आनन्दमठ (वन्दे मातरम् एवं संन्यासी विद्रोह इतिहास)
Anandamath with Vande Mataram - Bankim Chandra
बंकिमचन्द्र चट्टोपाध्याय द्वारा
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संदर्भ में पढ़ेंएक सिपाही ने सुना था कि मेजर साहब पदचिन्ह की खबर लिया करते है, तुरंत वह वैष्णवी को मेजर साहब के शिविर मे ले गया। मेजर साहब को देखकर वैष्णवी ने मधुर कटाक्ष का बाण छोड़ा। मेजर साहब का तो सर चक्कर खा गया। वैष्णवी तुरंत खंजड़ी बजाकर गाने लगी- ‘ ‘म्लेच्छ निवहनितमे कलयसि करवालम्‘‘ साहब ने पूछा-‘‘ओ बीबी! तोमारा घड़ कहां?‘‘ बीबी बोली-‘‘मै बीबी नही हूं, वैष्णवी हूं। मेरा घर पदचिन्ह मे है।‘‘ साहब -‘‘ह्रेयर इज दैट एडसिन पेडसिन? होआं ऐ ठो घर हाय?‘‘ बैष्णवी बोली-‘‘घर? है।‘‘ साहब-‘‘घर नई-गर-गर-नई-गड़-‘‘ शांति-‘‘साहब! मै समझ गई, गढ़ कहते हो?‘‘ साहब-‘‘येस-येस, गर-गर....हाय?‘‘ शांति-‘‘गढ़ है-भारी किला है।‘‘ साहब-‘‘केहा आडमी?‘‘ शांति-‘‘गढ़ मे कितने लोग रहते है? करीब बीस-पचीस हजार।‘‘ साहब-‘‘नान्सेस- एक ठो केल्ला मे दो-चार हजर होने सकता। अबी हुई पर हाय कि सब चला गया?‘‘ शांति-‘‘वे सब मेले मे चले जाएंगे!‘‘ साहब-‘‘मेला मे टोम कब आया होआं से?‘‘ शांति-‘‘कल आए है साहब!‘‘ साहब-‘‘ओ लोग आज निकेल गिया होगा?‘‘ शांति मन-ही-मन सोच रही थी कि-‘‘तुम्हारे बाप के श्राद्ध के लिए यदि मैने भात न चढ़ाया, तो मेरी रसिकता व्यर्थ है। कितने स्यार तेरा मुंड खाएंगे, मै देखूंगी।‘‘ प्रकट रूप मे बोली-‘‘साहब! ऐसा हो सकता है, ऐसा हो सकता है। आज चला गया हो सकता है। इतनी खबर मै नही जानती। बैष्णवी हूं, मांगकर खाती हूं-गाना गाती हूं, तब आधा पेट भोजन पाती हूं। इतनी खबर मै क्या जानूं? बकते-बकते गला सूख गया- पैसा दो, मै जाऊं। और अच्छी तरह बख्शीश दो, तो परसो खबर दूं।‘‘ साहब ने झन से एक रुपया फेकते हुए कहा-‘‘परसो नही, बीबी!‘‘ शांति बोली-‘‘दुर बेटा, बैष्णवी कहो, बीबी क्या?‘‘ साहब-‘‘परसू नही, आज रात को खबर मिलने चाही।‘‘ शांति-‘‘बंदूक माथे के पास रखकर नाक मे कड़वा तेल छुड़वाकर सोओ। आज ही मै दस कोस रहा तय कर जाऊं और आज ही फिर लौट आऊं- और तुम्हे खबर दूं? घासलेटी कही के!‘‘ साहब-‘‘घासलेटी किसको बोलता?‘‘ शांति-‘‘जो भारी वीर, जेनरल होता है।‘‘ साहब-‘‘ग्रेट जेनरल हाम होने सकता। हाम-क्लाइव का माफिक। लेकिन आज ही हमको खबर मेलना चाही। सौ रूपी बख्शीश देगा।‘‘ शांति-‘‘सौ दो, हजार दो, बीस हजार दो-पर आज रात भर मे मै इतना नही चल सकती।‘‘ साहब-‘‘घोड़े पर?‘‘ शांति-‘‘घोड़ा चढ़ना जानती तो तुम्हारे तंबू मे आकर भीख मांगती?‘‘