (उद्गम)

DevanagariHindipublished811 पृष्ठ

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सर्गः ८ ] पूर्णकाण्डम् ७८७


दशरथपूर्वजन्म कैकेय्याश्चापि ० मे । वनप्रयाणं रामस्य प्रोक्तं पूणे मतिं त्वम् ॥ ७ ।
विराधावगमारीचवधादियमवेक्ष्यि । किष्किन्धां वालिवधो ज्ञानोद्योतं कृतं ८ ।
नवमे जानकीशुद्धिर्लंका दग्धाऽथ० । दशमे सेतुमाहात्म्यं राज्ञां श्रेयागमः ॥ ९ ॥
एकादशे रावणवधाः प्रोक्ताश्च रावणम् । सीतया सार्द्धं रामस्याऽयोध्याप्रवेशतः ॥ १० ।
त्रयोदशे राघवस्य विक्रमश्च हनूमतः समाप्तं मारकाण्डं हि यात्रामण्डमुदीर्यते ॥ ११ ।
यात्रायाके प्रथमे सर्गे क्षेत्रोत्पत्तिः प्रकीर्तिता साम्राज्यस्य विभागोऽत्र सविस्तर मुदाहृतः ॥ १२॥
तृतीये सीतया रामो यात्रार्थं प्रार्थितो मुदा । चतुर्थे रामचन्द्रस्य प्रस्थानं च कुशो प्रवि ॥ १३॥
पंचमे मुनिवाक्येन यात्रां गंतुं विनिर्णयः । षष्ठे प्रोक्ता पूर्वदेशतीर्थयात्रा सविस्तरा ॥१४॥
प्रोक्ता दक्षिणतीर्थानां यात्रा रामस्य सप्तमे । तीर्थाटनं पश्चिमाशागतम् अस्त्यन्य च ॥ १५॥
यात्रोत्तरप्रदेशस्य स्वरूपे नवमेऽहथि । यात्राकाण्डसमाप्तं तु यागकाण्डमुदीर्यते । १६ ॥
सगोऽत्र प्रथमे यज्ञ संभारकरणं गुरुः । द्वितीये रामचन्द्रस्य यज्ञागारप्रवेश वर्णितः ॥ १७॥
पृथ्वीप्रदक्षिण प्रोक्ता तृतीयेऽश्वप्रवर्तितः । कुम्भोद्भवस्य रामस्य संवादाऽत्र चतुर्थके । १८।
पञ्चमे रामनाम्नो वै ह्यष्टोत्तरशतं शुभम् । षष्ठेऽह्नि वै मणियां वाजिमेधे प्रकीर्तितम् । १९॥
ध्वजारोपरिधानं च सप्तमे समुदाहृतम् । अवभृथप्लवस्नाने राघवस्यात्र वर्णितम् ॥ २०॥
नवमे वाजिमेधस्य समाप्तिः कीर्तिताऽत्र मा । यागकाण्डं समाप्तं हि विलासकाण्डमुदीर्यते ॥ २१॥
प्रथमे रघुवीरस्य स्ववराजोऽत्र कीर्तितः । द्वितीयो गतिशालिन्या जानक्याश्चापि वर्णनम् ॥ २२॥
तृतीये राघवेणोक्तं देहरामायणं प्रिये । दिनचर्याभूषानि जानक्याश्च चतुर्थके ॥ २३॥
नलपत्रगता क्रीडा पञ्चमे क्षेमणादिकम् । विजयं पञ्चमे प्रसादे षष्ठेऽलङ्कारमण्डनम् ॥ २४॥

सप्तम मूदत्त कविका मिलना तथा वृत्तान्त आदि वर्णित है ॥ ७ ॥ पाँचवें सर्गमे दशरथ और कैकेयीके पूर्वजन्मका वृत्तान्त है । छठे सर्गमें रामका वनगमन और मातंग- विराध-जटायु-मारीच आदिका वध तथा आठवें सर्गमें किष्किन्धा पर्वतपर बालिवध दर्शित है ॥ ९ ॥ ८ ॥ नवें सर्गमें सीताकी खोज और लङ्कादहन, दसवें सर्गमें सेतुमाहात्म्य तथा काशी-विश्वनाथके आगमनका वर्णन है ॥ ६ ॥ एकादश सर्गमें रामके द्वारा रावण आदिका वध तथा बारहवें सर्गमें सीताके साथ रामका अयोध्या में लौटना और राज्य भिषेकका वर्णन है ॥ १० ॥ तेरहवें सर्गमें राम और हनुमान्जीके पराक्रमका वर्णन है। इस प्रकार मारकाण्ड समाप्त हो जाता है ॥ ११ ॥ अब यात्राकाण्ड कहते हैं। इसके पहिले सर्गमें राज्य क दू० इलाकाका विभाग दूसरे प्रथम साम्राज्यका विभाजन वर्णित है ॥ १२ ॥ तीसरे सर्गमें सीता द्वारा यात्राका प्रार्थना और शशुपन्नप ज हूं की ओर रामकी यात्राका वर्णन है ॥ १३ ॥ पाँचवें सर्गमें कुम्भादर मुनिका सन्नाहम कथा का सविस्तर वर्णन है ॥ १४ ॥ छठेमें पूर्व देशके यात्राका वर्णन है । १४ ॥ सातव साम दक्षिण भारतके तीर्थोका वर्णन आठवें सर्गमें पश्चिम प्रदेशके सब तीर्थोंकी यात्राका वर्णन है ॥ १५ ॥ नव सर्गमें उत्तर प्रदेशके तीर्थोंकी यात्राका वर्णन है। बस, यात्राकण्ड यहीं समाप्त हो जाता है। अब यागकण्डका विषय कहते है ॥ १६ ॥ इसके प्रथम सर्गमें यज्ञका सामग्रियोंका सविस्तर वर्णन है । दूसरे सर्गमें रामचन्द्रजीका याग में प्रस्थानका, तीसरे सर्गमें यज्ञीय अश्वकी पृथ्वी प्रदक्षिणा, चौथे सर्गमें राम और कुम्भादर मुनिका संवाद है ॥ १७ ॥ १८ ॥ पाँचवें सर्गमें रामका अष्टात्तरशतनाम स्तोत्र है। छठ सर्गमें अश्वमेध यज्ञमें जानवाली रामकी दिनचर्याका वर्णन है ॥ १९ ॥ सातवें सर्गमें ध्वजारोपणविधान माहात्म्य अवभृथस्नान और नव सर्गमें अश्वमेध यज्ञकी समाप्ति वर्णित है ॥ २० ॥ बस, यहाँ यागकाण्ड समाप्त हो जाता है । अब विलासकाण्ड प्रारम्भ होता है ॥ २१ । इसके प्रथम सर्गमें रामस्ववराज और दूसरे सर्गमें जानकजीकी रतिशालाका वर्णन है ॥ २२ । तीसरे सर्गमें सीताजीको रामने देहरामायण सुनायी है । चौथे सर्गमें सीताका दिनचर्याका वर्णन है ॥ २३, पाँचवें सर्गमें जलपत्रकी क्री ड़ाये और आलिङ्ग हरूपका विवेचन है । छठें सर्गमें ब्राह्मणपरण के लिए सीता द्वारा अलङ्कार-दानका वर्णन है।